बार बार चुनाव हारते अखिलेश यादव

images (24)

यूपी चुनाव 2022 के समय समाजवादी पार्टी की तरफ से सरकार बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। अखिलेश ने अपनी चुनावी रणनीति के अनुसार तमाम उन छोटे दलों को साथ लिया जो किसी न किसी स्थिति में वोट काटने की क्षमता रखते थे।

समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में लगातार चुनाव पर चुनाव हारती जा रही है, बल्कि कड़वी सच्चाई यह है कि अब राजनीति के गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि अखिलेश में सियासी समझदारी कम और अकड़बाजी ज्यादा है। अपने इर्दगिर्द की चौकड़ी के बीच घिरे रहते हैं। सोशल मीडिया से निकलकर जमीन पर उतरते नहीं हैं, इसलिए जमीनी हकीकत से भी अंजान हैं। विरोध के नाम पर सरकार के सभी फैसलों का विरोध अखिलेश की सियासत का शगल बन गया है। राजनीति में शिष्टाचार जरूरी है, यह मूल मंत्र भी अखिलेश भूल गए हैं, गत दिनों विधानसभा के अंदर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने जिस तरह से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के पिताजी को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया वह इसलिए तो दुखद था ही क्योंकि मौर्या के पिता का कभी भी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं रहा है, इससे भी बड़ी बात यह है कि उनकी मृत्यु भी काफी पहले हो चुकी है।

अखिलेश के विरोधी तो यहां तक कहने लगे हैं कि बड़ों का अपमान करना अखिलेश के संस्कार बन गए हैं, वह डिप्टी सीएम मौर्या के पिता ही नहीं अपने पिता और चाचा को भी सार्वजनिक रूप से अपमानित कर चुके हैं, जिन बसपा सुप्रीमों मायावती को वह (अखिलेश) बुआ कहकर बुलाते थे, उनके साथ भी 2019 के लोकसभा चुनाव के समय किया गया गठबंधन टूटने के बाद सपा प्रमुख का व्यवहार काफी खराब रहा था। 2019 में बसपा-सपा साथ-साथ चुनाव लड़े तब अखिलेश को मायावती में कोई बुराई नहीं लगती थी और अब गठबंधन टूटने के बाद इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में वह राजनैतिक फायदा लेने के लिए बसपा सुपीमो के खिलाफ अनाप-शनाप बयान देने के साथ ही बसपा को भाजपा की बी टीम बताने लगे। यह और बात है कि इतना सब होने के बाद भी अखिलेश अपनी पार्टी का भला नहीं कर पा रहे हैं। पहले तो वह सपा की दुर्दशा के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर तोहमत लगा दिया करते थे, लेकिन अब जबकि इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान पूरी तरह से अखिलेश के हाथ में थी, तब भी समाजवादी पार्टी का कोई खास भला नहीं हुआ।  
    
यूपी चुनाव 2022 के समय समाजवादी पार्टी की तरफ से सरकार बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। अखिलेश ने अपनी चुनावी रणनीति के अनुसार तमाम उन छोटे दलों को साथ लिया जो किसी न किसी स्थिति में वोट काटने की क्षमता रखते थे। इसके बाद भी सपा सरकार बनाने के आंकड़े के आधा सीटों पर ही जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। सवाल खड़े होने लगे तो अखिलेश ने दिल्ली की सियासत छोड़ यूपी पर फोकस करने का मन बनाया। आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर यूपी की राजनीति में कूद पड़े, लेकिन लोकसभा उप चुनाव के परिणाम उनके लिए परेशानी का सबब बन गए। वह अपनी सीट पर अपने ही भाई को नहीं जिता पाए। आजमगढ़ और रामपुर में हुए लोकसभा उप चुनाव में मिली हार ने समाजवादी पार्टी के भविष्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

खैर, राजनैतिक पंडितों की बात की जाए तो उनको लगता है कि इसका कारण पार्टी के भीतर जारी खेमेबाजी है। चुनाव से ऐन पहले अखिलेश यादव ने खेमेबाजी को कम करने की गरज से ही दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पार्टी के नाराज चल रहे वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात कर सब कुछ ठीक हो जाने का मैसेज देने की कोशिश की थी, वह भी परवान नहीं चढ़ सकी, जो हालात बने हुए हैं उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के खिसकते जनाधार को बचाने की है। वह अपने पिता की तरह यादव-मुस्लिम गठजोड़ को बनाए रखने में लगातार नाकामयाब होते जा रहे हैं। सपा का यादव बेल्ट तक में जनाधार खिसकता दिख रहा है। लोकसभा उप-चुनाव में बसपा ने जिस तरह से सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी की वह 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा के लिए संजीवनी तो सपा के परेशानी का सबब बन सकता है। इससे भी बड़ी चिंता अखिलेश के सामने अपने गठबंधन को बचाए रखने की है।
समाजवादी पार्टी के सहयोगी दलों में दूरी बढ़ती दिखने लगी है। लोकसभा उप चुनाव के बाद से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का जो बयान सामने आया है, वह अखिलेश की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। वे अखिलेश यादव को ए0सी0 कमरों से बाहर निकल कर जनता के बीच जाने की बात करते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि 2024 में अगर जीतना है तो ए0सी0 कमरों से निकलना होगा। आजम खान की नाराजगी तो चुनाव परिणाम के दिन ही देखने को मिल गई थी। महान दल पहले ही साथ छोड़ गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश ने विधान परिषद में भेजकर उनकी थोड़ी नाराजगी जरूर कम कर दी है, लेकिन यदि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने स्वामी की बेटी को बदायूं से टिकट नहीं दिया तो उनको सपा में बनाए रखना आसान नहीं होगा। ऐसे में अखिलेश को गठबंधन बचाए रखने से लेकर पार्टी के भीतर की खींचतान से भी निपटने की चुनौती है। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सियासी चूक समीकरणों को समझने और उसके अनुरूप रणनीति बनाने में हुई। अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनाव के आधार पर लोकसभा उप-चुनाव में अपनी रणनीति को तैयार कर रहे थे, लेकिन, यहां वे भूल गए कि 2019 में उन्हें आजमगढ़ और रामपुर सीट बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के कारण मिली थी। 2014 के चुनाव में जब सपा और बसपा अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरे थे तो रामपुर का रण सपा हारी थी। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से बड़ी मुश्किल से जीते थे। ऐसे में उनकी रणनीति दोनों ही सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने को लेकर सटीक नहीं बैठी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
लोकसभा उप-चुनाव में अखिलेश यादव ने जमीनी हकीकत नहीं देखी, वह अति आत्मविश्वपास में डूबे रहे। इसीलिए आजगगढ़ में वह बसपा की रणनीति को समझने की बजाए पिता मुलायम सिंह की तरह अपने परिवार को सेट करने में लगे रहे। सपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से उतरने को मानसिक रूप से तैयार नहीं थे। वे बदायूं में ही काम करना चाहते थे, लेकिन अखिलेश यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य के चलते धर्मेंद्र को बदायूं से दूर करने की रणनीति पर काम कर रहे थे, क्योंकि यहां की लोकसभा सीट से स्वामी मौर्य अपनी बेटी संघमित्रा मौर्य को मैदान में उतारना चाहते हैं, जो इस समय बीजेपी की सांसद हैं और 2024 में बीजेपी से उनको टिकट मिलने की संभावना नहीं के बराबर है। वैसे भी पिता के भाजपा छोड़कर सपा में जाने के बाद संघमित्रा ने बीजेपी को जो तेवर दिखाए हैं, उससे साफ है कि लोकसभा चुनाव 2024 में वह पाला बदल सकती हैं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन समीकरणों को ध्यान में रखते हुए धर्मेंद्र यादव को सुरक्षित सीट आजमगढ़ से चुनावी मैदान से उतारने की रणनीति बनाई थी, जो मायावती की रणनीति के सामने धाराशायी हो गई। वहीं, आजम खान ने अपनी नाराजगी के जरिए रामपुर की सीट हासिल कर ली। अखिलेश उनके इस दांव को ठीक से संभालने में नाकाम रहे और यहीं बड़ी गलती हो गई। आजम ने केवल अपना हित देखा और अखिलेश लोगों के मन को पढ़ने में नाकाम रहे।
   
आजमगढ़ के चुनाव परिणाम के बाद एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या यादव वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हुई है? अगर चुनाव परिणाम को गौर से देखेंगे तो आपको ऐसा होता नहीं दिखेगा। दिनेश लाल यादव निरहुआ को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 35.1 फीसदी वोट मिला था। अखिलेश यादव 60 फीसदी से अधिक वोट लाकर जीते। लोकसभा उप चुनाव 2022 में निरहुआ अपने 2019 वाले प्रदर्शन तक भी नहीं पहुंच पाए। उन्हें 34.39 फीसदी वोट मिले। लेकिन, समाजवादी पार्टी 60 फीसदी से गिर कर 33.44 फीसदी पर अटकी और बसपा के पाले में 29.27 फीसदी वोट आए। ऐसे में आप दावा नहीं कर सकते कि यादव वोट बैंक में बड़ा घाटा सपा को हुआ और फायदे में भाजपा रही। हां, इतना जरूर है कि भाजपा ने अपने वोट बैंक को काफी हद तक बचाए रखा। मुस्लिम, यादव और दलित वोट अपने-अपने पाले में जाता दिखा। मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा हिस्सा बसपा के पाले में गया। दलित भी गुड्डू जमाली से जुड़े। सपा मुस्लिम-यादव समीकरण में बिखराव के कारण सीट नहीं बचा पाई।
उधर, भाजपा निरहुआ के जरिए युवा यादव वोट बैंक को साधने में कामयाब होती दिखी है। जौनपुर में गिरीश यादव को खड़ा कर भाजपा ने इसी प्रकार से यादव वोट बैंक में सेंधमारी की थी। अब वे योगी सरकार में मंत्री हैं। यादव समाज से आने वाले गिरीश ने यादवों के गढ़ में सेंधमारी की थी। निरहुआ की जीत को इस कारण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आजमगढ़ में यादव वोट बैंक के सहारे सपा अपने प्रत्याशी की जीत के लिए दिग्गज नेताओं- दुर्गाशंकर यादव, बलराम यादव और रमाकांत यादव के साथ रणनीति तैयार कर रही थी, जबकि भाजपा कन्नौज विधानसभा सीट पर मिली जीत के आधार पर आजमगढ़ में बिसात बिछा रही थी। याद कीजिए, यादव बाहुल्य कन्नौज विधानसभा सीट पर इस बार बीजेपी प्रत्याशी और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण की जीत हुई थी। इस जीत के लिए जो रणनीति भाजपा ने कन्नौज में तैयार की थी, उसकी वही रणनीति आजमगढ़ में भी काम करती नजर आई। जबकि अखिलेश यादव ने आंख मूंदकर आजम खान पर भरोसा किया। उन्हें उम्मीद थी कि यूपी चुनाव 2022 में हार के बाद से जिस प्रकार से अल्पसंख्यक समाज की नाराजगी उनके खिलाफ पनपी है, उसे दूर करने में कामयाब होंगे। आजम ने रामपुर के साथ-साथ आजमगढ़ में चुनावी सभाओं में शिरकत कर मुस्लिम वर्ग को सपा के साथ बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की। लेकिन, आजम अपने गढ़ रामपुर और आजमगढ़ में मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव को रोकने में कामयाब नहीं हो पाए।

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
restbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
betpas giriş
betpas giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
restbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
sekabet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
betpas giriş
restbet giriş
restbet giriş
siyahbet giriş
siyahbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
casinowon giriş
casinowon giriş
pusulabet giriş