भारत-रूस – नई ऊँचाइयां

भारत और रूस का यह 15वां शिखर सम्मेलन दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ल जाएगा, इसमें संदेह नहीं है। भारत और सेवियत रूस किसी जमाने में इतने प्रगाढ़ मित्र होते थे कि अमेरिकी खेमे के लोग भारत की गुट-निरपेक्षता को नकली निरपेक्षता कहते थे। दोनों राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का डटकर साथ देते थे। सेवियत रूस ने संयुक्तराष्ट्र संघ में भारत के पक्ष मे कई बार निषेधाधिकार (वीटो) का प्रयोग किया और भारत ने रूस को अपना सबसे बड़ा प्रतिरक्षा-भागीदार बनाया। कश्मीर के सवाल पर ख्रुश्चौफ और बुल्गानिन कहा करते थे कि आप आवाज दीजिए और हम चले आएंगे। भारत ने भी हंगेरी, चेकोस्लोवाकिया, अफगानिस्तान आदि विवादों पर कभी रूस का विरोध नहीं किया लेकिन जैसे ही शतीयुद्ध खत्म हुआ और सेवियत संघ का विघटन हुआ, भारत-रूस संबंध शिथिल होते गए।

इधर रूस के चीन के साथ व्यापारिक और सैन्य संबंध काफी घनिष्ट हो गए। भारत के कारण जिस पाकिस्तान से रूस हमेशा दूर रहता था, उसके भी वह थोड़ा नजदीक आने लगा है लेकिन व्लादिमीर पुतिन की इस भारत-यात्रा के दौरान यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के साथ रूस के संबंध जिस स्तर पर हैं, उस स्तर पर किसी अन्य दक्षिण एशियाई देश के नहीं होंगे। पुतिन और मोदी ने एक-दूसरे को आश्वस्त किया है कि दोनों देश अफगानिस्तान के पुननिर्माण में परस्पर सहयोग करेंगे। दोनों देश मिलकर आतंकवाद के विरूद्ध भी लड़ेंगे। भारत ने आजकल रूस के खिलाफ चल रहे पश्चिम में बहिष्कार-अभियान का साथ नहीं दिया है। उक्रेन को लेकर अमेरिका और रूस के विवाद में भारत तटस्थ रहा है। यद्यपि अमेरिका के साथ पिछले 15-16 साल में भारत के संबंध अपूर्व रूप से घनिष्ट हुए हैं लेकिन फिर भी रूस इस बात से बहुत प्रसन्न है कि उक्रेन के प्रश्न पर भारत अमेरिका के दबाव में नहीं आया।

रूस और भारत के बीच 20 समझौते हुए हैं। आठ दोनों सरकारों के बीच और 12 दोनों देशों की निजी कंपनियों के साथ। रूस गैस और तेल के सबसे बड़े निर्यातकों में है और भारत सबसे बड़े अयातकों में। अभी दोनों के बीच सिर्फ 10 बिलियन डॉलर का व्यापार है। इसे 2025 तक 30 बिलियन डॉलर तक करने का संकल्प है। नवीनतम हेलिकॉप्टर, जहाज और हथियार बनाने का समझौता भी हुआ है। भारत के लिए रूस जो 12 परमाणु संयंत्र बना रहा है, उनमें दुर्घटना की जिम्मेदारियो को लेकर जो अडंगे अमेरिका अपने संयंत्रों के साथ लगा रहा है, वे अडंगे रूस नहीं लगा रहा है। रूस ने इच्छा व्यक्त की है कि ‘यूरेशियाई आर्थिक संघ’ से भी भारत सक्रिय रूप से जुड़े। दोनों देशों के बीच पाइप लाइन बिछाने की बात भी शुरू हुई है। यदि अगले एक दशक में यह बात सिरे चढ गई तो एशिया का नक्शा ही बदल जाएगा।

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