मोदी जी ! यह भारत है धर्मशाला नहीं

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15 अगस्त 2021 को काबुल में तालिबानी आतंकियों द्वारा बलात् कब्जा कर लिए जाने के बाद अफगानिस्तान में बड़ी विषम परिस्थितियां हो चुकी हैं। भूखे भेडि़यों की तरह तालिबानी जहां जो कुछ मिल रहा है, लूट रहे हैं, आगजनी कर रहे हैं] निहत्थी जनता पर गोलियां बरसा रहे हैं। महिलाओं पर जुल्म कर रहे हैं। बच्चियों का भी अपहरण और बलात्कार किया जा रहा है। साफिया नाम की वायुसेना की पायलट को जिस प्रकार से पत्थरों से क्रूरतापूर्वक मारा गया वह दृश्य दिल दहलाने वाला है और यह सब हो रहा है शरिया कानून के नाम पर। यदि शरिया कानून यही है तो अत्याचार किसे कहा जाएगा?

प्रश्न यह है कि ऐसे में भारत तथा अन्य सभ्य देशों को, जहां लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? अभी तक तालिबानियों ने अफगानिस्तान में आम जनता तथा अपने विरोधियों के साथ जो कुछ किया है, उससे स्पष्ट है कि 20 साल पूर्व के तालिबान और अभी के तालिबान में कोई विशेष अंतर नहीं है। हां वर्तमान तालिबानी झूठ बोलने तथा प्रोपगण्डा करने में पूर्व तालिबान से बेहतर हैं। जब जेलों में वर्षों से बंद खूंखार आतंकवादी जेलों से छोड़े जा चुके हैं, इन्हें अफगानिस्तान व अमेरिकन सेनाओं के अत्याधुनिक नए हथियार भी उपलब्ध हो चुके हैं तथा देश में शरिया कानून लगाने का निर्णय किया जा चुका है तथा विश्व में गैर मुस्लिमों के विरूद्ध लड़ाई तेज करने का निर्णय किया जा चुका है तथा कश्मीर में भी उनका उपयोग भारत के विरूद्ध करने के लिए पाकिस्तान ने सहमति दे दी है तो ऐसे में सभी सभ्य सरकारें विशेष रूप से भारत सरकार को तालिबानियों का प्रतिरोध करने का उपाय करना चाहिए। यह प्रतिरोध हमें उनकी जमीन पर करना होगा जिससे कि भारत की जनता व भारत राष्ट्र को आतंकवादियों के हमले से सुरक्षित किया जा सके। यदि वे हमारी जमीन पर आकर संघर्ष करते हैं तो आम जनता व भारतीय सैन्य बलों को बहुत बड़ी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

परन्तु भारत सरकार यह सब कुछ न करके तालिबानियों के आतंक से अफगानिस्तान से भाग रहे नागरिकों को अपने यहां शरण दे रही है। उनके लिए आपात कालीन ऑनलाइन वीजा की व्यवस्था की गई है। एक प्रकार से भारत सरकार ने अफगानी नागरिकों को खुला निमंत्रण दे दिया है। उनकी कोई संख्या भी निर्धारित नहीं की गई है। इसका परिणाम यह होगा कि जितने भी लोग वहां से आना चाहें भारत सरकार उन्हें लेने के लिए तैयार है। जबकि सारे मुस्लिम देशों ने अपने यहां सुरक्षा व्यवस्थाएं बढ़ा दी है कि कोई अफगानी नागरिक उनके यहां प्रवेश न कर सके। अफगानियों के प्रवेश को रोकने के लिए टर्की ने अपने यहां सीमा पर पक्की दीवार बना दी है। सऊदी अरबिया, ईरान, बांग्लादेश जैसे राष्ट्र एक भी अफगानी नागरिक को उनके मुस्लिम होते हुए भी उन्हें अपने यहां शरण नहीं दे रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार का अनावश्यक उत्साह इस देश के लिए क्या खतरे की घंटी नहीं है?

पूर्व में आए हुए अफगानिस्तानियों की संख्या भारत में 20000 हजार है। वे भी वापस नहीं जाना चाहते। इस देश में वे हमेशा के लिए रूकना चाहते हैं, नौकरियां मांग रहे हैं और शरणार्थी दर्जा प्राप्त करने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अब नए आने वाले अफगानी नागरिक भी यहीं पर बसना चाहेंगे। हमारे नेता इस आत्मघाती रास्ते पर क्यों बढ़ चले है? क्या उन्हें आने वाली विपत्ति का अहसास नहीं है? मोदी जी यह भारत है, हमारा राष्ट्र है, इसे कृपया धर्मशाला न बनाइए। आपकी इस भूल का प्रायश्चित्त हमारी आने वाली संतति को करना होगा। पुनः विनम्र निवेदन है इस देश की कोटि-कोटि जनता की ओर से, कि अफगान शरणार्थियों को यहां शरण देना समस्या का समाधान नहीं है, तालिबानियों का प्रतिरोध करिए उनका ध्वंस करिए तथा अफगानिस्तान में करिए। अकेले करिए या अन्य देशों के साथ मिलकर करिए। पर तालिबान समस्या का हल उनके विनाश में है। अफगान शरणार्थियों को शरण देने में हमारा विनाश है। अब निर्णय आपको करना है।

डा. आनंद कुमार IPS (R)

राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्र निर्माण पार्टी

9810764795

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