भारत का कौन सा भाग कितनी देर परतंत्र या स्वतंत्र रहा

IMG-20210814-WA0038

एक शोधपूर्ण प्रशंसनीय ग्रंथ

मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा ‘भारत हजारों वर्षों की पराधीनता एक औपनिवेशिक भ्रमजाल’ में बड़े शोधपूर्ण ढंग से हमें बताया गया है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर मुस्लिम और ब्रिटिश शासन की अवधि कितने समय तक रही? इस सारणी को देखकर हमें पता चलता है कि भारत के हिंदू वीरों के प्रताप और पुरूषार्थ से कितने ही क्षेत्रों में तो विदेशी शासन, स्थापित भी नही हो पाया था, जबकि जहां कहीं स्थापित हो गया, वहां वह अधिक देर तक स्थापित नही रह पाया। उस शोध प्रबंध से हमें जो जानकारी मिलती है उसमें हिंदुओं का संभावित शासन का आरंभ ई. पू. 18000 से माना गया है (इस धारणा से सहमत नही हुआ जा सकता क्योंकि हिंदू जाति, आर्य जाति) का इतिहास तो करोड़ों वर्षों का है, जिसे कुछ हजार वर्षों में नही बांधा जा सकता। हम उसी शोध प्रबंध की मान्यता के आधार पर यहां विमर्श करेंगे कि किस प्रकार हिंदू आर्य जाति ने अपने अस्तित्व और अस्मिता की रक्षार्थ घोर परिश्रम किया? उस शोध प्रबंध के अनुसार हमें भारत के विभिन्न प्रदेशों, आंचलों, भूक्षेत्रों के विषय में निम्नवत जानकारी मिलती है :-

 जम्मू : यहां पर ईसा पूर्व 16000 से 1948 तक लगभग 18000 वर्षों तक निर्विघ्न हिंदू शासन रहा। इस क्षेत्र में मुस्लिमों का एक दिन भी शासन नही रहा, इतना ही नहीं ब्रिटिश शासन भी यहां कभी नहीं रहा। 1851 की संधि से यह तथ्य और भी स्पष्ट हो जाता है।

<लद्दाख < इस क्षेत्र की स्थिति भी जम्मू जैसी ही रही है। यहां भी हिंदू राजाओं का प्राचीनकाल से निर्विघ्न शासन रहा है और मुस्लिम या ब्रिटिश शासन की अवधि यहां भी एक दिन के लिए भी नही रही।

कश्मीर घाटी- कश्मीर घाटी में स्थिति कुछ दूसरी रही है। यहां प्राचीनकाल से 17474 वर्ष तक हिंदुओं का और 473 वर्षों तक अर्थात 1346 ई. से 1819 ई. तक 473 वर्ष के लिए मुस्लिम शासन स्थापित हो गया। परंतु मुस्लिम शासन के पश्चात ब्रिटिश अंग्रेजों का शासन यहां कभी नहीं रहा। इस प्रकार 473 वर्षों तक जम्मू लद्दाख और कश्मीर घाटी के तीनों क्षेत्रों में से 473 वर्ष के लिए घाटी ने ही पराधीनता को स्वीकार किया। समय आने पर इस क्षेत्र ने भी पराधीनता का जुआ छोड़ अपने कंधों से उतार कर फेंक दिया।

पंजाब और हरियाणा :

हरियाणा पूर्व में पंजाब का ही एक भाग रहा है। यहां हिंदुओं ने 17900 वर्ष तक निर्बाध रूप से अपना शासन स्थापित किये रखा। अपनी अस्मिता और गौरव की रक्षार्थ विभिन्न स्थानों पर यहां वीर योद्घा उत्पन्न होते रहे। फलस्वरूप सत्ता के सौदागर बनना हिंदू ने कभी स्वीकार नही किया। यहां 196 वर्ष तक मुस्लिमों का तथा लगभग 98 वर्ष तक ब्रिटिश लोगों का शासन रहा। 1849 की संधि के अनुसार यहां ब्रिटिश राज्य स्थापित हुआ था।

सिंधु-यहां 998 ई. से 1008 तक लगभग दस वर्ष तक मुस्लिम शासन रहा। इसके पश्चात 1018 से 1026 वर्ष तक अर्थात आठ वर्ष तक 1173 से 1362 ई. तक और फिर 1591 से 1842 ई. तक अर्थात 500 वर्षों तक मुस्लिमों का और 1843 से 1947 कुल 104 वर्षों तक अंग्रेजों का शासन रहा। परंतु इसके साथ-साथ यहां विदेशी सत्ता को उखाडऩे के लिए सतत संघर्ष चलता रहा। भारत की चेतना ने हार नहीं मानी और बार-बार विदेशी सत्ता को उखाड़-उखाड़ कर अलग रखती रही।

अफगानिस्तान – अफगानिस्तान प्राचीनकाल से भारत का अंग रहा था। यहां 17000 वर्ष की कालावधि में 11वीं शताब्दी से मुस्लिम शासन स्थापित हो गया। दुर्भाग्यवश यही वह क्षेत्र था जहां एक बार मुस्लिम शासन स्थापित होने पर उखाड़ा नहीं जा सका। परिणाम क्या निकला? यही कि भारत अपनी अखण्डता को खो बैठा। जिस भारत को आज हम आजाद देखते हैं, यदि कुछ कथित विद्वानों के आधार पर इस सारे भारत को सदियों तक पराधीनता भोगने वाला मान लिया जाए तो भारत की यह स्वाधीनता बिना अफगानिस्तान के अपूर्ण है। क्योंकि अफगानिस्तान ने जब अपनी स्वाधीनता खोयी थी-उस समय तो वह भारत का ही अंग था। जिसे कांग्रेस ने या अन्य किसी राजनीतिक दल ने कभी प्राप्त करने का प्रयास ही नहीं किया। यहां ब्रिटिश सत्ता एक दिन के लिए भी स्थापित नहीं हुई।

) गजनी-गोर :-अफगानिस्तान की भांति गजनी-गोर में भी 10वीं शताब्दी में ही मुस्लिम शासन स्थापित हो गया। लगभग 8-9 शताब्दियों तक गुलाम रहकर यह क्षेत्र अपनी स्वाधीनता को ही भूल गया और एक अलग मजहब के नाम पर अपने आपको भी भारत से अलग मानने लगा। इसी को धर्मांतरण से राष्ट्रांतरण कहा जाता है। यदि 8-9 शताब्दियों तक शेष भारत भी निरंतर पराधीन रह गया होता तो यह भी स्वाधीनता की परिभाषा भूल गया होता। इसे स्वाधीनता की परिभाषा का स्मरण केवल इसलिए रहा कि इसने स्वाधीनता के लिए सदा संघर्ष जारी रखा। जहां जिस क्षेत्र में स्वाधीनता का संघर्ष रूक गया वहीं स्वाधीनता की लौ बुझ गयी।

< बलूचिस्तान :-यहां 9वीं शताब्दी में मुस्लिम शासन स्थापित हुआ और निरंतर बना रहा। 1843 ई. की संधि से यहां ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। फलस्वरूप यह क्षेत्र भी भारत से दूर हो गया।

पख्तूनिस्तान-बलूचिस्तान की भांति ही यहां भी 9वीं शताब्दी में ही मुस्लिम शासन स्थापित हो गया और 1834 ई. से ब्रिटिश शासन की स्थापना हो गयी।

दिल्ली-आगरा-दिल्ली और आगरा प्राचीन काल से हिंदू शासन में रहे। पर 1193 ई. से 1758 ई. तक यहां मुस्लिम शासन रहा। हिंदू शक्ति यहां से मुस्लिम शासन को उखाडऩे के लिए सदा सक्रिय रही। 565 वर्षों के मुस्लिम शासन को एक दिन भी हिंदू शक्ति ने सुखपूर्वक शासन नही करने दिया। फलस्वरूप 1758 ई. में मराठों ने यहां अपना शासन स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। इसके पश्चात निरंतर 100 वर्ष तक यहां मराठा शासन रहा। इसके पश्चात केवल 90 वर्ष तक ही इस क्षेत्र पर अंग्रेजों का शासन रहा।

चम्बा-चम्बा ऐसा क्षेत्र है जहां प्राचीनकाल से ही (18000 वर्ष तक) निरंतर हिंदू शासन रहा है। यहां मुस्लिम शासन एक दिन के लिए भी नही रहा। 1840 ई. की संधि से यह क्षेत्र ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन अवश्य चला गया था।

थाणेश्वर :-यहां 1014 ई. से लेकर 1856 ई. तक मुस्लिम शासन रहा और 1857 ई. से यह क्षेत्र ब्रिटिश सत्ताधीशों के आधीन हो गया था।

कुल्लू-कुल्लू का क्षेत्र भी ऐसा रहा है जहां मुस्लिमों का शासन एक दिन के लिए भी नहीं रहा। 1857 से यहां ब्रिटिश राज्य स्थापित हो गया। इस प्रकार 18000 वर्ष की अवधि में कुल मिलाकर 90 वर्ष की अवधि तक ही गुलाम रहा। संपूर्ण भारत को हजारों वर्ष गुलाम दिखाने या मानने वाले लोग इन तथ्यों को समझें और अपनी अज्ञानता पर प्रायश्चित करें।

कांगड़ा-यहां पर पिछले 18000 वर्ष के इतिहास के कालखण्ड में 1620 से 1810 तक मुस्लिम शासन रहा अर्थात कुल 190 वर्ष तक यहां मुस्लिम शासन और 1856 ई. से 1947 तक कुल 90-91 वर्ष तक ब्रिटिश शासन रहा। शेष अवधि में अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता को बचाये रखने में यह क्षेत्र भी सफल रहा।

कुमायंू-18000 वर्ष की कालावधि में यहां भी कभी मुस्लिम शासन स्थापित नहीं हो सका। 1816 से यहां 130 वर्ष के लिए ब्रिटिश शासन अवश्य स्थापित हुआ। कहने का अभिप्राय है कि कुमायूं 18000 वर्ष के ज्ञात इतिहास में मात्र 130 वर्ष के लिए ही प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से किसी विदेशी सत्ता का दास रहा है।

कन्नौज-इस क्षेत्र में 1540 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन रहा अर्थात 316 वर्ष तक मुस्लिम शासन रहा। 1856 ई. की संधि से यहां भी ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। इस प्रकार लगभग 406 वर्ष तक यहां विदेशी सत्ता स्थापित रही।

अवध-अवध भी वह दुर्भाग्य पूर्ण क्षेत्र है जहां 1192 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन तो 1856 ई. से ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। परंतु इसके उपरांत भी अवध में राष्ट्रीय आंदोलन सदा चलता रहा और देश की स्वतंत्रता प्राप्ति तक निरंतर चलता रहा।

इलाहाबाद : अपने 17600 वर्ष के पिछले इतिहास में 1583 ई. तक यहां निरंतर हिंदू शासन रहा। 1583 ई. से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन और तत्पश्चात 1857 से 1947 ई. तक यहां ब्रिटिश शासन रहा। इस प्रकार यह क्षेत्र 273 वर्षों तक मुसलमानों के और 90 वर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा। इसके सांस्कृतिक गौरव को मिटाने का हरसंभव प्रयास किया गया। परंतु हिंदू शक्ति की प्रचण्डता ने सिद्घ कर दिया कि इलाहाबाद में हमारे धर्म, संस्कृति और इतिहास की त्रिवेणी में स्नान करते ही हर भारतीय पवित्र हो जाता है। कुछ भी हो 273+90=316 वर्षों के इतिहास में इलाहाबाद ने चाहे गुलामी भोगी पर उस गुलामी की प्रतिच्छाया अपनी आत्मा पर नही पडऩे दी।

< जौनपुर-जौनपुर इलाहाबाद की भांति ही 1583 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन में तथा 1856 ई. के पश्चात अंग्रेजों की अधीनता में रहा। इस प्रकार स्पष्ट है कि इलाहाबाद और जौनपुर अकबर के शासनकाल में मुस्लिमों के अधिकार में गये। जबकि सल्तनत काल में दोनों की स्वतंत्रता बनी रही।

रोहिल खण्ड-यह एक ऐसा क्षेत्र रहा है जो सल्तनतकाल और मुगल काल दोनों में स्वतंत्र रहा। परंतु 1740 ई. से 1801 ई. तक यहां मुस्लिम शासन रहा। कहने का अभिप्राय है कि औरंगजेब के शासनकाल में भी यहां हिंदू स्वतंत्रता बनी रही। 1801 ई. से इस क्षेत्र को ब्रिटिश हुकूमत झेलनी पड़ी। इस प्रकार यह क्षेत्र 207 वर्ष विदेशी सत्ता से लड़ा। जिसे इसका गुलामी काल कहा जाता है।

रामपुर : इस नगर ने अपनी हिंदू पहचान 1740 ई. में खोयी और यह मुस्लिम आधिपत्य में चला गया। 1947 ई. तक यह मुस्लिम रियासत रही, इसी काल में 1857 ई. की क्रांति के समय इस रियासत की अंग्रेजों से संधि हो गयी।

काशी : काशी हिंदुओं की अत्यंत प्राचीन नगरी है। अत्यंत प्राचीन काल से यहां हिंदू शासन आर्य पद्घति के अनुसार चलता रहा। परंतु 1195 ई. से 1775 ई. तक यह मुस्लिम शासक के आधीन रहा। इसके पश्चात 1781 ई. में यह ब्रिटिश शासन के आधीन हो गया। इस प्रकार यह क्षेत्र लगभग 700 वर्ष विदेशी दासता में रहा और दासता से मुक्ति के लिए एक लंबा संघर्ष करता रहा।

मीरजापुर : मीरजापुर अपने पिछले 18000 वर्ष के इतिहास में एक दिन भी मुस्लिम शासन के आधीन नहीं रहा। यहां हिंदू शक्ति का सूर्य चमकता रहा। 1812 ई. से यहां अंग्रेजों की सत्ता अवश्य स्थापित हो गयी थी।

मथुरा : मथुरा का भी हिंदू समाज में और हिंदू इतिहास में विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। यहां मुस्लिम शासकों के द्वारा कई बार लूटमार एवं मारकाट की गयी, परंतु इसके उपरांत भी यहां मुस्लिम शासन स्थापित नहीं हो सका। 1857 ई. से यह क्षेत्र अगले 90 वर्ष के लिए ब्रिटिश शासन के अधीन अवश्य रहा। इस प्रकार मथुरा की भूमि को पराधीनता का दंश मात्र 90 वर्ष ही झेलना पड़ा था।

< हरिद्वार : मथुरा की भांति ही हरिद्वार का भी हिंदू इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इस पवित्र नगरी में भी कभी भी मुस्लिम शासन नहीं रहा। यहां भी 1857 ई. से ब्रिटिश शासन आरंभ हुआ। इस प्रकार मथुरा की भांति हरिद्वार भी केवल 90 वर्ष के लिए विदेशी शासन के आधीन रहा।

मेरठ : मेरठ की पवित्र भूमि ने भी इतिहास के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मुस्लिम काल में यहां एक दिन के लिए भी मुस्लिम शसन नहीं रहा। यद्यपि कई बार यहां मुस्लिम आक्रांताओं ने मारकाट की। परंतु यह वीर भूमि अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में सफल रही। पराधीनता से मुक्त रहकर भी 1857 ई. की क्रांति का शुभारंभ यहीं से कोतवाल धनसिंह गुर्जर ने किया। तत्पश्चात क्रांति के विफल हो जाने पर यहां ब्रिटिश सत्ता स्थापित हो गयी। मात्र 90 वर्ष ही मेरठ को दुर्भाग्यपूर्ण पराधीनता का दंश झेलना पड़ा।

मेव रियासत : मेव रियासत के 17250 वर्ष के ज्ञात इतिहास का तथ्य स्थापित करते हुए उक्त शोधपूर्ण ग्रंथ ( भारत हजारों वर्ष की पराधीनता एक औपनिवेशिक भ्रमजाल) में कहा गया है कि 1260 ई. से यह क्षेत्र मुस्लिम आधिपत्य में चला गया। जिससे निकलने के लिए इसने अनेकों प्रयास किये। पर 1857 ई. तक भी सफलता नहीं मिली। 1858 से एक संधि के अनुसार यह ब्रिटिश सत्ता के आधीन चला गया।

आसाम : असम की पवित्र भूमि भी अपनी स्वाधीनता को मुस्लिम काल में अक्षुण्ण बनाये रखने में सफल रही थी। एक छोटे से क्षेत्र में मात्र 24 वर्ष मुस्लिम शासन रहा। जबकि 1858 से यह पवित्रभूमि अंग्रेजों की एक संधि के अंतर्गत आ गयी। इसकी स्वाधीनता और सम्मान दोनों ही बचे रहे।

कूच बिहार : यहां भी मुस्लिम शासन कभी नहीं रहा। 1858 ई. से यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन की एक संधि के आधीन आ गया।

नागालैंड : नागालैंड की भूमि भी अपनी स्वतंत्रता को बचाये और बनाये रखने में सफल रही। यहां ब्रिटिश शासनकाल में धर्मांतरण हुआ। पर ब्रिटिश शासन किसी भी प्रकार से स्थापित नहीं हो पाया था।

मेघालय मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम: इन क्षेत्रों में भी मुस्लिम शासन कभी स्थापित नहीं हो सका। 1092 से 1947 ई. तक मेघालय मणिपुर और त्रिपुरा ब्रिटिश सत्ता के आधीन मात्र 57 वर्ष रहे। जबकि सिक्किम को 1850 से 1947 तक लगभग एक शताब्दी तक अंग्रेजों के शासन के अधीन रहना पड़ा था।

बंगाल-इस क्षेत्र के लिए हमें बताया गया कि यहां 1490 ई. से 1675 ई. तक मुस्लिम शासन रहा। जबकि कंपनी ने भी यहां 92 वर्ष शासन किया। 185 वर्ष के मुस्लिम शासन काल में धर्मांतरण भी हुआ और अत्याचार भी हुए। जिनसे मुक्ति के लिए यह क्षेत्र संघर्ष करने के लिए उठ खड़ा हुआ। इसकी संघर्षशील प्रवृत्ति से ही सुभाष चंद्र<span;>के<span;> बोस जैसे अनेकों देशभक्त इस भूमि ने राष्ट्र  लिए दिये।

बिहार : बिहार के पिछले 17000 वर्ष के इतिहास में पराधीनता का काल केवल तीन सौ वर्ष के लिए आया, जब 1560 से 1856 ई. के मध्य इसे मुस्लिम शासन में रहना पड़ा। इसके अतिरिक्त 1856 ईं. से इसे ब्रिटिश शासन के अधीन रहना पड़ा। इस प्रकार लगभग 385 वर्ष इस भूमि को विदेशी सत्ता के आधीन रहकर संगीनों से जूझना पड़ा।

उड़ीसा- 17600 के अपने इतिहासकाल में इस क्षेत्र पर 1568 ई. से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन और 1856 ई. से 1947 तक ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। यद्यपि यत्र तत्र लोग अपनी स्वाधीनता को प्राप्त करने में बीच में ही सफल होते रहे। यही स्थिति बिहार की थी जहां संपूर्ण बिहार के कई हिंदू शासक अपनी स्वतंत्रता मुस्लिम काल में भी बनाये रखने में सफल रहे थे।

छत्तीसगढ़: यहां के 18000 वर्ष के इतिहास के विषय में बताया गया है कि यहां पर मुस्लिम शासन कभी भी नहीं रहा। जबकि 1857 के पश्चात से यहां ब्रिटिश शासन अवश्य स्थापित हुआ। इस प्रकार छत्तीसगढ़ को भी मात्र 90 वर्ष के लिए ही विदेशी सत्ता के आधीन रहना था।

बस्तर : यहां पर भी मुस्लिम शासन कभी स्थापित नहीं हो सका। छत्तीसगढ़ की भांति इस क्षेत्र में भी 1857 से ब्रिटिश शासकों का पदार्पण हुआ और उनकी अधीनता में बस्तर को 90 वर्ष व्यतीत करने पड़े।

भोजपाल होमगंगा-भोपाल का अपना एक और वैभवशाली इतिहास रहा है। 17300 वर्ष के हिंदू इतिहास में इस प्रदेश या क्षेत्र को 13वीं शताब्दी से 1856 ई. तक विदेशी मुस्लिम शासन के आधीन रहना पड़ा। जबकि 1857 से यहां ब्रिटिश शासन की स्थापना हो गयी। भोपाल क्षेत्र के विषय में बताकर गया है कि भोपाल गांव में 240 वर्ष तक और भोपाल क्षेत्र में 128 वर्ष तक विदेशी मुस्लिम शासन रहा। 1817 ई. से यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के आधीन चला गया।

 

(हमारा यह लेख पूर्व प्रकाशित हो चुका है लेकिन आज भी इसकी प्रासंगिकता के दृष्टिगत इसे कौन है प्रकाशित किया जा रहा है आशा है आपको अवश्य ही लाभान्वित करेगा।)

 

 

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betnano giriş
restbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş