वैदिक सम्पत्ति – 302, वेदमंत्रों के उपदेश

images (35)

(ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की ‘वैदिक संपत्ति’ नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं)

प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य (चेयरमैन ‘उगता भारत’)

गतांक से आगे……

इसके आगे संसार की समस्त जड़ शक्तियों के कल्याणकारी और शांत होने की अभिलाषा की गई है और परमात्मा से प्रार्थना की गई है कि-

शत्रो मित्रः शं वरुणः शन्नो भवत्वय मा।
शतऽइन्द्रो बृहस्पतिः शत्रो विष्णुरुरुक्रमः ॥9॥
शत्रो बातः पवता शत्रस्तपतु सूर्य:।
शत्रः कनिक्रदद्दे वः पर्जन्यो अभि वर्षतु ॥१०॥
अहानि शं भवन्तु नः श रात्रीः प्रति घीयताम् ।
शत्र इन्द्राग्नी भवतामवोभिः शत्र इन्द्रावरुणा रातहव्या ।
शत्र इन्द्रपूषणा वाजसातौ शमिन्द्रासोमा सुविताय शंयोः ।।११।। शत्रो देवीरभिष्टयो आपो भवन्तु पीतये । शंयोरभि अवन्तु नः ।।१२।। स्योना पृथिवी नो भवानृक्षरा निवेशनी । यच्छा नः शर्म सप्रथाः ।।१३।। आपो हि ष्ठा मयोभुवस्ता न ऊर्जे दधातम। महे रणाय चक्षसे ।।१४।। धौः शान्तिरन्तरिक्ष शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिविश्व देवाः शान्तिब्रह्य शान्तिः सर्व शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ।।१७।। (यजुर्वेद अध्याय ३६)

अर्थात् मित्र, वरुण, अर्यमा, इन्द्र, बृहस्पति, विष्णु और उरुक्रम आदि देवता हमारा कल्याण करें। वायु की चाल कल्याणदायक हो सूर्य का ताप कल्याणदायक हो और शब्द करते हुए पर्जन्यदेव की वर्षा भी कल्याणकारी हो। दिन कल्याणकारी हो, रात्रि कल्याणकारिणी हो और इन्द्र, अग्नि तथा वरुण आदि देवता भी कल्याणकारी हों। पीने का जल कल्याणकारी हो और वर्षा का जल भी कल्याणकारी हो। पृथिवी हमारे लिए कंटकरहित और उत्तम बसने योग्य हो। पानी हमारे लिए सुखकारी हो, उसे हम बल के लिए धारण करें और प्राकृतिक युद्धों में हमारी विजय हो। द्यौलोक शान्त हो, अन्तरिक्ष शान्त हो, पृथिवी शान्त हो, जल शान्त हो, औषधियाँ शान्त हों, वनस्पतियाँ शान्त हों, संसार की समस्त शक्तियाँ शान्त हों, शान शान्त हो, सब कुछ शान्त हो, शान्ति भी शान्त हो और वह शान्त शान्ति यावजीवन बनी रहे। इस प्रकार से जिस समय समस्त जनसमूह की सम्मिलित इच्छाशक्ति के द्वारा प्रार्थनापूर्वक प्रेरणा होती है, उस समय ईश्वर की इच्छा से बड़ी बड़ी प्राकृतिक शक्तियों में भी असर हो जाता है और विघ्न शान्त हो जाते हैं।


ये प्राकृतिक विल्प्व जीवों के सामुदायिक पापों के कारण अज्ञात शक्तियों के द्वारा उत्पन्न होते हैं, इसलिए सिवा परमात्मा की प्रार्थना के इनसे बचने का और कोई उपाय नहीं है। प्रार्थना का मतलब उपाय और उद्योग है किन्तु यहाँ प्रार्थना ही उपाय और उद्योग है। क्योंकि सामूहिक प्रार्थना का जन-समूह की सम्मिलित इच्छाशक्ति का भी बड़ा बसर होता है।

यहाँ तक वैयक्तिक व्याधि, सामाजिक व्याधि और प्राकृतिक उत्पातों से रक्षा प्राप्त करने का उपाय बतलाकर अब वेद मनुष्यों द्वारा उत्पन्न किए गए विप्लबोंसे रक्षा प्राप्त करने का उपाय बतलाते हैं। मनुष्यों द्वारा जो उत्पात होते हैं, उनके दो विभाग हैं। पहिला उत्पात सामाजिक है। यह ईष्र्या, द्वेष, आलस्य, मुर्खता और विलासिता से उत्पन्न होता है और नाना प्रकार के पाप कराता है। दूसरा बाह्म शत्रुओं के द्वारा उत्पन्न होता है, जो नाना प्रकार के कष्ट देता है। वेदों में इन दोनों से बचने के लिये राज्यव्यवस्था का उत्तम उपदेश किया गया है।

राज्यव्यवस्था का उद्देश्य समाज की रक्षा करना है। रक्षित समाज ही उन्नत और आदर्शरूप होता है। समाज की रक्षा भीतरी ओर बाहरी दो प्रकार की है। भीतरी रक्षा समाज के दुष्टों से की जाती है और बाहरी रक्षा बाहर के शत्रुधों से। जिस समाज की इस प्रकार रक्षा होती है, यह बड़ा ही दिव्य होता है। वेद में ऐसे दिव्य समाज की कामना का वर्णन इस प्रकार है-

आ षह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्यवर्चसी जायतामा राष्ट्रे
राजन्यः शूर इषव्योऽतिब्याधी महारथो जावतां
दोग्ध्री धेनुर्वोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा
जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां
निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलबत्यो
न ओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम् ।। (यजु० २२।२२)

हे जगदीश दयालु ब्रह्म प्रभु! सुनिये विनय हमारी ।
हों ब्राह्मण उत्पन्न देश में धर्मकर्मव्रतधारी ।।
क्षत्रिय हों रणधीर महारथी धनुर्वेद अधिकारी ।
धेनु दूधवाली हों सुन्दर वृषभ तुरंग बलबारी ।।
हों तुरंग गतिचपल अङ्गना हों स्वरूपगुणवाली।
विजयी रथी पुत्र जनपद के रत्न तेजबलशाली ।।
जब ही जब जग करे काममा जलघर जल बरसावें ।
फले पकें बहु सुखद वनस्पति योगक्षेम सब पावें ।।

परन्तु ये बातें तभी हो सकती है, जब शासन अच्छे राजतन्त्र के द्वारा हो। अच्छा राजतन्त्र तभी हो सकता है, जब राजा प्रजाद्वारा मनोनीत हो।
क्रमशः

Comment:

betbox giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
Betgar güncel
Betgar giriş
Betgar giriş adresi
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betasus giriş
norabahis giriş
nitrobahis giriş
noktabet giriş
betvole giriş
betvole giriş
betkolik güncel giriş
betkolik güncel
betkolik giriş
yakabet giriş
betasus giriş
betnano giriş
romabet giriş
yakabet giriş
queenbet giriş
queenbet giriş
betnano giriş
winxbet giriş
betamiral giriş
livebahis giriş
grandpashabet giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betkare giriş
kareasbet giriş
noktabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
nisanbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
livebahis giriş
livebahis giriş
nisanbet giriş
nisanbet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betorder giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş