आर्य समाज लक्ष्मी नगर का वार्षिकोत्सव हुआ संपन्न: स्वामी दयानंद के विचारों का भारत बनाने के लिए लिया गया संकल्प

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लक्ष्मी नगर। (अजय कुमार आर्य) आर्य समाज लक्ष्मी नगर दिल्ली (पंजी०)के ५६वें वार्षिकोत्सव को महर्षि दयानंद सरस्वती जी के २००वें जन्मवर्ष उत्सव (२९,३० व ३१ दिसम्बर २०२३)के रुप में मनाया गया। इस अवसर पर अनेक विद्वानों ने उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया और स्वामी दयानंद जी के सपनों का भारत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। उल्लेखनीय है कि इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वामी दयानंद जी महाराज की 200 वीं जयंती के कार्यक्रमों का आयोजन चल रहा है। जिनका शुभारंभ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 फरवरी 2023 को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम से किया था।
आर्य समाज लक्ष्मी नगर के प्रधान श्री मनु देव ने हमें बताया कि इस कार्यक्रम में आर्य जगत के प्रख्यात विद्वानों आचार्य प्रणव प्रकाश , आचार्य भूदेव ,आचार्य ब्रह्मदेव वेदालंकार , भजनोपदेशक श्री राजवीर शास्त्री ,श्री अनिल कुमार व श्री मुकेश गोस्वामी ने अलग-अलग सत्रों में उपस्थित होकर लोगों का आवाहन किया कि वे स्वामी दयानंद जी की द्विशताब्दी समारोहों के इस वर्ष में घर-घर में यज्ञ के आयोजन करने का संकल्प ले। जिससे देश की युवा पीढ़ी अपने वेदों के मौलिक चिंतन के साथ जुड़कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में संलग्न हो सके।
विद्वानों ने इस समय पर आर्य समाज के 150 वर्ष के कालखंड में आर्यों द्वारा संस्कृति रक्षा, धर्म रक्षा और राष्ट्र रक्षा में किए गए विभिन्न कार्यों पर भी प्रकाश डाला।
सुप्रसिद्ध इतिहासवेत्ता और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डा०राकेश कुमार आर्य ने इस अवसर पर इतिहास के अनछुए हुए पृष्ठों पर प्रकाश डाला और बताया कि देश के क्रांतिकारियों ने 1857 की क्रांति से भी पहले औरंगजेब के काल में एक ऐसी महान क्रांति की थी जिसने औरंगजेब के देहांत के मात्र 30 वर्ष पश्चात ही मुगल शासन को उखाड़ कर अलग फेंक दिया था। उन्होंने कहा कि उस समय गोकुल देव जाट मथुरा में, पंजाब में गुरु गोविंद सिंह तो बुंदेलखंड में छत्रसाल बुंदेला और मराठा क्षेत्र में शिवाजी महाराज आर्य राष्ट्र अर्थात हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए एक बड़ी कार्य योजना पर काम कर रहे थे। इन सब के आपस में संपर्क थे। समर्थ गुरु रामदास इन सबको एक साथ सूत्र में पिरोने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे थे। उन सब के इस प्रकार के महान कार्य और परस्पर संबंध होकर कार्य करने की शैली से पता चलता है कि हमारे देश के क्रांतिकारी महापुरुष देश की आजादी के प्रति बहुत गंभीर रहे । उनके ऐसे प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही आर्य संस्कृति की रक्षा संभव हो पाई।


क्रांतिकारी महेश योगी जी ने अपने ज्ञान,भजनों , शोधपरक तथ्यों एवं कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को आर्य समाज की मान्यताओं, वेद एवं आर्ष ग्रन्थों के परिप्रेक्ष्य में धर्म के वास्तविक स्वरूप को बताते हुए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता को समझाया तथा आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना को जागृत किया।
वार्षिकोत्सव में पधारे आर्य समाज के गौरव श्री धर्मपाल आर्य प्रधान दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा,श्री आगी सुरेन्द्र कुमार रैली प्रधान आर्य केन्द्रीय सभा,श्री अशोक गुप्ता प्रधान पूर्वी दिल्ली वेद प्रचार मंडल ने उद्बोधन दिया। इन सभी विद्वानों ने भी अपने-अपने संबोधन में स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज के बलिदान दिवस, आर्य समाज के स्थापना के डेढ़ सौ वर्ष पूर्ण होने और स्वामी जी महाराज की जयंती के 200 वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाश डालते हुए आर्य जनों को एकजुट होकर स्वामी दयानंद जी महाराज के सपनों का भारत बनाने के लिए संकल्पित किया।
सभी विद्वानों की मान्यता थी कि देश की रक्षा के लिए आज भी उतनी ही चुनौतियां हैं जितनी कभी आर्य समाज की स्थापना के समय थीं। इसलिए आर्य समाज को निष्क्रिय होकर नहीं बैठना है बल्कि देश की चेतना को और भी अधिक चेतनित करने के प्रयास निरंतर करते रहना है। वक्ताओं का मानना था कि वैश्विक शांति के लिए वेदों के आदर्शों और शिक्षाओं पर चलना समय की आवश्यकता है । इसके लिए अनुकूल अवसर है जिसे हमें होना नहीं है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न आर्य समाजों से प्रधान व मंत्री श्री राकेश शर्मा (शकरपुर)श्री रवि बहल(निर्माण विहार),श्री ईश नारंग (दयानंद विहार)श्री विवेक आहूजा (कृष्ण नगर), पीयूष शर्मा (विवेक विहार),श्री ऋषिराज (राधापुरी )श्री पाहूजा(बैंक एंक्लेव) श्री राम निवास गुप्ता (मंडावली) श्रीमहावीर भाटी तिलपता(नोएडा) श्री पतराम त्यागी ,श्री सुरेन्द्र शास्त्री व नागेश कुमार आर्य सहित भारी संख्या में आकर मनोबल वर्धन किया।
राजनैतिक क्षेत्र से लक्ष्मी नगर विधायक श्री अभय वर्मा जी , पूर्व पार्षद श्री संतोष पाल जी ने आकर जनता का उद्बोधन किया तथा आर्य समाज की प्रासंगिकता को बताया। विधायक श्री अभय वर्मा ने स्वामी दयानंद जी को भारत के स्वाधीनता आंदोलन का पितामह बताते हुए कहा कि उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण देश के अनेक क्रांतिकारियों ने सामूहिक प्रयास कर अंग्रेजी साम्राज्य को अपना बोरिया बिस्तर समेटने के लिए मजबूर कर दिया था।
आर्य समाज लक्ष्मी नगर के पदाधिकारियों श्री त्रिलोकीनाथ माहेश्वरी, श्रीमती उमा, ओमप्रकाश मलिक,यशवंत मेहता, सचिन कुमार राठी राजीव भटीजा व सभी सदस्यों एवं जनता ने मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी भाग लिया।सभी ने समुचित सहयोग से उत्सव को सफल सार्थक बनाया।

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