कम्युनिस्ट अपराध और उपकार के अंतर को समझें

साम्यवाद की विचारधारा क्या भारतीय संस्कृति के अनुकूल है? या साम्यवाद का भारतीय संस्कृति, धर्म और इतिहास से भी कोई संबंध है? यदि इन जैसे प्रश्नों के उत्तर खोजे जाऐं तो ज्ञात होता है कि वास्तविक साम्यवाद भारतीय संस्कृति में ही है। संसार का कम्युनिस्ट समाज भारतीय साम्यवाद को समझ नहीं पाया है और ना ही समझ पाएगा। क्योंकि कम्युनिस्ट चिंतन में उतनी गहराई और गंभीरता नहीं है, जितनी भारतीय संस्कृति को समझने के लिए अपेक्षित है। कम्युनिस्ट चिंतन जैसे-जैसे भारतीय संस्कृति के विशाल सागर की गहराई नापने के लिए नीचे उतरता जाता है तो एक समय आता है कि वह नीचे उतरता-उतरता अचानक रूक जाता है, थक जाता है और हांफने लगता है। तब कई चिंतक पूर्वाग्रही होकर भारतीय संस्कृति के विषय में अपने दुराग्रही निष्कर्ष प्रस्तुत कर चलते बनते हैं।
अब हम थोड़ा सा अपने चिंतन को आगे बढ़ाते हैं। वर्तमान कम्युनिस्टों ने मानव की मूलभूत आवश्यकताओं में भोजन, वस्त्र और आवास को स्वीकार किया है। उनका चिंतन पिछले सौ वर्ष से इन तीनों चीजों के चारों ओर ही सिमटा पड़ा है। इससे आगे वह बढ़ा ही नहीं। जबकि मानव की मूलभूत आवश्यकता कुछ और भी है। भोजन, वस्त्र और आवास की आवश्यकता से आगे भी कुछ है। वैदिक संस्कृति में भोजन, वस्त्र और आवास से पहले मानव को मानव बनना पड़ता है। क्योंकि भोजन, वस्त्र और आवास ये मानव की मूलभूत आवश्यकता मानी गयी है। इसलिए जब मानव को केन्द्रित करके कोई चिंतन किया जा रहा हो तो उस समय यह भी देखना पड़ेगा कि वह मानव वास्तव में ही मानव है भी या नहीं। मनुष्य दो रूपों में जीवन जीता है एक जंगली रूप में दूसरा प्राकृतिक रूप में। जंगली रूप में जीवन जीना और प्राकृतिक रूप में (कुदरती तौर पर) जीवन जीना दोनों ही मानव की विभिन्न अवस्थायें हैं। विपरीत अवस्थाएं हैं। उसका जंगली रूप उसकी दानवता है, और प्राकृतिक रूप उसकी मानवता है। उसकी दानवता में अराजकता है, असभ्यता है, अपसंस्कृति है, अभद्रता है, अशोभनीयता है और चिंतन की निम्नता है। जबकि उसकी मानवता में एक व्यवस्था है, सभ्यता है, संस्कृति है, भद्रता है, चिंतन की उदात्त अवस्था है।
वेद मानव को मानव बनने की सीख देता है और कहता है कि संसार में उच्च मानवीय समाज की संरचना करना तेरे जीवन का प्रथम उद्देश्य होना चाहिए। इसलिए वेद की आज्ञा है-मनुर्भव: जनया दैव्यं जनम। अर्थात हे मनुष्य तू मानव बन और दिव्य संतति को उत्पन्न कर।
वेद की बात स्पष्ट है कि मानव समाज की उच्चता को स्थापित करने के लिए मनुष्य मनुष्य बने और दिव्य सन्तति को उत्पन्न करे। मनुष्य मनुष्य कब बनेगा? वेद कहता है-मत्वा मयि सीव्यति अर्थात तू मननशील होकर विचारपूर्वक कार्य कर। जब मनुष्य मननशील होकर विचारपूर्वक कार्य करता है, तभी वह मनुष्य कहलाता है। अब बात आती है कि मनुष्य विचार पूर्वक कार्य कब करेगा? स्वाभाविक है कि जब धर्म की शिक्षा से प्रेरित होगा, अनुशासित होगा। कम्युनिस्टों की सुविधा के लिए हम यह भी स्पष्ट करते चलें कि धर्म की शिक्षा और मजहबी तालीम में उतना ही अंतर है जितना कि मनुष्य की प्राकृतिक अवस्था और जंगली अवस्था में अंतर है। मनुष्य की प्राकृतिक अवस्था उसका धर्म है तो जंगली अवस्थ उसका मजहब है।
ऊपरी वर्णन से एक बात स्पष्ट होती है कि मनुष्य के लिए भोजन, वस्त्र और आवास से पूर्व उसका ज्ञानवान सुसंस्कृत और धार्मिक होना आवश्यक है। उसके लिए एक व्यवस्था है कि बच्चा (कम्युनिस्टों के बच्चों सहित) अपनी शिक्षा प्राप्ति की अवस्था में भोजन, वस्त्र और आवास की समस्या से मुक्त रहता है। घर में माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग उसे मनुष्य बनाने के लिए चिंतित रहते हैं और कहते हैं कि पहले काबिल बनो फिर किसी बात की चिंता करना। कम्युनिष्ट लोग मनुष्य के निर्माण के इस जमीनी सच को नजरअंदाज करके चलते हैं। वो पहले दिन से ही बच्चे को भोजन, वस्त्र और आवास के लिए भटकते प्राणी की अवस्था में रखकर चलते हैं। जबकि वैदिक संस्कृति उस बच्चे के लिए एक व्यवस्था देती है और फिर उस व्यवस्था में ढालकर उसे पहले एक सच्चा मानव बनाती है, इसे ही सारी व्यवस्था उस बच्चे की पहली मूलभूत आवश्यकता घोषित करती है।
हमने कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास से आगे भी हमारी कुछ आवश्यकता है। निश्चित रूप से वो आवश्यकता भी हमारी मूलभूत आवश्यकता में ही सम्मिलित है। कम्युनिस्ट लोग भी उस आवश्यकता से अछूते नहीं हैं, और यह हमारा दावा भी है कि वो उस आवश्यकता से अछूते रह भी नहीं सकते। वह आवश्यकता है गृहस्थ की सामग्री की। भोजन और वस्त्र की मूलभूत आवश्यकताएं भी अधूरी रह जाएंगीं, यदि मनुष्य के ग्रहस्थ में उचित और आवश्यक सामग्री का अभाव होगा तो। संसार में आज हम जिस तंगहाली को देख रहे हैं उसके दो ही कारण हैं, एक अशिक्षा का दूसरा गृहस्थ के लिए आवश्यक सामग्री के अभाव का। यदि ये दो चीज मनुष्य के पास हों तो तभी भोजन, वस्त्र और आवास की समस्या का समाधान हो सकता है, अन्यथा बिना भोजन, बिना वस्त्र और बिना आवास के रहकर मरना मनुष्य की विवशता हो जाएगी। कम्युनिस्ट आंदोलन ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया।
वैदिक संस्कृति में अपेक्षा से अधिक संचय को अनुचित माना गया है। ईश उपनिषद में आया है-मा गृध: कस्य स्विद्घनम्-अर्थात हे मनुष्य तू लालच मत कर क्योंकि जिस धन को संचय करने का तू लालच कर रहा है, यह अंत समय में किसी का भी नहीं हो पाता है। इसलिए अपरिग्रहवादी (अपेक्षा से अधिक न जोडऩे वाला) बन। प्रत्येक प्राणी उस ईश्वर की संतान है इसलिए ईश्वर की संपत्ति पर सभी का समान अधिकार है, तू एकाधिकार वादी मत बन। परिग्रहवादी मत बन। ईश्वर की संपत्ति पर सबका समान अधिकार मानकर चल, इसलिए अपने लिए जोड़ता जोड़ता मत चल अपितु सबके लिए इदन्न मम स्वाहा कहकर छोड़ता छोड़ता चल। भारतीय संस्कृति की इस उदात्त भावना के मर्म को कम्युनिस्टों ने अपने चिंतन में कभी यथेष्ट स्थान नही दिया। इसे क्या कहेंगे उनके चिंतन की संकीर्णता या भारतीय संस्कृति के प्रति घृणा का दूषित भाव? मनुष्य की भद्रता की पराकाष्ठा भारतीय वैदिक संस्कृति में साम्यवाद का पहला लक्षण है। हमें वेदमंत्र आज्ञा देता है-यद भद्रं तन्नासुव: अर्थात जो भद्र है – हे ईश्वर! वही हमें प्राप्त करा। क्या है वो भद्र जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं? वो भद्र है संसार में रहकर चक्रवर्ती राज्य की स्थापना करना और मोक्ष की प्राप्ति करना। इसका अभिप्राय है कि भद्र इहलोक और परलोक की गति के लिए प्रयुक्त होने वाला साधन है। जिसके साधने से या साधने से मनुष्य को अभ्युदय की प्राप्ति और नि:श्रेयस की सिद्घि होती है।
आर्य वैदिक संस्कृति में वसुधैव कुटुम्बकम् जीवन का एक परमादर्श माना गया है। वसुधैव कुटुम्बकम् आर्यों का वह आदर्श है जो चक्रवर्ती राज्य की स्थापना करके विश्व को ही एक परिवार मानने और बनाने की ओर मनुष्य को लेकर चलता है। आर्यों के चक्रवर्ती राज्य की स्थापना में स्टालिनवादियों की हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और वसुधैव कुटुम्बकम् संयुक्त राष्ट्र जैसी किसी वैश्विक संस्था का नाम नहीं है। चक्रवर्ती साम्राज्य स्थापित करने का अर्थ है कृण्वन्तो विश्वमाय्र्यम् विश्व को आर्य बनाना, श्रेष्ठ लोगों का, विश्व मानस के धनी लोगों का निर्माण करना और उन्हें एक विश्व, एक राजा, एक सोच और एक आदर्श के प्रति समर्पित करना। संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रों को स्थान दिया गया है।

——शेष अगली बार पढ़ें——

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
restbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
betpas giriş
betpas giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
restbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
sekabet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
betpas giriş
restbet giriş
restbet giriş
siyahbet giriş
siyahbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş