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डॉ डी के गर्ग

साभार : भारतीय पर्व और परम्परा -द्वारा डॉ डी के गर्ग

4) व्रत और उपवास की धार्मिक वास्तविकता
एक निश्चित अवधि के लिए भोजन और पेय पदार्थों को त्यागने की क्रिया को उपवास (fasting) कहा जाता है। दूसरे शब्दों में अन्न और जल न ग्रहण करने की क्रिया उपवास कहलाता है। लेकिन शारीरिक कारणों को छोड़कर धार्मिक या अन्य किसी संकल्प के कारण किसी निश्चित अवधि के लिए भोजन ,जल आदि ग्रहण नही करना व्रत के श्रेणी में आता है।
हमारे शास्त्रों के अनुसार ईश्वर भक्ति के नाम पर भूखे रहना या प्यासे रहना धर्म का नहीं अन्ध विश्वास का प्रतीक है,सही मायने में मूर्खता है क्योंकि यदि शरीर को जरूरत के अनुसार भोजन पानी नहीं देंगे तो ये शरीर भी आपका साथ नही देगा। जैसे कि जून में गर्मी अपने चरम पर होती है और आप इस समय जबरन उपवास रखे जबकि इन दिनों में शरीर को अधिक पानी चाहिए। इस समय उपवास रखना धर्म नहीं है।
५) पति की आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत और उपवास :
यह भी कपोल कल्पना है की हर स्त्री को पतिव्रत धर्म का पालन करना चाहिये और इसलिए पति की आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत /उपवास रखना जरुरी है ,इसके विपरीत जो स्त्री भोजन करती है वह अपने पति का अनिष्ट करती है।
उपवास का वास्तविक अर्थ है―
‘उपवास’ वस्तुतः संस्कृत का शब्द ‘उपवास’ है।उपवास कहते हैं ‘पास बैठने को’।जब तुम्हारे घर कोई विद्वान या महात्मा आवे तो तुम उसका आदर करो।उसके पास बैठकर उससे उपदेश लो।यदि हम वैदिक सत्संग में जाते हैं वही उपवास है।यदि आप लोग ध्यानपूर्वक वेदों की शिक्षा सुनेंगे और उसके अनुकूल आचरण करने का निश्चय करें तो यही ‘व्रत’ होगा।यही ‘उपवास’ होगा।
उपनिषद में लिखा है
उप समीपे यो वासो जीवात्मपरमात्मयोः।
उपवासः स विज्ञेयो न तु कायस्य शोषणम्।।―(वराहोपनिषद् 2ध्39)
भावार्थ―जीवात्मा का परमात्मा के समीप होना,परमात्मा की उपासना करना, परमात्मा के गुणों को जीवन में धारण करना,इसी का नाम उपवास है।शरीर को सुखाने,कमजोर करते जाने का नाम उपवास नहीं है।
उपवास के नुकसान : आमतौर पर व्रत या उपवास रखने के जितने फायदे होते हैं उससे ज्यादा नुकसान भी हैं।व्रत या उपवास रखने के दौरान जब अधिक समय तक पेट में किसी तरह का भोजन या पेय पदार्थ नहीं जाता है तो मस्तिष्क में कुछ खतरनाक रसायन बनते हैं जिसके कारण आपको गंभीर सिरदर्द हो सकता है। आमतौर पर सिरदर्द के कई कारणों में उपवास भी एक मुख्य कारण है।
उपवास रखने से शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है जिसके कारण आपको जी मिचलाने, चक्कर आने या फिर कमजोरी की समस्या हो सकती है।
पति और परिवार की आयु बढ़ाने के उपाय
आयुर्वेद के अनुसार रात को जल्दी सोना, सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, सात्विक आहार लेना, पूर्ण निद्रा लेना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, ईश्वर पर विश्वास रखना, ईश्वर की उपासना करना, यज्ञ करना, स्वाध्याय, सत्संग आदि करना, श्रेष्ठ लोगों से मित्रता रखना, इत्यादि। इन उपायों से मनुष्य अपनी आयु को बढ़ा सकता है। यदि इन उपायों को परिवार के सब लोग अपनाएं, तो परिवार के सभी सदस्यों की आयु बढ़ेगी।
आयु घटने के कारण –
पत्नी द्वारा उपवास करने से पति की आयु नहीं बढ़ेगी। बल्कि पति के साथ मीठा बोलना, सत्य बोलना, झगड़ा नहीं करना, उसे डांटना नहीं। सभ्यता, नम्रता से व्यवहार करना, आवश्यकता पड़ने पर सेवा करना आदि उत्तम व्यवहार से तो पति की आयु बढ़ सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार, शराब पीना, अंडे मांस खाना, इत्यादि तामसिक भोजन करना, अनियमित दिनचर्या का होना, बुरे लोगों की संगति करना, व्यभिचार करना, अधिक जागना, मन इंद्रियों पर असंयम करना, नास्तिकता होना, रोग, चिंता, शोक आदि से दुखी रहना, इत्यादि से मनुष्य की शारीरिक व मानसिक शक्ति कम हो जाती है, और उससे मनुष्य अल्पायु में ही मर जाता है।
आयु को घटाने वाले इन कारणों से सभी लोग बचें। अर्थात् इन चीजों का परहेज करें, तभी आपको लाभ होगा, और जो करवा चैथ का उद्देश्य है, सबकी आयु को बढ़ाना, वह पूरा हो सकेगा।
पर्व विधि :
१. इस दिन भूखे रहने का कोई औचित्य नहीं है, हाँ शरीर शुद्धि के लिए उपवास कर सकते हैं यदि आवश्यक हो।
२. पति-पत्नी अपने व्यस्त समय से आज के दिन अवकाश लें और साथ रहे ।
३. पति-पत्नी साथ बैठकर परिवार के साथ सामूहिक यज्ञ करें और उसमे सुगन्धि और पुष्टिवर्धक औषधि सामग्री में डालें।
४. परिवार के लिए भविष्य की योजना बनायंे और सुखपूर्वक भविष्य के लिए चर्चा करें। आपसी सौहार्द के लिए चर्चा करें।
५. पति पत्नी दीर्घ आयु के लिए विगत वर्ष तक आयी सभी बुरी आदतों जैसे शराब, नशा, व्यायाम न करना आदि के विरुद्ध यज्ञ में संकल्प ले
६ अमावस्या को पृथ्वी पर अँधेरी रात होती है और धरती पर ऑक्सीज़न भी अन्य दिनों की तुलना में घाट जाती है इसलिए रात को घर के आसपास राहगीरों के लिए उजाला रखे और शाम को घी का यज्ञ जरूर करें रात्रि में देशी घी का दिया जलाकर घर में रखें।

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