भारत का संविधान अपने मौलिक स्वरूप में पंथनिरपेक्ष संविधान है। यह पंथनिरपेक्षता शब्द अपने आप में प्रत्येक व्यक्ति के उन सभी अधिकारों की सुरक्षा करता है जिनकी कल्पना तक आज के मानवाधिकारवादी कर भी नहीं सकते। राज्य किसी के प्रति पक्षपाती नहीं होगा और देश के प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुलभ कराने का हरसंभव प्रयास करेगा-पंथनिरपेक्षता की भावना का यही गूढ़ अर्थ है। 
उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में राष्ट्रवाद की जो हवा बही है उसने स्पष्ट किया है कि अब भारत में भीतर ही भीतर परिवर्तन की एक नई बयार बह निकली है। अब से पूर्व छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कुछ राजनीतिक दल हिंदू विरोध करते हुए अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करते रहे। इन लोगों ने अपनी अपनी इस दुष्प्रवृत्ति को भारतीय राजनीति का सत्रहवां संस्कार बना डाला। इनकी इस सोच का परिणाम यह निकला कि भारत में मुस्लिम भाई ‘बिकाऊ माल’ होकर रह गये। इस वर्ग के लोगों को कठमुल्लाओं ने किसी पार्टी विशेष के लिए फतवा जारी कर करके समय-समय पर बेचने का राष्ट्रीय अपराध किया। आम मुसलमान इन कठमुल्लाओं के सच को समझ नहीं पाया, जबकि कठमुल्ला और मुसलमानों के तथाकथित नेता मुसलमानों के मतों को बेचने की एवज में बड़ी भारी राशि राजनैतिक दलों से लेते रहे या उनके बदले में अपनी मनचाही आवश्यकताओं को पूर्ण कराते रहे। इन लोगों की ऐसी मानसिकता को हम राष्ट्रीय अपराध इसलिए मानते हैं कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपना मत अपने स्वतंत्र विवेक से प्रयोग करने का होता है। हर मत जहां पर स्वतंत्र हो और जहां पर हर मत अथवा वोट से यह अपेक्षा की जाती हो कि वह अपनी स्वतंत्र सहमति से प्रयुक्त की गयी है-वहां पर लाखों, करोड़ों लोगों को भेड़-बकरी की भांति किसी इमाम का फतवा हांकने का कार्य करे तो यह लोकतंत्र के विरूद्घ होने के कारण राष्ट्रीय अपराध की श्रेणी का कार्य है। परंतु चूंकि इस प्रकार के फतवों से राजनीतिक लोगों को लाभ मिलता रहा-इसलिए ऐसे राष्ट्रीय अपराध का व्यापार देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर फूलता फलता रहा। इसमें छद्मवाद इसलिए माना जाएगा कि इस प्रकार के फतवों के माध्यम से लोगों को छलने का पूरा प्रबंध इन राजनीतिक दलों ने कठमुल्लों के माध्यम से कराया। 
भारत का यह दुर्भाग्य रहा कि इसी छद्म धर्मनिरपेक्षता के गुणा-भाग को समझकर कुमारी मायावती दलितों की मसीहा बनकर उभरीं  और उन्होंने भी दलित भाईयों को अपनी जेब में डालने में सफलता प्राप्त कर ली। इस अवस्था में जाते ही कु. मायावती ने दलितों के ‘वोट बैंक’ को बेचना आरंभ कर दिया। किसी विधानसभायी या संसदीय क्षेत्र में दलित मतों की जितनी कम अधिक संख्या होती है-मायावती उसका उतना ही कम अधिक मूल्य लगाकर अपनी पार्टी के प्रत्याशी को उसे बेचती रहीं। इस प्रकार की प्रवृत्ति से लोकतंत्र यहां भी धराशायी हो गया, और वर्तमान भारत के महानायक बाबा साहेब व भीमराव अंबेडकर का समतामूलक समाज की संरचना का सपना मिट्टी में मिल गया।  बाबा साहेब ने दलित भाइयों को भारत के संविधान में कुछ विशेष प्राविधानों का लाभ देने की व्यवस्था इसलिए करायी थी जिससे कि भारत में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय को सर्वसुलभ कराकर सारे समाज में समता का साम्राज्य स्थापित किया जा सके और भारतीय समाज से ऊंच-नीच की प्रतीक जातिवादी व्यवस्था को समाप्त किया जा सके।  बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की इस मूल भावना से हमारा सारा संविधान ओत-प्रोत है, जिसे भारत का प्रत्येक संवेदनशील  व्यक्ति स्वीकार भी करता है और  उसका सम्मान भी करता है। कु. मायावती ने  बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की इस भावना केे विपरीत जाकर दलित भाईयों को समाज में अलग-थलग डालते हुए उन पर अपनी स्वेच्छाचारिता को थोप दिया और उनके मतों को अपने ढंग से प्रयोग करने लगीं। यह माना जा सकता है कि कु. मायावती से पूर्व और उनके रहते हुए भी कई राजनीतिक दलों के मुठमर्द कार्यकर्ताओं ने दलितों के मतों को बूथों पर या तो डलने नहीं दिया या अपनी मर्जी से उन्हें बिना पूछे उनके मतों को अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में डाल दिया। निश्चित रूप से ऐसा कार्य न केवल निंदनीय था अपितु यह भी लोकतंत्र की भावना के विपरीत किया गया एक राष्ट्रीय अपराध ही था-जिसमें किसी समुदाय के व्यक्ति को उसके मत देने के मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया गया था। परंतु यहां पर यह बात विचारणीय है कि यदि मायावती भी दलित भाइयों के मतों को एक लाठी से हांककर किसी एक व्यक्ति के लिए डलवा रही थीं और साथ ही साथ उन मतों की मनमर्जी से कीमत भी वसूल कर रही थीं तो यह भी वैसा ही एक राष्ट्रीय अपराध माना जाना चाहिए जैसा किसी राजनीतिक दल के मुठमर्द कार्यकर्ता दलित भााइयों के मतों का मन माफिक प्रयोग कर रहे थे। 
अब समाज के भीतर परिवर्तन की बयार इसलिए बहती हुई अनुभव हुई है कि अभी हाल में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों मुस्लिमों और दलितों के एक बड़े वर्ग ने  अपने मत को बेचने से स्पष्ट इंकार कर दिया है। इन लोगों ने मौन रहकर अपने विवेक से अपने मत का प्रयोग किया है, और जो राजनीतिक  दल या इमाम आदि इन्हें थोक के भााव बेचने का कार्य करते रहे-उन्हें लोगों ने मौन रहकर यह संकेत दे दिये हैं कि अब हम जाग चुके हैं और राष्ट्रहित में अपना निर्णय लेने की क्षमता और सामथ्र्य हमारे भीतर है। इस मौन आंदोलन की जागृति का ही परिणाम है कि इस बार पहली बार मुस्लिम मत थोक के भाव में न तो सपा को मिला है और नहीं बसपा को मिला है। राष्ट्रवाद की बयार के साथ बहने वाले दलित व मुस्लिम बंधुओं ने भाजपा को भी अपना वोट दिया है, हमें लोकतंत्र और राष्ट्र के स्वास्थ्य के दृष्टिगत ऐसे परिवर्तन का स्वागत करना चाहिए। जातिवाद और सम्प्रदायवाद इस देश की राजनीति में घुन की तरह लग चुके थे, और भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहे थे। परंतु इन चुनावों ने इस घुन को अलग करते हुए ‘राष्ट्र सर्वप्रथम’ के आधार पर लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर दिया है-और यही इन चुनावों का सबसे बड़ा संदेश है। – ‘भारतमाता की जय’

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
betnano giriş
betnano giriş
betlike giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
betparibu
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş