जब बजी वेद की बांसुरिया

जन डोले जीवन डोले और डोला सब संसार रे
जब बजी वेद की बांसुरिया रे
1. परमेश्वर की अनुकम्पा से एक तपस्वी आया।
जिसने जनता को नवयुग का नव संदेश सुनाया
हो प्यारे नव संदेश सुनाया रे….
जब….
2. जनता जागी निद्रा त्यगी सुमिर-सुमिर ओंकार रे….
जब बजी वेद की…
सब पाखण्डी कुरीतियों से उडक़र लड़ा अकेला विघ्न विरोधों बाधाओं से हंस-हंसकर खेला है, प्यारे वह हंस-हंसकर खेला….
देश जगाया धर्म बताया अपना तनमन वार रे….
जब बजी वेद की…
3. लूट रहे थे आर्य जाति को मुसलमान इसाई, उनके आक्रमणों से ही उसने यह जाति बचाई….
हो प्यारे उसने जाति बचाई….
वे सब भागे आगे जागे सुन उसकी ललकार रे…
जब बजी वेद की….
4. भाषा वेद सभ्यता अपनी थी उसने बिसराई, सर्वश्रेष्ठता अंग्रेजी की थी सबने अपनाई उसने आकर पुन: नाम दिये वैदिक उच्च विचार रे….
जब बजी….
5. कर सत्यार्थ प्रकाश उजाला सब जग में फैलाया, परमेश्वर से मिलने का भी सच्चा मार्ग बतलाया।
6. एक घड़ी इस सकलविश्व में फिर ऐसी आएगी
ओम पताका एक बार जब, सब जग में लहराएगी
और जगत में दयानंद की होगी जयकार रे….
जब बजी…..
देवेंद्र आर्य छयसा 

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