भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबी प्राथमिक शिक्षा ?

मृत्युंजय दीक्षित

वर्ष 2015-16 के नये शैक्षिक सत्र का आगाज हो गया है। प्रदेश  का शिक्षा विभाग हर वर्ष लम्बे-चौड़े  वायदों व नारों के साथ षैक्षणिक कार्यो का प्रारम्भ करवाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों व नये प्रवेष लेने वाले बच्चों के लिये तमाम तरह की योजनाओं की घोषणा की जाती है व सरकार हर वर्ष अरबों रूपये की योजनायें पेष करती है । लेकिन आज भ्रष्टाचार रूपी भयानक दीमक ने षिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चैपट कर दिया है। आज आजादी के 65 वर्ष से भी अधिक का समय बीत चुका है लेकिन गांवों में न तो प्राथमिक स्कूलों की अच्छी इमारतें हैं और नही विद्यालयों में आवष्यकता के अनुरूप मूलभूत सुविधायें। विद्यालयो के पठन पाठन का स्तर भी लगातार गिरता ही जा रहा है।  सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे कुपोषण व बीमारियों से मुक्त हों तथा उनकी पढ़ाई व जीवन स्तर को सुधारने में कोई अवरोध न उत्पन्न हो इसलिए मिड- डे – मील जैसी योजना भी चला रही है।लेकिन आज कोई भी योजना ऐसी नहीं बची है जो भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ न डूब गयी हो।

        आजादी के बाद प्रदेष में अधिकांश्त: कांग्रेस व जातिवाद पर आधारित सपा -बसपा का शासन ही रहा है। इन सभी दलों ने अपने हिसाब से प्रदेष की षिक्षा व्यवस्था को चलाया है। जिसका परिणाम है कि आज षिक्षक पूरी तरह से बेकार हो चुका है। प्रदेष का षिक्षक केवल आरामतलबी करता है। गांवों में तो षिक्षकों का तो बुरा हाल है। वैसे भी षिक्षक इस बात का बहाना बताते रहते हैं कि उन्हें चुनाव डयूटी,जनगणना सहित अन्य सराकारी कामों में लगा दिया जाता है जिसके कारण पठन- पाठन का काम सम्भव नहीं हो पाता। लेकिन षिक्षक तंत्र इसके इतर भी कई काम करता है। षैक्षिक संगठनों के नेतृत्व में वह अपनी तथाकथित मांगों के समर्थन में जिंदाबाद- मुर्दाबाद  के नारे लगाता है। जिसके कारण भी पठन- पाठन काफी प्रभावित होता है।

      आज प्रदेष की बेसिक षिक्षा के हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यदि ऊपर से ईष्वर भी उतर आये तो भी ठीक नही हो सकेगी। वर्ष 2015- 16 में सरकार ने षैक्षिक सत्र को दो माह पहले ही शुरू करने की घोषणा की है तथा कई केंद्रों में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई करवाने का ऐलान किया है ताकि सरकारी स्कूल भी प्राइवेट स्कूलों की लोकप्रियता का सामना कर सकें। लेकिन जब एक अप्रैल को जब बच्चे अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहॅुचे तो उन्हें एक बार फिर  घोर निराषा का ही सामना करना पड़ गया। सभी समस्यायें जस की तस थीं।

      बच्चों  को स्कूली हालत खस्ताहाल दिखी। राजधानी लखनऊ व उसके आसपास के स्कूलों का बुरा हाल हो रहा है  तब पूरे प्रदेश के क्या हालात होंगे आसानी से समझे जा सकते हैं। पहले ही दिन स्कूलों में स्वच्छता अभियान धराषायी नजर आया और अधिकांष स्कूल गंदगी से पटे  मिले। मूलभूत सुविधाओं का बुराहाल है। षौचालयों में  दरवाजे तक नहीं हैं और तो और लाख अभियानों के बावजूद अभी भी कई स्कूलों में बच्चियों के  लिए अलग षौचालय तक नहीं बन पा रहे हैं। यदि बन भी रहे तो भ्रष्टाचार के दलदल में उनका निर्माण बेहद घटिया तरीके से हो रहा है। लाख निगरानियों के बाद भी स्कूलों के निर्माण कार्यो  में दलाली और कमीषनखोरी जारी हैं। स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध रहने के बावजूद आज की तारीख में ब्लैकबोेर्ड , चाॅक बच्चों को दी जाने वाली स्लेट व कापी- किताबों   की समस्या बनी रहती है। जब से स्कूलों में ही बच्चंो को प्राथमिक आवष्यकता की चाीजें दी जाने लगी हैं। तब से हरवर्ष कोई न कोई समस्या बनी रहती है।कभी बच्चों की किताबों की कमी रहेगी तो कभी किसी और चीज की।यह सब कुछ गम्भीर वित्तीय अनियमितताओं व अधिकारियों की लापरवाही व सुस्ती का भी परिणाम होता है।

        पहले  ही दिन जब स्कूल खुले तो पता चला कि स्कूलों में कमरों से दरवाजें और खिड़कियां, कहीं – कहीं तो पंखें और बल्ब भी नदारद दिखें। अधिकतर स्कूलों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। हालांकि प्रथम पखवारें में स्कूलों में अभिभावकों से संपर्क और रैलियों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह वर्ष तक के बच्चों के पंजीकरण के लिए नाम लिये गये हैं।अभिभावकों से षिक्षकों द्वारा संपर्क करके  बच्चों को स्कूल भेजे जाने के लिए प्रेरित किया गया तथा जनजागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को प्राथमिक स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित किया गया।

       राजधानी लखनऊ के पास काकोरी क्षेत्र का अमेठिया सलेमपुर पूर्व माध्यमकि विद्यालय का तो बहुत ही बुरा हाल निकला।यहां की प्रधानाध्यापिका षमा बेगम ने बताया कि विद्यालय में 145 बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन विद्यालय में लगे दो पंखे दो माह पूर्व ही चोरी हो गये थे। रसोई घर के सभी बर्तन व इनवर्टर भी चोरी हो चुका है। यह यहां के लोगों की विकृत मानसिकता है।  षिकायत के बावजूद नया समान नहीं मिला है। यही हाल दुर्गागंज स्थित प्राथमिक विद्यालय , बड़ागांव प्राथमिक विद्यालय का है। इन विद्यालयों में न चहारदीवारी है और नही गेट। हाईकोर्ट के आदेष के तहत षिक्षकों ने जनगणना, बालगणना के अलावा कोई अन्य कार्य न कराया जाये लेकिन षिक्षा विभाग ने अध्यापकों से एक एनजीओ के लिए सर्वे करा रहा है। इस कार्य के लिए अधिसंख्य षिक्षक लगे हैं।

        इतना ही नहीं प्राथमिक विद्यालय आलमनगर,हैदरगंज, खरियाही,  मर्दन खेड़ा,पारा,नरपतखेड़ा,हंसखेड़ा ,भपटामऊ, मदेयगंज पक्काबाग के विद्यालयों की कुछ तस्वीर भी ऐसी ही है। विद्यालयों में काफी गंदगी व अव्यवस्था है। कहीं – कहीं तो विद्यालयों में जानवर चरते हुए दिखाई दिये। सुअर व कुत्ते आदि जानवर स्कूलों में अपनी पढ़ाई करते  नजर आये। विद्यालयों की चहारदीवारी टूटी है, शौचालयों का बुरा हाल हो रहा है, इमारतो का प्लास्टर तक  झड़ रहा है। मिड- डे- मील योजना का तो पुरसाहाल हो रहा है। जब राजधानी लखनऊ व उसके आसपास स्थित  सरकारी स्कूलों का यह हाल हो रहा है तो पूरे प्रदेष में भयंकर तबाही का आलम हो रहा होगा। सारा का सारा सरकारी धन लूटा जा रहा है। भ्रष्टाचार के दलदल में नौनिहालों के सपने बनते ही बिखर रहे हैं। यही कारण है कि आज इन विद्यालयों के शिक्षकों व बच्चों का समान्य ज्ञान पूरी तरह से जीरांे है। अभी यदि किसी भी षिक्षक का अचानक समान्य ज्ञान चेक किया जाये तो वह फेल हो जायेगा और यह तो कई बार हो चुका है। स्वयं मुंख्यमंत्री के समाने शिक्षक फेल हो चुके हैं। ऐसे में षिक्षकों से क्या आषा की जाये कि वह प्रदेष के बच्चों का भविष्य सुधारेंगे। केवल  लोहियावाद या समाजवाद का पाठ पढ़ाकर शिक्षा व्यवस्था को नहीं सुधारा जा सकता है। इसके लिए हमें भ्रष्टाचर, लालफीताशाही व आलस्य से भरपूर  अफसरशाही व षिक्षकों को स्वयं में सुधार करना होगा। तभी हमारी षिक्षा व्यवस्था स्तरीय हो सकेगी केवल अंग्रेजी स्कूलों की नकल करने मात्र से ही  बेसिक षिक्षा में सुधार नहीं होगा।बेसिक षिक्षकों व अभिभावकों को भी अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। नहीं तो प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य अंधकरामय ही रहेगा। यही भविष्य आगे चलकर नकल करता है व नकल माफियाओं के चक्कर में पढ़ता है।

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
Vdcasino giriş
vdcasino giriş
ngsbahis
ngsbahis
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
kolaybet giriş
kolaybet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
casibom giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
betnano giriş
damabet
casinofast
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vdcasino
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
venusbet giriş
venüsbet giriş
venusbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
damabet
betnano giriş
betnano giriş
bahiscasino giriş
betnano giriş
bahiscasino giriş