देश का भूत, वर्तमान और भविष्य –3

देश   के   जननायक   नहीं   धन  के  नायक  लोग ।
धर्म   से  ‘निरपेक्ष ‘   हैं,  जो महामारी    का   रोग।।35।।

देशहित   नहीं   बोलते,    करें    स्वार्थ    की   बात।
गिद्ध     देश    में   पल    रहे, नोंच    रहे   दिन  रात।।36।।

राष्ट्रीयता    की    बात   कर, राष्ट्रधर्म    से  है   दूर ।
सबके    हित   कुछ   ना   करें ,स्वार्थ   में  गये  डूब॥37॥

देश   को    आंख   दिखा   रहे ,अदने – अदनेे    देश ।
छल     छ्दमी    बैठे   यहाँ ,बना ‘जयचंदी’ वेश ॥38॥

मजहबपरस्ती     सिर   चढ़ी ,   वतनपरस्ती    दूर ।
भाषा   धर्म   पर   लड़   रहे ,ढूंढ    रहे   कोहिनूर ? ॥39॥

शिक्षा   से   संस्कार    को, कर   दिया   है    दूर ।
चित्र     चरित्र    जिसका    नहीं ,  बाँट  रहे  हैं  नूर॥40॥

नचकैंया      हीरो   बने ,  ’नायक’    दिये   भुलाय।
आदर्श    भौंडे   लोग   हैं , तनिक   लजावें   नाय॥41॥

युवा   पीढ़ी    सो   रही  ,लेती   कुछ    नहीं   सीख।
मात-पिता   चुप  कर   दिये, कहते – क्यों  रहे  चीख ?॥42॥

सिसक     रहा    बूढ़ा   पिता, रोती  मां  की  कोख ।
आंसू   सागर   बन   गये,   कौन   सकेगा   सोख॥43॥

बहन    सिसकती   रह    गयी, राखी   का    त्यौहार।
भाई   कुछ   बोला   नहीं,   किया    नहीं   सत्कार॥44॥

उल्टी    रीति    चला दई ,   भूल   गये  निज   चाल।
ऋषियों     के   इस  देश   में ,घूम   रहे   चाण्डाल ॥45॥

बादे    मुद्दत   देश    में ,’नायक’    जन्मा     एक ।
“जयचन्द’     भी   छल   में  लगे ,देख   रहा  है  देश ॥46॥

मोदी     जी   संघर्ष    करो, है   देश    तुम्हारे   साथ ।
बहुत    कुछ  करना   शेष  है ,चैन  नहीं    दिन-रात॥47॥

युवा     पीढ़ी    ध्यान     से ,करे    एक     संकल्प ।
विश्व    गुरु   भारत   बने ,विकल्प   नहीं   संकल्प॥48॥

जिस  देश  का युवा जागता,उसका उज्ज्वल भाग्य ।
आलिंगन     नियति   करें ,  खड़ी    पसारे   हाथ ॥49॥

देश    –   धर्म    के    कारने   धारे   रहो    शरीर।
देशहित    मांगो   सदा    परमेश्वर   से    भीख।।।50।।

भारत   को   ‘भा’ ‘रत’    बना,  करना   है अभिषेक ।
‘स्वच्छता   अभियान’   को ,  अपना    ले   ‘राकेश’॥51॥

यह कविता मेरी अपनी पुस्तक ‘मेरी इक्यावन कविताएं’-  से ली गई है जो कि अभी हाल ही में साहित्यागार जयपुर से प्रकाशित हुई है। इसका मूल्य ₹250 है)

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

 

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

मुख्य संपादक, उगता भारत

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