पी.एम. मोदी के नाम खुला पत्र

nam03360_1महर्षि दयानंद की ये उपेक्षा क्यों

श्रद्घेय प्रधानमंत्री जी,
राष्ट्र की  चेतना को झंकृत कर चेतना में से निकलकर चेतना में ही समाहित हो जाने वाले, स्वाधीनता दिवस की पावन बेला पर लालकिले की प्राचीर से दिये गये अपने अनुपम और अद्वितीय संबोधन के लिए बधाई स्वीकारें। सारा देश आपके साहस और वक्तृत्व शैली की मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहा है।

मैं नही चाहता कि आपके इस संबोधन में कोई दोष खोजा जाए, पर अपने लेखनी-धर्म के साथ न्याय करना भी आवश्यक समझता हूं, इसलिए जो मन में है उसे बता देना समयोचित समझता हूं कि आपके संबोधन में महर्षि दयानंद जैसे समग्र-क्रांति के अग्रदूत भारत-गौरव और राष्ट्रचेता महापुरूष का नाम न सुनकर निराशा हुई। सचमुच महर्षि दयानंद भारतीय राष्ट्र की वह थाती हैं, जिनके सामने अन्य कोई टिकता हुआ नही दीखता। बहुत से लोग इस गुजरात भूमि से उठकर राष्ट्र और विश्व पटल पर उभरे हैं, निस्संदेह उनमें ऋषि दयानंद, सरदार पटेल और गांधी जैसे कई लोग सम्मिलित हैं, और अब देश आपमें भी महानता के नये-नये आयाम खोज रहा है, इस संदर्भ में गुजरात की पावनभूमि नमनीय  और अभिनंदनीय है। देश में अनेकों महापुरूष हुए हैं जिनमें से किसी ने स्वदेश का, किसी ने स्वधर्म का, किसी ने स्वभाषा का, किसी ने स्वसंस्कृति का और किसी ने स्वराज्य का मूलमंत्र फंूककर अपनी महानता की ध्वजा फहराई है, परंतु कोई एक ऐसा शक्तिपुंज जिसमेें ये सारे ‘स्व’ एक साथ केन्द्रीभूत हों, यदि कहीं है तो वह ऋषि दयानंद हैं। हमें अनावश्यक किसी की निंदा से बचना चाहिए, परंतु कई लोग हैं जो थोड़ा करके बहुत ‘यश’ कमा गये तो कुछ हैं जो ‘बहुत कुछ’ नही अपितु ‘सब कुछ’ करके भी यश के पात्र नही बने। ऐसे ‘सब कुछ’ करने वाले ‘उग्रसेनों’ के लिए सारा देश एक कारागृह बनाकर रख दिया गया है। आपने अपने हाथों में सत्ता की कमान संभालते ही बहुत से ‘उग्रसेनों’ को कारा से मुक्त भी कराया है, परंतु लालकिले की प्राचीर से आपके संबोधन में ऋषि दयानंद का नाम न सुनकर लगा कि अभी आप उन्हें ‘क्रूर-कंस’ की ‘क्रूर-कारा’ में और देर तक बंदी बने रहने देना चाहते हैं।

महर्षि दयानंद जी महाराज किस प्रकार सारे महापुरूषों के उच्च्तम गुणों के एकीभूत पुंज हैं, इसके लिए स्वामी सत्यानंद जी ने उनके विषय में सच ही कहा था कि वह गुण ही न होगा जो महर्षि के सर्वसंपन्न रूप में विकसित ही न हुआ हो। महाराज का हिमालय की चोटियों पर चक्कर लगाना विन्ध्याचल की यात्रा करना, नर्मदा के तट पर घूमना, स्थान-स्थान पर साधुसंतों के दर्शन तथा सत्संग प्राप्त करना मंगलमय श्रीराम का स्मरण कराता है। कर्णवास में कर्णसिंह के बिजली के समान चमकते खडग को देखकर भी महाराज नही कांपे, तलवार की अति तीक्ष्ण धार को अपनी ओर झुका हुआ अवलोकन करके भी निर्भय बने रहे और साथ ही गंभीर भाव से कहने लगे कि आत्मा अमर है, अविनाशी है, इसे कोई हनन नही कर सकता। यह घटना और ऐसी ही अनेकों घटनाएं ज्ञान के सागर श्रीकृष्ण को नेत्रों के आगे मूर्तिमान बना देती हैं। ….अपनी प्यारी भगिनी और पूज्य चाचा की मृत्यु से वैराग्यवान होकर वन में कौपीन मात्रावशेष दिगम्बरी दिशा में फिरना, घोरतम तपस्या करना तथा अंत में मृत्युंजय महौषध को ब्रह्मसमाधि में लाभ कर लेना महर्षि के जीवन का अंश बुद्घदेव के समान दिखाई देता है।

दीन दुखियों अपाहिजों और अनाथों को देखकर महर्षि दयानंद जी क्राइस्ट बन जाते हैं। धुरंधर वादियों के सम्मुख श्रीशंकराचार्य का रूप दिखाई देते हैं। एक ईश्वर का प्रचार करते और विस्तृत भ्रातृभाव की शिक्षा  देते हुए भगवान दयानंद जी श्रीमान मुहम्मद जी प्रतीत होने लगते हैं। ईश्वर का यशोगान करते हुए स्तुति-प्रार्थना में जब प्रभु इतने निमग्न हो जाते हैं कि उनकी आंखों से परमात्म प्रेम की अविरल धारा निकल आती है, गदगद कण्ठ और पुलकित गात हो जाते हैं, तो सन्तवर रामदास, कबीर, नानक दादू चेतन और तुकाराम का समां बंध जाता है। वे संत शिरोमणि जान पड़ते हैं। आर्यत्व की रक्षा के समय वे प्रात: स्मरणीय प्रताप और शिवाजी तथा गुरूगोविन्द सिंह का रूप धारण कर लेते हैं। महाराज के जीवन को जिस पक्ष से देखें वह सर्वांग सुंदर प्रतीत होता है। त्याग और वैराग्य की उसमें न्यूनता नही है। श्रद्घा और भक्ति उसमें अपार पायी जाती है। उसमें ज्ञान अगाध है। तर्क अथाह है। वह समायोचित मति का मंदिर है। प्रेम और उपकार का पुंज है। कृपा और सहानुभूति उसमें कूट कूटकर भरी है। वह ओज है, तेज है, परमप्रताप है, लोकहित है, और सकल कला संपूर्ण है।

माननीय प्रधानमंत्री जी! आप जैसे संस्कृति और धर्म भक्त प्रधानमंत्री से यह अपेक्षा नही थी कि आप जब इतिहास के नररत्नों के मंदिर में पुष्पांजलि अर्पित कर वहां से प्रसाद ग्रहण कर रहे हों, तो उस समय आप्तपुरूष महर्षि दयानंद जैसे महान व्यक्तित्व से आशीर्वाद लेना ही भूल जाएं। आशा है आगे से आप भारत की समग्र क्रांति के अग्रदूत महर्षि दयानंद का पावन स्मरण कर देश की आर्य जनता (हिंदू राष्ट्रीयता के संदर्भ में ग्रहण करें तो प्रत्येक भारतीय को) उपकृत करेंगे।

आपके भाषण में सबसे प्रमुख बात थी कि आपने स्वयं को भारत का प्रधानमंत्री नही अपितु प्रधान सेवक माना। लग रहा था यह आपके हृदय से निकले शब्द थे। हम आशा करते हैं कि आपके भावों की ये उज्ज्वलता बनी रहेगी और आप देश के प्रधानसेवक बनकर ही देशसेवा के अपने महान दायित्व का निर्वाह करेंगे। इस संदर्भ में आपसे अनुरोध है कि आप अपने प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री निवास के बाहर की पट्टिका पर भी यही शब्द अर्थात ‘भारत का प्रधानसेवक-नरेन्द्र मोदी’ लिखवाकर आचार्य चाणक्य की परंपरा का पालन करें। देश आपके त्याग से अभिभूत है, आपके इस उच्चादर्श को देखकर तो सदियों के लिए नही, अपितु युग युगांत के लिए लोग अभिभूत हो जाएंगे। क्योंकि पद को पाकर तो ‘मद’ आता है, पर आप जिस विनम्रता का परिचय दे रहे हैं, वह आपके भावों की उत्कृष्टता को स्पष्टकरती है। आपको मां भारती ने अपना रत्न मान लिया है-तभी तो उसने कई अपेक्षाओं के साथ आपको इस राष्ट्र की नाव का मांझी बनाया है, हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
savoybetting giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
restbet giriş
safirbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş