जब देश के सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में आर्य समाज अपना बिगुल फूंककर भारत की बलिदानी परंपरा की धार को पैना कर रहा था, उसी समय भारत में एक और घटना भी आकार ले रही थी जो भविष्य की कई संभावनाओं को जन्म देने की सामथ्र्य रखती थी। ब्रिटिश काल में हिंदू समाज को अपने लिए एक ऐसी संस्था की आवश्यकता की अनुभूति हो रही थी, जो उनकी आवाज बन सके। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में ‘हिंदूसभा’ के रूप में एक संगठन सामने आता जा रहा था।

बंगाल में हिंदुओं की जनसंख्या बड़ी तेजी से घट रही थी, साठ वर्ष में हिंदू 55 प्रतिशत से घटकर अब तीस प्रतिशत ही रह गया था। मुसलमान हिंदुओं की निचली जातियों की महिलाओं का शीलभंग कर डालते थे, इसी प्रकार के अत्याचारों के विरूद्घ बंगाल का हिंदू खड़ा होना चाहता था। तभी ‘आनंदमठ’ के ‘वंदेमातरम्’ ने लोगों को देशभक्ति का अनोखा पाठ पढ़ाना आरंभ कर दिया। इस पुस्तक के लेखक चटर्जी ने लिखा था-‘‘हमारा धर्म गया, जाति गयी, मान गया और अब तो जान भी जाने की स्थिति है। नशाखोरों (मुस्लिम शासकों) को हटाये बिना हिंदुत्व की खैर नही।’’

‘आनंदमठ’ ने हिंदू समाज को भीतर तक प्रभावित किया, इस पुस्तक के अध्ययनोपरांत कई प्रमुख व्यक्ति हिंदू समाज का नेतृत्व करने के लिए सामने आए। क्रांतिकारी विचारों के लोग आपस में भी परस्पर मिलते तो ‘वंदेमातरम्’ का अभिवादन करते थे। इन लोगों का चिंतन और कार्यशैली शुद्घ राष्ट्रवादी थी, इसमें किसी प्रकार का दोगलापन रंच मात्र भी नही था। इसलिए ‘वंदेमातरम्’ बोलने वालों से किसी प्रकार की ब्रिटिश राजभक्ति की अपेक्षा भी नही की जा सकती थी। क्रांतिकारियों की इसी चिंतनशैली और कार्यशैली से भारतीय राष्ट्रवाद में 1857 की क्रांति के पश्चात भी उबाल आता जा रहा था, अंग्रेज उस राष्ट्रवाद के लक्षण यत्र-तत्र देख रहे थे। इसीलिए क्रांतिकारियों के इसी संभावित विस्फोट को रोकने के लिए ही ‘कांग्रेस’ की स्थापना की आवश्यकता अंग्रेजों को अनुभव हुई थी।

वास्तव में इसमें ‘ब्रिटिश राजभक्त’ और ‘भारतीय राष्ट्रभक्त’ इन दो के मध्य समाज के चिंतनशील लोगों का अपने-अपने खेमों में धु्रवीकरण हो रहा था, इसे कुछ सीमा तक संक्रमणकाल भी कहा जा सकता है, जिसमें ‘ब्रिटिश राजभक्त’  किसी अपने ढंग की संस्था की स्थापना की तैयारियां कर रहे थे, राष्ट्रभक्त अपने संगठन या संस्थाओं की स्थापना कर रहे थे। ‘वंदेमातरम्’ गीत के विषय में 10 सितंबर 1906 को ‘द टाइम्स’ ने लिखा था-‘‘यद्यपि इस गीत को केवल मात्रभूमि की प्रशंसा माना जा रहा है, परंतु ऐसा नही है। यही नारा लगाकर बंगाल के संन्यासियों ने ब्रिटिश शासन के विरूद्घ विद्रोह किया है, इस नारे को संन्यासी लोग युद्घघोष के रूप में प्रयोग करते थे।’’

स्पष्ट है कि ‘वंदेमातरम्’ भारतीय जनमानस को भीतर तक प्रभावित कर गया था और उनके रोम-रोम में क्रांति गूंज रही थी। अंग्रेजी शासन उन पर कड़ी दृष्टि रखता था, परंतु उसके उपरांत भी कहीं न कहीं से क्रांतिकारियों को हवा-पानी मिल जाता था और विद्रोह की चिंगारी कहीं न कहीं भडक़ उठती थी। इसीलिए एक अंग्रेज आई.सी.पी. अधिकारी जॉन एंडरसन ने ‘वंदेमातरम्’ के विषय में कहा था-‘इस गीत को केवल वही गाएंगे जो भारत में हिंदू राज देखना चाहते हैं।’

‘हिन्दू राज्य’ का अभिप्राय किसी प्रकार के साम्प्रदायिक राज्य से नही था, यह वैसा ही होना था जैसा शिवाजी महाराज का राज्य था, अर्थात पंथनिरपेक्ष राज्य। परंतु मुसलमानों को हिंदुओं से दूर करने के लिए ‘वंदेमातरम्’ को साम्प्रदायिक गीत बनाने का प्रयास अंग्रेजों की ओर से किया गया, परिणामस्वरूप मुसलमानों के भीतर भ्रम फै लाने के लिए कुछ ऐसे तत्वों ने अपनी सक्रियता दिखानी आरंभ की, जो इस गीत की व्याख्या एक साम्प्रदायिक गीत के रूप में करने लगे। इन लोगों ने इस गीत को ‘हिंदू राज्य’ की संकल्पना को साकार रूप देने का प्रतीक माना और मुसलमानों के मध्य इसे इस प्रकार स्थापित करने लगे कि इसके गाने से हमारी साम्प्रदायिक पहचान को संकट उत्पन्न हो जाएगा।

कांग्रेस इस खेल को देख रही थी, उससे यह अपेक्षा नही की जा सकती थी कि वह अपनी ‘राजभक्ति’ को छोडक़र राष्ट्रभक्तों के साथ आ जाएगी। इसलिए वह भी इस गीत से दूरी बनाकर चलने में ही अपना भला समझने लगी। यहीं से कांग्रेस के तुष्टिकरण का प्रारंभ हो गया था। बहुत संभव है कि ‘वंदेमातरम्’ की कथित साम्प्रदायिकता से मुक्ति पाने के लिए ही कांग्रेस ने आगे चलकर अपने ‘अधिपति’ और ‘अधिनायकों’ को प्रसन्न करने के लिए जन-गण-मन जैसे गीत को अपने लिए अपनाया हो।           क्रमश:

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
restbet giriş
restbet giriş
galabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş