पुस्तक समीक्षा : सपनाज ड्रीम्स इन डेजर्ट- ‘एक पाती’


सपनाज ड्रीम्स इन डेजर्ट- ‘एक पाती’ – नामक यह पुस्तक नीलम ‘सपना’ शर्मा द्वारा लिखी गई उनकी चौथी पुस्तक है । पुस्तक के कवर पेज से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि यह एक यात्रा वृतांत है, जिसे पाठकों के लिए बड़ी योग्यता से लेखिका ने प्रस्तुति देने में सफलता प्राप्त की है।
वास्तव में लेखिका की बेटी ‘सपना’ उनकी इकलौती संतान थी, जिसका 22 वर्ष की अल्पायु में देहांत हो गया। लेखिका पिछले लगभग डेढ़ दशक से अपनी पुत्री सपना की इच्छा ‘एक सपनों का गांव बसाने’ हेतु संघर्षरत हैं। जिसमें उनके पतिदेव भी उनका भरपूर साथ दे रहे हैं। इस पुस्तक में लेखिका ने अपनी जैसलमेर यात्रा का वर्णन किया है। जिसे उन्होंने इतनी योग्यता से कागजों पर हमारे समक्ष उतारने का प्रयास किया है कि कोई भी पाठक यदि इस पुस्तक को पढ़ना आरंभ कर दे तो वह अपने आप को लेखिका के साथ ही अनुभव करेगा। वास्तव में किसी भी लेखक या लेखिका की योग्यता इसी बात में छिपी होती है कि वह अपने पाठक को अपने प्रतिपाद्य विषय के साथ समन्वित कर ले। जिसमें लेखिका श्रीमती नीलम ‘सपना’ शर्मा ने सफलता प्राप्त की है।
इस पुस्तक में लेखिका का अपनी बेटी सपना के प्रति मां का प्यार भी स्थान स्थान पर झलकता हुआ दिखाई देता है । जिससे पता चलता है कि वह अपनी इकलौती संतान को लेकर किस प्रकार अवसादपूर्ण जीवन जीती रही हैं? बेटी की यादें कहीं भी उनका पीछा छोड़ती हुई दिखाई नहीं दे रही हैं। मां के लिए अपनी इकलौती संतान की यादें भुलाना बड़ा कठिन होता है । बार-बार अपने बेटी सपना की यादों के बादल उमड़ घुमड़कर लेखिका के मानस में आ ही बरसते हैं, परंतु यह एक आश्चर्यजनक सत्य है कि वह इन बादलों से निकलने वाली बूंदों को अमृतमयी बना देती है और इन अमृतमयी बूंदों के स्वर्ण जड़ित शब्दों से जब पृष्ठों पर लेख या कविता उतरकर हमारे सामने आती है तोहर पाठक गदगद हो जाता है क्योंकि लेखिका की लेखनी का कमाल ही ऐसा है जो पाठक के मुंह से अनायास ही ‘वाह- वाह’ निकलवा देता है। उनकी लेखनी का कमाल देखिए :-
आंखें नम हैं,
गमजदा हम हैं,
याद में तुम्हारी ,
लब मुस्कुराते हैं ।
चाह कर भी हम
रो नहीं पाते हैं।
वी हंसता तुम्हारा चेहरा,
सामने जब पाते हैं ।
वह सलोनी सी सूरत,
मन मोहिनी मूरत ।
जिगर को जलाती है,
तेरी याद दिलाती है,
काश सपना होता पूरा ,
गर रास्ता तुम ना छोड़ते अधूरा।।
यह पुस्तक अच्छे कागज में कुल 108 पेजों में तैयार हुई है। पुस्तक का मूल्य ₹200 है। पुस्तक ‘ग्रंथ विकास’ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक की प्राप्ति के लिए सी-37, बर्फखाना, राजा पार्क, जयपुर , फोन नंबर 0141 – 2322382, व 2310785 पर संपर्क किया जा सकता है।
डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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