जिहादियों के पोषक तत्व भी जिहादी

✳️बारंबार जब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि शीघ्र ही भारत में “गजवा-ए-हिन्द” होगा और भारत का इस्लामीकरण करके उसे “दारुल इस्लाम” बना दिया जाएगा फिर भी चांदी के टुकडों के लिए लार टपकाने वाले व सत्ता के भूखे स्वार्थी तत्वों की विभिन्न टोलियां भारत विरोधियों को पुष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

✳️ध्यान रहे कट्टरपंथियों की जमातें आधुनिक युग में संचार तकनीक के द्वारा ऑनलाइन मंचों के माध्यम से अपनी जिहादी शिक्षाओं और विचारों का व्यापक दुष्प्रचार कर रही है। इसी माध्यम से सर्वसम्पन्न उच्च शिक्षित कट्टरपंथी भी अपने मुस्लिम समाज के निर्धन व उपेक्षित लोगों को जिहाद के लिए निरंतर उकसाते रहते हैं।

✳️ यह भी चिंता का विषय है कि मुस्लिम कट्टरपंथियों व आतंकवादियों को जब तक स्थानीय सहयोग मिलता रहेगा उनको नियंत्रित नहीं किया जा सकता।हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि ये कटटरपंथी तत्व इसलिए भी अधिक सक्रिय रहते हैं क्योंकि इनके पालन-पोषण करने वाले हमारे समाज में भी विद्यमान हैं। ऐसे में दशकों से जिहादियों को निरंतर पोषित करने वाले क्या देश द्रोह की श्रेणी में नहीं आने चाहिये?

✳️ अतः यदि देश को इस्लामीकरण से सुरक्षित रखना है तो मुस्लिम कट्टरपंथियों की हर गतिविधियों की चौकसी करके उसका यथासंभव प्रबल प्रतिकार करना प्रत्येक भारत भक्त का मुख्य दायित्व है। शासन-प्रशासन को भी इन जिहादी वैचारिक दुष्प्रचार के आग्रही वर्गों व उनसे सहानुभूति रखने वालों की पहचान करके उनकी गतिविधियों को समझ कर उसी अनुसार आवश्यक कार्यवाही करनी होगी।

✍️विनोद कुमार सर्वोदय

राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक

गाज़ियाबाद

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