हृदय का ओ३म् और सूर्य उपासना के साथ आध्यात्मिक समन्वय

‘उगता भारत’ के वैचारिक पिता महाशय राजेन्द्र सिंह आर्य एवं पूज्यनीया माताजी श्रीमती सत्यवती आर्या की जयंती पर विशेषtwo

ओ३म् का जाप हृदय से करना चाहिए। मानव शरीर में हृदय इस प्रकार है जिस प्रकार इस दुनिया में सूर्य है। दोनों से नीली, पीली, हरी, लाल किरणें निकलती हैं। दोनों का आपस में संबंध है। दुनिया में सूर्य न रहे तो दुनिया मर जाती है। मनुष्य का हृदय धड़कना बंद हो जाए तो इंसान समाप्त हो जाता है। दोनों से निकलने वाली सूक्ष्म किरणें एक दूसरी से मिलती हैं। किरणों की एक सड़क तैयार हो जाती है। सूर्य का ध्यान करके ओ३म् का जाप करने वाला जब शरीर के सूर्य इस हृदय में ओ३म् कहता है, तो इस सड़क से होकर वह आगे बढ़ता है-क्षणभर में, क्षण के करोड़वें हिस्से में सूर्य के अंदर पहुंच जाता है। मरते समय जब वह इस प्रकार से ओ३म् कहता है तो सूर्य की रोशनी इसे गोद में ले लेती है। सूर्य लोक इसका हो जाता है।

हमारी तो सारी संस्कृति ही सूर्य से ओतप्रोत है। प्राचीनकाल में हम अपना ध्वज बनाते थे तो लाल रंग का इसमें सूर्य बनाते थे। सूर्य में ओ३म् लिख देते थे। गुरू के पास जब शिष्य पहुंचता तो सबसे पहले गुरू शिष्य से कहता-

माणवक ! सूर्यस्यावृतमनुवर्तस्व।

सा. व्रा. 1/6/16

अर्थात तेरी शिक्षा और जीवन का आदर्श सूर्य है। और शिष्य यजुर्वेद के दूसरे अध्याय के 26वें मंत्र का यह प्रतीक पढ़ता-

सूर्यस्यावृतमन्वावर्ते।

मैं सूर्य का अनुकरण करूंगा। स्वस्तिवाचन में यह मंत्र पढ़ा जाता है-स्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्र मसाविव।

सूर्य और चांद की भांति मैं कल्याण के मार्ग पर चलूंगा। परंतु सूर्य में ऐसा कौन सा गुण है जिसके कारण इतना महत्व इसको दिया गया है? सूर्य का एक अर्थ प्राण भी है, और प्राण का एक अर्थ सूर्य भी। सूर्य इस दुनिया को प्राण देता है, इसमें रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ज्योति देता है। यह इसका पहला गुण है। परंतु वह रोशनी देता है तो किसी से उधार लेकर नहीं, अपितु इसलिए कि उसके अपने अंदर प्रकाश है। वह स्वयं ही रोशन है, इसलिए आर्यों ने इसे अपना निशान बनाया। वे स्वयं प्रकाशमान थे। दूसरों को प्रकाश देना चाहते थे। जो स्वयं नही जलते, वे दूसरों के दुख को जला नही सकते। जो स्वयं प्रकाशित नही है वे दूसरों को प्रकाशित नही कर सकते। सूर्य का दूसरा गुण यह है कि वह गर्मी देता है। पानी में लोहे में, मिट्टी में, पत्थर में, आपके कपड़ों में, आपके शरीर में, हर जगह आग है। शरीर की अग्नि ठंडी हो जाए तो लोग कहते हैं ले चलो इसे मरघट में पहुंचा दो, यह ठण्डा हो गया है। पेट की आग बुझ जाए तो वैद्य कहता है अब इसका स्वास्थ्य ठीक नही होगा। हर स्थान पर अग्नि आवश्यक है। अग्नि जीवन है। हवन कुण्ड में हम आहूति देते हैं तो उस समय, जब अग्नि प्रज्वलित हो जाए। पुकारकर हम कहते हैं-

उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते संसृजेथामयं च।

अस्मिन्त्सधस्थेअध्युत्तरस्मिन विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।।

उठो जागे है अग्निदेव! जागो, हमारी  इच्छाओं को पूरा करने के लिए, वह दशा उत्पन्न करने के लिए जिसमें विश्वभर के देवता हमारी भेंट को स्वीकार कर लें, हमारी भेंट को पाकर प्रसन्न हो जाएं।

यह अग्नि बहुत आवश्यक है। इसके बिना कोई कार्य न ही होता। पेट के अंदर डाला हुआ भोजन भी उस समय पचता है जब आग जल रही हो। पेट की अग्नि के संबंध में एक बात मैं आपको बताता हूं। बार-बार मैं कहता हूं कि भोजन तब खाओ जब पेटी की अग्नि जल रही हो। कई भाई पूछते हैं कि पेट की आग को देखें किस प्रकार? कोई खिड़की तो लगी नही कि इसको खोलकर देख लें और जान लें अंदर जलती है कि नहीं। परंतु देखो, इस अग्नि को देखना कठिन नहीं, बहुत सरल है। नाक में दो छिद्र हैं न? दायें छिद्र से श्वास चलता हो तो समझ लो आग जलती है, बायें से चलता हो तो समझो कि अग्नि नही जल रही है। खाना उस समय खाओ जब दायें छिद्र से श्वास चलता हो, नही तो नही खाओ, वह भोजन पचेगा नहीं, विष बन जाएगा।

सूर्य का तीसरा अंश है-पवित्रता। इसकी किरणें कीचड़ के अंदर भी पहुंचती हैं, कूड़े और करकट के ढेरों के अंदर भी, सभी जगह पहुंचती हैं, सबको शुद्घ करती है परंतु स्वयं कभी अपवित्र नही होती। ओ३म् के उपासक को भी अपने अंदर यह गुण लाने का प्रयत्न करना चाहिए। आप कहेंगे कि यह तो बहुत कठिन है। मैं मानता हूं कि कठिन है, परंतु कठिन बात को करने में ही तो वीरता है।

साधारणतया जब हम बुराई और गंदगी के निकट जाते हैं, तो इससे हम पर बुरा प्रभाव ही पड़ता है। जब हम गंदे गीत सुनते हैं, गंदे नाच देखते हैं, गंदे दृश्य देखते हैं, तो इसका प्रभाव मन पर अवश्य होता है। हमें प्रयत्न करना चाहिए कि बुराई का प्रभाव हम पर न हो। सूर्य का चौथा गुण है कि वह अपने नियम में कभी ढील नही होने देता, लापरवाही नही आने देता, वह कभी छुट्टी नही मांगता। दो अरब वर्ष हो गये इस पृथिवी को बने हुए, क्या कभी सूर्य ने छुट्टी मांगी है? क्या कभी इसे मलेरिया हुआ है? जुकाम हुआ है? थकावट हुई है?

सूर्य का पांचवा गुण है कि वह हानिकारक कृमियों को मार देता है, समाप्त कर देता है। अंधेरे में कृमि बढ़ते हैं, पैदा होते हैं, फेेलते हैं, भांति भांति बीमारियां उभारते हैं। सूर्य की रोशनी में आते ही मर जाते हैं। ओ३म् के उपासक को भी यह सब कुछ करना पड़ता है। ओ३म् की भक्ति करने वाले में एक महान शक्ति जाग उठती है।

उसका कर्त्तव्य है कि इस शक्ति को पाप अत्याचार के कृमियों को समाप्त करने के लिए प्रयोग करे। टेढ़ी चाल वाले बिच्छू को, विष से भरे रेंगने वाले सांप को देखकर कहे, मैं तुम्हें कुचल दूंगा। स्वयं निश्चय करे कि मैं स्वयं सांप नही बनूंगा, किसी दूसरे को बनने नही दूंगा, स्वयं पाप के मार्ग पर  नही जाऊंगा, दूसरे को जाने नही दूंगा। ये है सूर्य के गुण। ये गुण ओ३म् के उपासक में होने चाहिए। इसलिए गुरू ने कहा-हे माणवक! सूर्य को अपना आदर्श बना, इसलिए हमारे पूर्वजों ने सूर्य को अपना चिन्ह बनाया।

आप कहेंगे-इन सब बातों का ओ३म् की उपासना से क्या संबंध है।

सुनिए! ओ३म्-ऐसा हम कहते हैं। ऐसे हम जाप करते हैं। सांस अंदर जाए तो हृदय में ओ कहना चाहिए, जब सांस बाहर आये तो म कहना चाहिए और ठीक उस समय अनुभव करना चाहिए कि हृदय के अंदर सूर्य चमक उठा है, हम इसमें प्रविष्ट हो रहे हैं। परंतु यह सब कुछ होगा उस समय जब आप सूर्य के गुणों को समझते हों, उन्हें अपनाने का यत्न कर रहे हों। इन गुणों को धारण करने वाला जब ओ३म् कहता है, जब बार -बार संकल्प से उसकी धारण दृढ़ हो जाती है, तो ओ३म् कहने के साथ ही उसके अंदर सूर्य चमक उठता है। बार-बार ऐसा करते करते अंतिम श्वास के साथ जब वह ओ३म् कहता है तो उसका सूक्ष्म शरीर सीधा सूर्य लोक में पहुंचता है। परंतु अंतिम समय में अंतिम श्वास के साथ ऐसी बात करेगा कौन? जिसने जीवन भर अभ्यास नही किया, वह तो कर नही सकता। जीवन भर जो करते रहे हो, वही अंतिम समय में याद आएगा। इसलिए जैसे भी हो, चाहे तुम अमीर हो या निर्धन, सुखी हो या दुखी छोटे हो या बड़े, ओ३म् का जाप करो और विधि से करो, जो मैंने बताई है।

 

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
casinowon giriş
casinowon giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
casinofast