11 सितम्बर पुण्यतिथि पर विशेष : महादेव नारी चेतना का स्वर महादेवी वर्मा

images (80)

महान कवियत्री महादेवी वर्मा का जन्म ऐसे समय में हुआ, जब साहित्य सष्जन के क्षेत्र में पुरुष वर्ग का वर्चस्व था; पर महादेवी ने केवल साहित्य ही नहीं, तो सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में अपनी सषक्त उपस्थिति से समस्त नारी वर्ग का मस्तक गर्व से उन्नत किया। उन्होंने काव्य, समालोचना, संस्मरण, सम्पादन तथा निबन्ध लेखन के क्षेत्र में प्रचुर कार्य किया। इसके साथ ही वे एक अप्रतिम रेखा चित्रकार भी थीं।

महादेवी वर्मा का जन्म 1907 ई. में होली वाले दिन हुआ था। यदि कोई इस बारे में पूछता, तो वे कहती थीं कि मैं होली पर जन्मी, इसीलिए तो इतना हँसती हूँ। होली सबकी प्रसन्नता का पर्व है, उस दिन सबमें एक नवीन उत्साह रहता है, वैसी सब बातें मुझमें हैं। महादेवी जी की माता जी पूजा-पाठ के प्रति अत्यधिक आग्रही थीं, जबकि पिताजी अंग्रेजी प्रभाव के कारण इनमें विष्वास नहीं करते थे। फिर भी दोनों ने जीवन भर समन्वय बनाये रखा। इसका महादेवी के मन पर बहुत प्रभाव पड़ा।

महादेवी को जीवन में पग-पग पर अनेक विडम्बनाओं का सामना भी करना पड़ा, फिर भी वे विचलित नहीं हुईं। इनकी चर्चा उन्होंने अपने संस्मरणों में की है। महादेवी हिन्दी की प्राध्यापक थीं; पर उन्होंने अंग्रेजी साहित्य का भी गहन अध्ययन किया था। उनकी इच्छा वेद, पुराण आदि को मूल रूप में समझने की थी। इसके लिए वे अनेक विद्वानों से मिलीं; पर अब्राह्मण तथा महिला होने के कारण कोई उन्हें पढ़ाने को तैयार नहीं हुआ। काषी हिन्दू विष्वविद्यालय ने तो उन्हें किसी पाठ्यक्रम में प्रवेष देना भी उचित नहीं समझा। इसकी पीड़ा महादेवी वर्मा को जीवन भर रही।

महादेवी वर्मा कोमल भावनाओं की संवाहक थीं। सात वर्ष की अवस्था में उन्होंने पहली कविता लिखी थी – आओ प्यारे तारे आओ, मेरे आँगन में बिछ जाओ। रूढ़िवादी परिवार में जन्मी होने के कारण उनका विवाह नौ वर्ष की अवस्था में कर दिया गया; पर उनकी इच्छा पढ़ने और आगे बढ़ने की थी। इसलिए उन्होंने ससुराल की बजाय शिक्षा का मार्ग चुना। 1932 में उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहती थीं; पर गांधी जी ने उन्हें नारी शिक्षा के क्षेत्र में काम करने को प्रेरित किया। अतः उन्होंने प्रयाग में महिला विद्यापीठ महाविद्यालय की स्थापना की, जिसकी वे 1960 में कुलपति नियुक्त हुईं।

महीयसी महादेवी के मन पर गांधी जी का व्यापक प्रभाव था। बापू गुजराती और अंग्रेजी बहुत अच्छी जानते थे, फिर भी वे प्रायः हिन्दी में बोलते थे। महादेवी ने जब इसका कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि हिन्दी भारत राष्ट्र की आत्मा को सहज ढंग से व्यक्त कर सकती है। तब से ही महादेवी वर्मा ने हिन्दी को अपने जीवन का आधार बना लिया। वे महाप्राण निराला को अपना भाई मानकर उन्हें राखी बाँधती थीं। उनके विषाल परिवार में गाय, हिरण, बिल्ली, गिलहरी, खरगोष, कुत्ते आदि के साथ-साथ लता और पुष्प भी थे। अपने संस्मरणों में उन्होंने इन सबकी चर्चा की है।

उन्होंने साहित्यकारों की सहायता के लिए प्रयाग में ‘साहित्यकार संसद’ बनाई। संवेदनषील होने के कारण बाढ़ आदि प्राकृतिक प्रकोप के समय वे पीड़ितों की खुले दिल से सहायता करती थीं। उनकी बहुचर्चित कृति ‘यामा’ पर उन्हें प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ दिया गया था। नारी चेतना और संवेदना की इस कवियित्री का स्वर 11 सितम्बर, 1987 को सदा के लिए मौन हो गया।
…………………………….

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş