राजस्थान में कृषि के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित

वर्तमान राजस्थान सरकार किसानों के कल्याण के लिए समर्पण की भावना से कार्य कर रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्राी श्री अशोक गहलोत ने सरकार के शासन की बागडोर सम्भालने के बाद राज्य में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लेकर कृषि के क्षेत्रा में प्रभावी कदम उठाए, जिनकी सर्वत्रा प्रशंसा हुई। देश में पहली बार जहां कृषकों के वृहद् स्तर पर सम्मान करने की परम्परा का नायाब उदाहरण प्रस्तुत हुआ वहीं दूसरी ओर उत्पादन के क्षेत्रा में लगातार वृद्धि के प्रभावी प्रयास हुए। राष्ट्रीय स्तर पर देश में राज्य ने दलहनी उत्पादन में एक करोड़ रुपये की नकद राशि का प्रथम पुरस्कार लेकर यह साबित कर दिखाया कि मरूप्रदेश भी उत्पादन वृद्धि में चमत्कार कर नये कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2010द्ब्र11 में दलहनी फसलों के अधिकतम उत्पादन के लिये राजस्थान को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक करोड रुपये नकद राशि से पुरस्कृत किया गया। यह पुरस्कार 16 जुलाई, 2011 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्राी श्री मनमोहन सिंह व केन्द्रीय कृषि मंत्राी श्री शरद पवार द्वारा प्रदान किया गया। राज्य की ओर से मुख्यमंत्राी श्री अशोक गहलोत एवं कृषि मंत्राी श्री हरजीराम बुरडक द्वारा यह पुरस्कार ग्रहण किया गया।
देश में राजस्थान प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत करने वाला प्रथम राज्य है। कृषि की नवीनतम तकनीक को अपनाकर श्रेष्ठ उत्पादन प्राप्त करने वाले कृषकों को नकद पुरस्कार एवं प्रमाण पत्रा देकर सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार स्वरूप राज्य स्तर पर दो कृषकों को (पचास हजार रुपये प्रति कृषक), जिला स्तर पर दोद्ब्रदो कृषकों को (पच्चीस हजार रुपये प्रति कृषक) एवं पंचायत समिति स्तर पर दोद्ब्रदो कृषकों को (दस हजार रुपये प्रति कृषक) नकद राशि से पुरस्कृत किया जाता है। वर्ष 2009द्ब्र10 से लगातार तीसरे वर्ष 2011द्ब्र12 में भी 496 प्रगतिशील कृषकों को गत 19 सितम्बर,2012 को भारतीय विद्या भवन आडिटोरियम, मालवीय नगर, जयपुर में मुख्यमंत्राी श्री अशोक गहलोत एवं कृषि मंत्राी श्री हरजीराम बुरडक, द्वारा पुरस्कृत किया गया।
राज्य सरकार ने किसानों की दशा, किसानों पर कर्जा, ऋण व्यवस्था, उपज का मूल्य, मण्डी व्यवस्था, कृषि उत्पादन निर्यात, कृषि आधारित उद्योग, कृषि मजदूर आदि विषयों पर समस्याओं का प्रभावी हल ढूंढने तथा उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए राजस्थान किसान आयोग का गठन कर आयोग के अध्यक्ष पद पर श्री नारायण सिंह एवं अन्य सदस्यों का मनोनयन किया है। आयोग ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है एवं अपनी प्रथम अंतरिम रिपोर्ट 21 जून,2012 को मुख्यमंत्राी को प्रस्तुत की।
अकाल की स्थिति से जूझ रहे किसानों को मुआवजा देने में भी सरकार पीछे नहीं रही। अकाल प्रभावित सभी लघु व सीमान्त किसानों को 2000 रुपये प्रति हैक्टेयर की दर से कृषि आदान अनुदान के तहत प्रथम बार 798 करोड रुपये की सहायता राशि का वितरण किया गया।
कृषि बीमा योजनान्तर्गत बीमित कृषकों को खरीफ 2008 से रबी 2009 तक 1773.70 करोड रुपये का मुआवजा 28 लाख 60 हजार कृषकों को दिया गया तथा मौसम आधारित फसल बीमा योजना अन्तर्गत खरीफ 2008 से रबी 2011 तक 969.27 करोड रुपये का मुआवजा 59.32 लाख कृषकों को दिया गया। खरीफ 2012 हेतु मौसम आधारित फसल बीमा योजना 29 जिलों एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना 4 जिलों सीकर, झुंझुनूं, टोंक व राजसमंद के लिये अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
कृषि के क्षेत्रा में जल के कुशलतम उपयोग के लिये पाईपलाइन, डिग्गी, फार्मपौण्ड, जल हौज के लिये भी किसानों को मदद करने के लिये अनेक प्रभावी प्रयास किये गये। रबी 2008द्ब्र09 में 9.39 लाख क्विंटल बीज का वितरण
किया गया, जो बढकर वर्ष 2011द्ब्र12 में 18.50 लाख क्विंटल बीज वितरण हुआ, जो अब तक का सर्वाधिक बीज वितरण है। खरीफ 2012 में 4.60 लाख क्विंटल बीज वितरण हुआ। उर्वरकों को कुशल प्रबंधन के लिये वर्ष 2012द्ब्र13 में 2.10 लाख मैट्रिक टन डीएपी, 1.10 लाख मैट्रिक टन यूरिया व 0.50 लाख मैट्रिक टन काम्पलेक्स उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण करने हेतु आईपीएल, इफको व राजफैड के मध्य त्रिपक्षीय अनुबंध किया गया है।
कृषि एवं संबंधित विषयों में रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढावा देने हेतु राज्य में स्वामी केशवानन्द राजस्थन कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अन्तर्गत जोधपुर में एवं कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर के अन्तर्गत, सुमेरपुरद्ब्रपाली में कृषि महाविद्यालय स्थापित किये गये हैं।
कृषि विपणन के क्षेत्रा में भी सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। राजीव गांधी कृषक साख योजना 2009 के अन्तर्गत माह अगस्त,2012 तक 8556 कृषकों को लाभान्वित किया गया, जिसमें कुल सहायता राशि 3584.89 लाख रुपये दी गयी है। राज्य में कृषि उपज मण्डी समितियों के अन्तर्गत मण्डी यार्डों के विकास कार्यों पर 551.03 करोड रुपये व्यय किये गये हैं, जिसमें 338.83 करोड रुपये भवन निर्माण तथा 212.20 करोड रुपये सडकों के निर्माण एवं मरम्मत पर व्यय किये गये। 591.50 किलो मीटर लम्बाई की नवीन सडकों का डामरीकरण किया गया तथा 1213.96 किलो मीटर लम्बाई पर सडकों की विशेष मरम्मत का कार्य कराया गया।
राज्य में बीज निगम ने भी कृषकों के कल्याण के लिए उत्तम गुणवत्ता के बीज, नवीन किस्म के बीज के लिए जोरदार प्रयास किये हैं। नागौर एवं घस्सू का बास (सीकर) में नये विधायन संयंत्रा स्थापित किये गये हैं। कृषक हित में अधिक से अधिक बीज उपलब्ध करवाने के दृष्टिकोण से 2011द्ब्र12 में बीज विधायन क्षमता 12.13 लाख क्विंटल से बढाकर 15.44 लाख क्विंटल प्रतिवर्ष एवं बीज भण्डारण क्षमता 6.43 लाख से बढाकर 7.51 लाख क्विंटल की गई है। राज्य में पानी की बचत को दृष्टिगत रख सूक्ष्म सिंचाई योजना अन्तर्गत दिसम्बर,2008 से अगस्त,2012 तक 402745.30 हैक्टेयर क्षेत्रा में फव्वारा संयंत्रा व 57046.70 हैक्टेयर क्षेत्रा में बूंदद्ब्रबूंद सिंचाई व मिनी स्प्रिंकलर स्थापित किये जा चुके हैं। फव्वारा में 60 प्रतिशत, मिनी स्प्रिंकलर में 70 प्रतिशत एवं बूंदद्ब्रबूंद सिंचाई में 90 प्रतिशत तक अनुदान देय हैं। राज्य की जलवायु के अनुकूल फल बगीचों का क्षेत्रा विस्तार करने के लिए 36328.94 हैक्टेयर क्षेत्रा में नये फल बगीचे स्थापित किये जा चुके हैं। कृषक उच्च मूल्य की फसलें विपरीत मौसम में भी तैयार कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकॠ इसको दृष्टिगत रख संरक्षित खेती अन्तर्गत 261 ग्रीन हाउस का निर्माण कराया जा चुका है। राज्य में वर्षा जल को संग्रहित कर, संरक्षित जल से उद्यानिकी फसलें लेने को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में 1909 जल संग्रहण ढांचों का निर्माण कराया जा चुका है।
बडे भौगोलिक क्षेत्रा वाले जिले जैसे जोधपुर, बाडमेर, जैसलमेर, बीकानेर, जालोर, चूरू, नागौर, झुंझुनूं, सीकर जहां पूर्व में कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारियों के पद मांग के अनुसार सृजित नहीं थे, वहां किसानों को कृषि की नवीनतम जानकारी एवं योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने तथा कृषि गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कृषि पर्यवेक्षकों एवं सहायक कृषि अधिकारियों के नवीन पद सृजित किये गये हैं। अन्य जिलों में सहायक कृषि अधिकारियों के 750 पद सृजित किये गये हैं। 1973 के बाद पहली बार किसानों के हित एवं कृषि विकास के लिये इन अतिरिक्त पदों का सृजन किया गया है।
राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आयें हैं। किसान की मेहनत एवं राज्य सरकार के संरक्षण से राजस्थान अब कृषि उत्पादन के क्षेत्रा में नई ऊंचाइयां छू रहा है और इस सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।

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