“जंबूद्वीपे भरतखंडे” शब्दों में छिपा है एक गौरवशाली इतिहास

हमारे आर्य हिंदू परिवारों में जब पंडित लोग कोई संकल्प दिलाते हैं तो उस समय वह जिस मंत्र को बोलते हैं उसमें ‘जम्बूद्वीपे भरतखंडे ‘ – यह शब्द आते हैं। यह मंत्र आर्य विचारधारा के कितना अनुकूल है या कितना प्रतिकूल है ? – हम इस पर कोई चर्चा नहीं करेंगे। परंतु इस मंत्र या श्लोक के इन दो शब्दों के पीछे छुपे हुए एक इतिहास को बताने का प्रयास अवश्य करेंगे । मैं समझता हूं कि हमें कुछ सैद्धांतिक चीजों को अलग छोड़कर उन मूल्यों को भी समझ लेना चाहिए जिनसे हमारे इतिहास को सुरक्षा कवच प्रदान होता हो या उसके किसी गौरवमयी पक्ष पर प्रकाश पड़ना संभव हो।

सुप्रसिद्ध विद्वान और इतिहासकार गुरुदत्त जी ने इस विषय पर प्रकाश डाला है । उन्होंने हमें बताया है कि भारतवर्ष का नाम महाभारत के शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर न होकर महर्षि मनु के वंशज भरत के नाम पर है ।भारत जिसका पूर्व नाम अजनाभ वर्ष था, जम्बूद्वीप में स्थित है । जिसके स्वामी महाराज आग्नीध्र थे। आग्नीध्र स्वायम्भुव मनु के पुत्र प्रियव्रत के ज्येष्ठ पुत्र थे। प्रियव्रत समस्त भू-लोक के स्वामी थे। उनका विवाह विश्वकर्मा की पुत्री बर्हिष्मती से हुआ था। महाराज प्रियव्रत के दस पुत्र व एक कन्या थी। महाराज प्रियव्रत ने अपने सात पुत्रों को सप्त द्वीपों का स्वामी बनाया था, शेष तीन पुत्र बाल-ब्रह्मचारी हो गए थे। इनमें आग्नीध्र को जम्बूद्वीप का स्वामी बनाया गया था। आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि एवं महाराज नाभि के पुत्र ऋषभदेव थे।

जिनके पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा।

यह भरतखंड भी हिमालय के दक्षिण के भाग के लिए प्रयोग किया जाता था। क्योंकि भरत के अन्य भाई भी थे । भरत को जंबूद्वीपप का यह एक छोटा सा खंड मिला और छोटा खंड मिलने के कारण ही इसका नाम भरतखंड पड़ा। ज्ञात रहे उस समय जंबूद्वीप आज के यूरोप और एशिया को कहा जाता था। स्पष्ट है कि भरतखंड इस जंबूद्वीप का एक भाग था।

हमें गूगल पर सर्च करने के उपरांत उपरोक्त चित्र प्राप्त हुआ। जिसे आपके लिए यहां पर शेयर कर रहा हूं ।

मैं जानता हूं कि इसमें अभी कुछ सुधार की आवश्यकता है । साथ ही अभी इस क्षेत्र में बहुत कुछ अधिक शोध की भी आवश्यकता है । आपके अच्छे विचारों का हम स्वागत करेंगे। वैसे भी हमें अपने विचार थोपने नहीं चाहिए अपितु यह मानकर चलना चाहिए कि शोध के लिए रास्ते खोले जाएं और अच्छे विचारों को आमंत्रित किया जाए । अतः इस संबंध में आपके पास जो भी जानकारी हो उसे शेयर करें। जिससे एक प्रमाणिक इतिहास लिखने में सहायता प्राप्त हो सके।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

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