कश्मीर के लिए डोमिसाइल एक्ट मोदी सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि

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पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे राजनीतिक दलों पर लगनी चाहिए रोक

केन्द्र की मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर के पंडितों के लिए अच्छा संदेश देने वाला डोमिसाइल एक्ट आज से लागू कर दिया है । अब इस एक्ट के लागू होने से जो लोग जम्मू कश्मीर में पिछले 15 वर्ष से रह रहे हैं , वे वहां के नागरिक माने जाएंगे । अब इससे पहले कि वह व्यवस्था पूर्णतया समाप्त हो गई है जो कि जम्मू कश्मीर के पंडितों को या हिंदुओं को दोहरा नागरिक होने का दंड देती थी या उनके साथ दोहरा बर्ताव करती थी ।
सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2020 में सेक्शन 3 ए जोड़ा गया है। इसके तहत राज्य/यूटी के निवासी होने की परिभाषा तय की गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसी राज्य की विपक्षी पार्टियां तो इस ऐक्ट का विरोध कर ही रही हैं, अब पाकिस्तान से भी इस ऐक्ट के खिलाफ विरोध के सुर उभरने लगे हैं।

वास्तव में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के इस प्रकार के विरोध को एक प्रकार से राष्ट्रद्रोह ही माना जाना चाहिए , क्योंकि यह पार्टियां देश के ही रहने वाले उन नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करने की समर्थक हैं जो सदियों से नहीं युगों से इस देश के मूल नागरिक रहे हैं । सांप्रदायिकता के आधार पर शासन करने वाली ये दोनों पार्टियां इस राज्य में हिंदुओं के साथ दोहरा बर्ताव करती रही हैं और उनके मौलिक अधिकारों का शोषण करने का इंतजाम करती रही हैं । इसके बावजूद अब भी यदि यह अपने पुराने राग को ही अलाप रही हैं तो इनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए और इनकी मान्यता चुनाव आयोग के द्वारा रद्द की जानी चाहिए ।
नए डोमिसाइल नियमों के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा है और 10वीं या 12वीं की परीक्षा यहां के किसी संस्थान से उत्तीर्ण कर चुका है, तो वह जम्मू-कश्मीर का निवासी कहलाने का पात्र होगा। हमारा मानना है कि केंद्र सरकार के द्वारा यदि ऐसी व्यवस्था की गई है तो यह निश्चय ही स्वागत योग्य है । यह तब और भी अधिक स्वागत योग्य हो जाती है जब कुछ लोग इस देश में रोहिंग्या शरणार्थियों को इस देश के मूल नागरिकों की भांति अधिकार देने की वकालत करते पाए जाते हैं। जो लोग इस देश के प्रति समर्पित हैं उनके मौलिक अधिकारों पर रोक और जो इस देश को लूटने या यहां पर गैरकानूनी कार्य करने के इरादे से आ रहे हैं उन्हें शरणार्थी कहकर मौलिक अधिकारों से सुसज्जित करना कहां की नैतिकता और कहां की देशभक्ति है ? इस बात का भी जवाब अब स्पष्ट होना ही चाहिए।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसीजर) रूल्स 2020 को लागू कर दिया है। इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (पीआरसी) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी अब डोमिसाइल के अधिकारी होंगे। इन सभी के लिए 15 वर्ष तक प्रदेश में रहने समेत अन्य श्रेणी की अनिवार्यता के नियम लागू होंगे।
वास्तव में इस प्रकार की व्यवस्था करके केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के उन लोगों को बहुत बड़ी राहत प्रदान की है जो 1947 से ही यह नहीं समझ पाए थे कि आजादी क्या होती है ? जिनकी आजादी आजादी के बाद भी 73 वर्ष गिरवी रखी रही , उन्हें आज खुली हवाओं के झोंके मिले हैं तो देश के हर गंभीर और संवेदनशील व्यक्ति को इन लोगों को मिले इन खुली हवाओं के झोंकों का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए । क्योंकि आजादी के 73 वर्ष पश्चात यह लोग आकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं । यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब देश 3 महीने पश्चात अपना 74 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा , तब यह लोग पहली बार यह अनुभव करेंगे कि आजादी क्या होती है ?
बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल के नए नियमों को अधिसूचित किए जाने का स्वागत किया है। बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा है कि ये नए नियम सभी शरणार्थियों के साथ राज्य से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों को भी उनके अधिकार दिलाएगा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से सोमवार को जारी नए नियमों के तहत पश्चिम पाकिस्तान के लोगों, बाल्मीकियों, समुदाय के बाहर शादी करने वाली महिलाओं, गैर-पंजीकृत कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापित लोगों को जल्द ही आवास अधिकार मिल जाएंगे।
नैशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा कि नए डोमिसाइल नियमों को जिस जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन ऐक्ट 2019 के तहत लागू किया गया है, उसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं में चुनौती दी गई है। पार्टी ने कहा कि इस विभाजनकारी नियम को स्वीकार नहीं किया जा सकता है , क्योंकि इसका मकसद ही घाटी में आबादी के संतुलन को बिगाड़ना है। वास्तव में जब किसी वर्ग विशेष के हितों के लिए कोई पार्टी काम करती पाई जाती है और दूसरे वर्ग के लोगों के हितों का शोषण करती है तो ऐसी पार्टी को ही सांप्रदायिकता की राजनीति करने वाली पार्टी माना जाता है । हम ऊपर भी लिख चुके हैं फिर दोहरा रहे हैं कि नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी या जम्मू कश्मीर का कोई भी अलगाववादी संगठन जब केवल और केवल मुसलमानों के हितों की बात करता है तो समझ लेना चाहिए कि यह सांप्रदायिकता की राजनीति करते हैं , जो कि संविधान विरोधी आचरण है ।इसलिए ऐसे किसी भी राजनीतिक दल या आतंकवादी संगठन पर रोक लगाई जानी चाहिए जो किसी प्रदेश या किसी अंचल में केवल वर्ग विशेष के हितों के लिए आवाज उठाता हो।
आश्चर्य की बात है कि भारत के इस आंतरिक फैसले से पाकिस्तान क्यों बुरी तरह बौखलाया हुआ है ? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का यह नया डोमिसाइल ऐक्ट जम्मू-कश्मीर की आबादी को बदलने के लिए है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा, ‘भारत ने कश्मीर में जो नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू किया है वह पूरी तरह गैरकानूनी है और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के दोनों देशों के बीच हुए ऐग्रीमेंट का खुला उल्लंघन है।’
जबकि सच यही था कि अब से पहले बीते 73 वर्ष में जो कुछ होता रहा था वह सुनियोजित ढंग से जम्मू कश्मीर को हिंदू विहीन कर मुस्लिम राज्य बनाने की दिशा में किया जाने वाला राष्ट्र विरोधी कार्य था । अब हमें इस बात पर बहुत राहत मिली है कि भारतवर्ष का शीश जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बनकर वास्तव में भारत की मुख्य धारा के साथ जुड़ा है , सचमुच केंद्र की मोदी सरकार अपने इस कार्य के लिए अभिनंदन की पात्र है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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