भूमि माता और बहन की रक्षा कैसे करें?

images (57)

भूमि हमारे लिए क्या करती है?
हमारा भूमि से क्या सम्बन्ध है?
भूमि माता और बहन की रक्षा कैसे करें?

सनात्सनीळा अवनीरवाता व्रता रक्षन्ते अमृृताः सहोभिः।
पुरू सहस्त्रा जनयो न पत्नीर्दुवस्यन्ति स्वसारो अह्रयाणम्् ।।
ऋग्वेद मन्त्र 1.62.10 (कुल मन्त्र 720)

(सनात्) प्राचीन समय से अर्थात् सनातन (सनीळा) परमात्मा में रहने वाला, परमात्मा के निकट (अवनीः) भूमि, अंगुलियाँ (अवाता) विश्वसनीय, अहिंसक (व्रता) व्रत, संकल्प (रक्षन्ते) रक्षा करते हैं (अमृृताः) न मरने वाला (सहोभिः) अपनी शक्तियों के साथ (पुरू) बहुत (सहस्त्रा) हजारों में (जनयः) जन्म देने वाली (न) जैसे कि (पत्नीः) पत्नियाँ (दुवस्यन्ति) सेवा करती हैं (स्वसारः) पहले (अह्रयाणम््) सक्रिय और ऊर्जावान्।

व्याख्या:-
भूमि हमारे लिए क्या करती है?
हमारा भूमि से क्या सम्बन्ध है?

अनन्तकाल से भूमि परमात्मा में वास करते हुए और परमात्मा के निकट वास करते हुए सभी जीवों के लिए वफादार और अहिंसक है। वह हमारे संकल्पों की रक्षा करती है। वह अमृत है, अपनी सभी शक्तियों के साथ सदैव सक्रिय है। पत्नियों की तरह धरती माता अनेकों हजारों को जन्म देती है और बहनों की तरह सक्रिय और ऊर्जावान भाईयों की सेवा करती है। ‘अवनीः’ का अर्थ है अंगुलियाँ भी होता है। यह भी सभी जीवों के लिए वफादार और अहिंसक होती हैं। वे हमारे संकल्पों की रक्षा में सहायक होती हैं। वे अपनी सभी शक्तियों के साथ सदैव सक्रिय रहती हैं। इनमें सभी पांचों तत्त्वों की शक्तियाँ होती हैं। इसीलिए योगी लोग अलग-अलग प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए अंगुलियों के प्रयोग से ही भिन्न-भिन्न मुद्राओं का प्रयोग करते हैं।

जीवन में सार्थकता: –
भूमि माता और बहन की रक्षा कैसे करें?

भूमि माता के प्रति श्रद्धा और उसके रक्षण की भावना हमारे अन्दर उच्च स्तरीय दिव्यता की तरह होनी चाहिए। परमात्मा ने सभी जीवों को उत्पन्न करने और उनका पोषण करने का सर्वोच्च कार्य केवल धरती माता को ही दिया है। इसीलिए परमात्मा हमें प्रेरित करते हैं कि हम धरती को जन्म देने वाली माता और सेवा करने वाली बहन के रूप में समझें। अतः सभी मानवों का यह आवश्यक कर्त्तव्य है कि वे अपनी माँ और बहन की प्रदूषण से रक्षा करें। आधुनिक युग में असीमित मात्रा में खेती के माध्यम से इस भूमि माँ और बहन के अन्दर जहरीले रसायन मिलाये जा रहे हैं। अन्ततः यह सब कलियुग के लोगों के लिए ही विनाशकारी सिद्ध होगा। हमें इस महान् और दिव्य माता तथा बहन की पूजा करनी चाहिए।

सूक्ति:-
(सनात् सनीळा अवनीः अवाता) अनन्तकाल से भूमि परमात्मा में वास करते हुए और परमात्मा के निकट वास करते हुए सभी जीवों के लिए वफादार और अहिंसक है।


अपने आध्यात्मिक दायित्व को समझें
आप वैदिक ज्ञान का नियमित स्वाध्याय कर रहे हैं, आपका यह आध्यात्मिक दायित्व बनता है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें जिससे उन्हें भी नियमित रूप से वेद स्वाध्याय की प्रेरणा प्राप्त हो। वैदिक विवेक किसी एक विशेष मत, पंथ या समुदाय के लिए सीमित नहीं है। वेद में मानवता के उत्थान के लिए समस्त सत्य विज्ञान समाहित है।

यदि कोई महानुभाव पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं तो वे अपना नाम, स्थान, वाट्सएप नम्बर तथा ईमेल 0091 9968357171 पर वाट्सएप या टेलीग्राम के माध्यम से लिखें।

अपने फोन मैं प्लेस्टोर से टेलीग्राम डाउनलोड करें जिससे आप पूर्व मंत्रो को भी प्राप्त कर सके। https://t.me/vedas4

आईये! ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति परमात्मा के साथ दिव्य एकता की यात्रा पर आगे बढ़ें। हम समस्त पवित्र आत्माओं के लिए परमात्मा के इस सर्वोच्च ज्ञान की महान यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।

टीम
पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम द वैदिक टेंपल, मराठा हल्ली, बेंगलुरू, कर्नाटक
वाट्सएप नम्बर-0091 9968357171

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet