शिवराज सिंह ने बनवाया कांग्रेस प्रत्याशी से अनोखा रिकॉर्ड*

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(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)

मध्यप्रदेश के विदिशा लोकसभा क्षेत्र में चुनाव के बाद एक अनोखा रिकार्ड बना है और यह रिकार्ड कांग्रेस के किसी भी प्रत्याशी के लिए शर्मनाक भी कहा जा सकता है। यह रिकॉर्ड कांग्रेस के हारे प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा के नाम पर इस चुनाव में दर्ज हो गया है। इस चुनाव में विदिशा लोकसभा सीट से मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता शिवराज सिंह जीते हैं उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार प्रतापभानु शर्मा को हराया है। यहां शर्मा ,शिवराज सिंह से 8 लाख 21 हजार 408 वोटों से हारे हैं जो अपने आप में एक रिकार्ड है।
मध्यप्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट हमेशा से ही चर्चित रही हैं। वर्ष 1967 और 1971 में यहां से जनसंघ के दिग्गज नेता पंडित शिव शर्मा और रामनाथ गोयनका जीते थे। 1977 में यहां से राघव जी जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीते।वर्ष 1991 में यहाँ से भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चुनाव जीता था। उस समय वे लखनऊ से भी लोकसभा का चुनाव जीत चुके थे इसलिए विदिशा से उन्होंने त्यागपत्र दे दिया तब परिदृश्य पर उभरे शिवराज सिंह चौहान।चौहान विदिशा में हमेशा लोकप्रिय रहे।वर्ष 1991 से लेकर 96, 98, 99 और 2004 के चुनाव उन्होंने यहां से जीते। 2006 में यहां पुनःचुनाव हुए तब रामपाल सिंह विदिशा के सांसद बने। 2009 और 2014 के चुनाव में भाजपा की तेजतर्रार नेत्री और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यहां से सांसद रही ।श्रीमती स्वराज के निधन के बाद 2019 में रमाकांत भार्गव यहां से सांसद बने । मूलत: भाजपा के गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में भाजपा हमेशा ही लाखों वोटों से जीतती रही है। 2019 में रमाकांत भार्गव 5 लाख से अधिक वोटों से जीते थे तो सुषमा स्वराज 2014 में 4 लाख और 2009 में साढे तीन लाख से अधिक वोटों से जीती थी । 2004 में जब कुल साढ़े छह लाख के लगभग ही वोट डले थे तब भी शिवराज सिंह 2 लाख 60 हजार वोटों से जीते थे। 1991 के चुनाव में कांग्रेसी उम्मीदवार प्रतापभानु शर्मा एक लाख चार हजार वोटों से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हारे थे।

यह बना कांग्रेस का शर्मनाक रिकॉर्ड
वर्ष 1991 से अब 2024 में तैंतीस वर्षों बाद प्रतापभानु की हार का अंतर बढ़कर 8 लाख 21हजार 408 वोटों का हो गया है। यहां प्रतापभानु शर्मा को केवल दो लाख 97 हजार 52 वोट मिले और वे रिकार्ड 8 लाख 21 हजार 408 वोटों से चुनाव हार गए हैं। उनकी ये हार इसलिए ऐतिहासिक है कि वे देश भर में कांग्रेस के सबसे ज्यादा वोटों से हारने वाले पहले प्रत्याशी बन गए हैं। वैसे इस बार मध्यप्रदेश में सबसे बड़ी जीत इंदौर में भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी की हुई है लेकिन वहां कांग्रेस का कोई प्रत्याशी चुनाव में था ही नहीं इसलिए कांग्रेस के खाते में अब तक की सबसे बड़ी हार प्रतापभानु शर्मा ने लिखा दी।1980 की इंदिरा लहर और 1984 की सहानुभूति लहर में मात्र नौ हजार वोटों से जीतकर सांसद बनने वाले प्रताप भानु अब कांग्रेसी इतिहास में देश भर में सबसे ज्यादा वोटों से हारने वाले नेता के रूप में हमेशा याद रखे जाएंगे और इस रिकार्ड को रचवाने का श्रेय मिला है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को । पांव -पांव वाले भैया और मामा के नाम से राजनीतिक लोकप्रियता पाने वाले शिवराज सिंह पूरे मध्यप्रदेश में लोकप्रिय हैं। उनकी लोकप्रियता मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कम नहीं हुई है। जब उन्हें विदिशा संसदीय क्षेत्र से टिकिट मिला तभी यह तय हो गया था कि वे बड़ी जीत हासिल करेंगे। उनका यह काम कांग्रेस ने प्रताप भानु शर्मा जैसे निष्क्रिय और गुमनामी में जी रहे नेता को मैदान में उतार कर और आसान कर दिया। यही कारण रहा कि शिवराज सिंह देश के इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी जीत और प्रताप भानु शर्मा कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी हार अपने नाम लिखाने में सफल हुए हैं।(विनायक फीचर्स)

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