अध्याय … 73 योग करें मनोयोग से…..

             217

यज्ञ करो संसार में, वर्षा हो भरपूर।
अन्न उगेगा खेत में , रोग शोक हों दूर।।
रोग शोक हों दूर,फैले खुशहाली चहुंओर।
प्रेम – प्रीत सहयोग से, नाचे मन का मोर।।
ऋषियों का उपदेश – यज्ञ करो, यज्ञ करो।
वेद का संदेश यही – यज्ञ करो, यज्ञ करो।।

        218

कामी करता कामना, रहे दुखी दिन रात।
अंत नहीं होता कहीं, मनवा रहे अशांत।।
मनवा रहे अशांत , क्रोध का होता हमला।
गिर जाती दीवारें और गिर जाते हैं थमला।।
क्रोधाग्नि में दुष्कर्मों की मानव हामी भरता।
बुरे कर्म है जितने , सब को कामी करता।।

         219

पीछे भगते भोग के, खोटे उनके भाग्य।
पीठ फेर जो बैठग्या , जाग गया सौभाग्य।।
जाग गया सौभाग्य , मिले जगत में इज्जत।
कीच में वह फंस गया और कराई फजीहत।।
वही मनुष्य आगे बढ़ें, जो रोज सवेरे जगते।
योग करें मनोयोग से ,ना भोग के पीछे भगते।।

दिनांक : 25 जुलाई 2023

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