बिखरे मोती : ‘विशेष’- प्रभु से क्या मांगें भक्ति अथवा मुक्ति ?

images - 2023-06-23T162030.506

‘विशेष’- प्रभु से क्या मांगें भक्ति अथवा मुक्ति ?

ब्रह्म-भाव में हम जीयें,
करें ब्रह्म-रस पान।
जीवन-धन तेरा नाम है,
दो भक्ति का दान॥2775॥

तत्त्वार्थ:- हे ब्रह्मन् ! हे प्राण-प्रदाता ओ३म् !! हे धराधन्य!!! हे अनन्त और निरन्तर कृपा बरसाने वाले पर्जन्य ! आप हम पर इतनी कृपा अवश्य करें, कि आपसे निरन्तर सायुज्यता बनी रहे अर्थात् सर्वदा हमारी आत्मा का तारतम्य बना रहें ,हमारा मन आपसे सर्वदा जुडो रहे, यह जीवन ब्रह्म- भाव में व्यतीत हो, देह-भाव में नहीं। हमें तेरे आनन्द की रसानुभूति निरन्तर होती रहो, तू अमूर्त है अदृश्य है, निराकार है किन्तु फिर भी तेरी कृपा का साया हमारे अन्तःकरण पर पढ़ता रहे, ताकि हमारे मानस के मुकुर में आत्मबल बढ़ता रहे। तू रसों का रस है, आनन्दों का भी आनन्दहै, समस्त ब्रह्माण्डु तुझसे बड़ा कोई नहीं अर्थात् तू
महानों का भी महान है।
सारे ग्रह, नक्षत्र निहारिकाएँ तेरे सामने नतमस्तक हैं। सारे पंचभूतों को तू ही तो गति देता है। तेरे एक संकेत पर इनमें ऊर्जा का संचरण होता है। इसलिए तेरा नाम, तेरी स्तुति प्रार्थना, उपासना हमारा जीवन-धन है, जो धनों में सबसे बड़ा धन है। इस धन के लिए हम निष्काम भाव से आपसे याचना करते हैं कि हमें आप अपनी भक्ति का दान दीजिए। मुक्ति से महान भक्ति होती है, क्योंकि भक्ति में समर्पण का भाव होता, कुछ देने का भाव होता है, जो साधक अथवा भक्त को आत्मसंतोष देता है, संतुष्टि अथवा तृप्ति देता है जबकि मुक्ति में स्वार्थ होता है, लेने का भावा होता है। भक्ति से भक्त के मन में आत्मगौरव का भाव सर्वदा अक्षुण्ण रहता है। इसलिए मुक्ति से महान भक्ति है। अत: आप कृपा कर के हमें अपनी भक्ति का दान दीजिए, हमारी विनती ये स्वीकार कीजिए।

विशेष :- आत्मा परमात्मा का प्रतिरूप है –

मैं भी तेरा स्वरूप हूँ,
पर पर्दा अज्ञान।
अन्दर से मैं भात हूँ,
छिलका कारण धान॥2776॥

तत्त्वार्थ :- भाव यह है कि हे ब्रह्मन!हे परम पिता परमात्मन!! मैं तेरा ही तो स्वरूप हूँ। मैं से अभिप्राय है आत्मा जो तेरा ही स्वरूप है। प्यारे पिता आप सत् हो अर्थात शाश्वत सत्य हो, चेतन अर्थात् गति देने वाले हो किंतु गति से दूर रहते हो। आप पूर्णानन्द हो किन्तु आत्मा आनन्दांश है।
इसीलिए तो आत्मा का गन्तव्य पूर्णानन्द है,वह प्रभु – मिलन के लिए जीवन-पर्यन्त ऐसे लालायित रहती है, जैसे सरिता सागर से एकाकार होने के लिए बेचैन रहती है।

परम पिता परमात्मा के तीनों गुण आत्मा में कमोबेश भासित होते हैं । इसीलिए हमारे ऋषियों ने मुखर कण्ठ से कहा- ‘सो अहं’ अर्थात् जो तू है वही तो मैं हूँ। तेरा प्रतिबिम्ब मेरी आत्मा में भासित हो रहा है, जैसे सूर्य का प्रतिबिम्ब जल में प्रतिबिम्बित होता है। किन्तु बिडम्बना यह कि मल, विक्षेप और आवरण के अज्ञान रूपी पर्दे, के कारण आत्मा अपना निजी स्वरूप भूल गया और माया में भटककर प्रभु से विमुख हो गया है अन्यथा जो ईश्वर के दिव्य गुण है, वहीं आत्मा में निहित हैं, जैसे छिलका उतरने पर चावल, चावलों में मिल जाता है, तद् रूप हो जाता है किन्तु जब तक वह छिलके में लिपटा हुआ है तब तक वह धान ही कहलाता है। मिट्टी और महल का अस्तित्त्वाँ एक है, ठीक इसी प्रकार आत्मा और परमात्मा का तत्त्व अस्तित्त्व एक ही है।
आवश्यकता अज्ञान अथवा माया रूपी पर्दे को हटाने की है। जिस क्षण यह अज्ञान का पर्दा हटता है,तत्क्षण ही साधक ब्रह्मनिष्ठ होता है, ब्रह्मभूत होता है अर्थात् प्रभु के तद्‌रूप हो जाता है। यह अध्यात्म का श्रेय -मार्ग है जो दुरूह तो है किन्तु असम्भव नहीं । इसके लिए सर्वदा प्रयत्नशील रहिये।
क्रमशः

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
casinofast
safirbet giriş
safirbet giriş
betebet giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
damabet
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş