भारत के चौदहवें राष्ट्रपति का चुनाव निकट आता जा रहा है, हम सभी का ध्यान इस समय यह देखने में लगा हुआ है कि ‘रायसीना हिल्स’ पर इस बार पहुंचने की किसकी बारी है? यद्यपि भाजपा के प्रत्याशी श्री रामनाथ कोविंद का ‘रायसीना हिल्स’ पहुंचना लगभग निश्चित है, परंतु इसके उपरांत भी विपक्ष की प्रत्याशी मीरा कुमार के मैदान में आ जाने से और लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं के दृष्टिïगत अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि श्री कोविंद ही भारत के चौदहवें राष्ट्रपति होंगे।
हमारे अब तक के राष्ट्रपतियों के विषय में यहां कुछ रोचक तथ्य दिये जा रहे हैं, जो इस समय हम सबको जानने आवश्यक हैं। देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं जो 26 जनवरी 1950 से लेकर 13 मई 1952 तक इस देश के निर्विरोध राष्ट्रपति रहे। वही ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं जो इस पद पर 12 वर्ष तक रहे और अपनी मर्जी से उन्होंने अगली बार राष्ट्रपति बनने से मना कर दिया था। डा. प्रसाद के सामने 1952 में संविधान सभा के सदस्य ‘के.टी. शाह’ चुनाव लड़े थे जिन्हें मात्र 15.3 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। उस समय कुल पांच उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इसके पश्चात 1957 में राष्ट्रपति के दूसरे चुनाव में डा. राजेन्द्र प्रसाद को 99 प्रतिशत मत प्राप्त हुए जबकि उनके सामने चुनाव लड़ रहे प्रमुख प्रत्याशी नागेन्द्र नारायण को मात्र 0.4 प्रतिशत मत ही प्राप्त हो सके। उस समय कुल तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। 1962 के चुनाव में डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जब देश के राष्ट्रपति बने तो उस समय उन्हें 98.2 प्रतिशत मत मिले और उनके सामने चुनाव लड़ रहे प्रमुख प्रत्याशी चौ. हरीराम को 1.1 प्रतिशत मत मिले। डा. राधाकृष्णन के इस चुनाव में भी कुल तीन प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में थे।
1967 में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में पहली बार बड़ी संख्या में 17 उम्मीदवारों ने नामांकन किया। तब प्रमुख प्रत्याशी रहे डा. जाकिर हुसैन को 56.2 प्रतिशत और प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कोटा सुब्बाराव को 43.4 प्रतिशत मत मिले। इसके पश्चात 1969 में प्रमुख प्रत्याशी वी.वी. गिरि विजयी रहे। जिन्हें 48.0 प्रतिशत और प्रमुख प्रतिद्वंद्वी नीलम संजीवा रेड्डी को 37.5 प्रतिशत मत मिले। उस समय कुल 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। 1974 के चुनावों में डा. फकरूद्दीन अली अहमद देश के राष्ट्रपति बने। उन्हें 80.2 प्रतिशत मत उस समय मिले जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी त्रिदीव चौधरी को 19.2 प्रतिशत मत मिले थे। इस बार केवल दो ही उम्मीदवार चुनाव मैदान मंं थे। 1977 के चुनावों में नीलम संजीवा रेड्डी निर्विरोध चुने गये। यद्यपि उनके सामने 36 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, परंतु उन सबके नामांकन रद्द हो गये थे। 1982 में देश के राष्ट्रपति बने ज्ञानी जैलसिंह को 72.7 प्रतिशत जबकि विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी एच.आर. खन्ना को 27.3 प्रतिशत मत मिले। इस चुनाव में केवल दो ही प्रत्याशी मैदान में थे। 1987 के चुनाव में विजयी रहे आर.वेंकटरमण को 72.3 प्रतिशत तथा प्रमुख प्रतिद्वंद्वी वी. कृष्ण अय्यर को 27.5 प्रतिशत मत मिले। इस बार चुनाव में तीन प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे थे। 1992 में कुल चार प्रत्याशियों में से विजयी डा. शंकर दयाल शर्मा को 65.9 प्रतिशत और जी.जी. स्वेल को 33.8 प्रतिशत मत मिले।
देश में पहली बार दलित परिवार से निकले एकव्यक्ति के. आर.नारायणन ने 1997 में 95 प्रतिशत मत लेकर विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी टी.एन. शेषन को परास्त किया। इसके पश्चात 2002 में देश ने यह सर्वोच्च पद ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को सौंपा। इन्होंने विपक्ष की संयुक्त प्रत्याशी लक्ष्मी सहगल को 89.6 प्रतिशत मत प्राप्त कर परास्त किया। 2007 के राष्ट्रपति चुनावों में यह बाजी देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मारी। इन्होंने 65.8 प्रतिशत मत लेकर विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी भैरोसिंह शेखावत को परास्त किया। इसी प्रकार 2012 में जहां विपक्ष ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पी.ए. संगमा को अपना प्रत्याशी घोषित किया वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपना प्रत्याशी घोषित किया। इस बार प्रणव मुखर्जी के सिर राष्ट्रपति का ताज सजा और उन्होंने 69.3 प्रतिशत मत लेकर विजय प्राप्त की थी।
अब इस समय हमारे देश के चौदहवें राष्ट्रपति का चुनाव होने जा रहा है जिसमें राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों और प्रदेशों के विधानमंडलों के निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या 4896 है। पहले राष्ट्रपति के चुनाव में इनकी संख्या 4056 थी। उस समय देश के राज्य कम थे और हमारी लोकसभा के सदस्यों की संख्या भी आज की अपेक्षा कम थी। आगामी 25 जुलाई हमारे वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का अंतिम कार्यदिवस है। उसी दिन देश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा।
इस समय देश के राज्यों के विधानमंडलों के कुल 4120 विधायकों के मतों का मूल्य 5,49,495 है। निर्वाचन में भाग लेने वाले लोकसभा व राज्यसभा के कुल सदस्य 776 हैं, जिनके मत का मूल्य 708 है। इस प्रकार सभी 776 मतों का कुल मूल्य 5,49,408 बनता है। इस प्रकार कुल निर्वाचक मंडल अर्थात 4896 सदस्यों की कुल मतों की संख्या 10,98,903 होती है। इस समय जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है उसके अनुसार भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास लगभग साठ प्रतिशत मतों का जुगाड़ बन चुका है। कांग्रेस ने अपनी खीझ मिटाने के लिए मीरा कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है, देखने वाली बात होगी कि मीरा कुमार कितना मत प्राप्त कर पाती हैं?
इस समय राष्ट्रपति के चुनाव को कुछ लोगों ने ‘दलित राष्ट्रपति’ की घृणास्पद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्हें नहीं पता कि राष्ट्रपति केवल राष्ट्रपति होता है और उसे दलित या अगड़े-पिछड़े के रूप में देखना इस पद के साथ सबसे बड़ा अन्याय करना होगा। राष्ट्रपति के जिन भावनाओं और भावों से ऊपर होने की अपेक्षा हमारा संविधान करता है-उसके विषय में ऐसी घृणास्पद राजनीति करना उचित नहीं कहा जा सकता। यदि हम ऐसा कर रहे हैं तो मानना पड़ेगा कि हमारी दूषित जातिवादी मानसिकता का कुप्रभाव देश के इस सर्वोच्च संविधानिक पद को भी अपनी चपेट में ले रहा है।

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