भारत की स्वाधीनता के एक जुनूनी सिपाही क्रांतिकारी विश्वनाथ राय

images (78)

दिव्येन्दु राय

देवरिया जनपद के जिला मुख्यालय के करीब के गॉव खुखुन्दू में 10 दिसम्बर सन् 1906 में एक बालक का जन्म हुआ। जन्म चूँकि जमींदार एवं शिक्षित परिवार में हुआ इसलिए उस बालक को पढ़ने के लिए पहले गोरखपुर के सेंट एंड्यूज कॉलेज भेजा गया तथा उसके बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला कराया गया। वर्ष 1932 में उस बालक ने विधि की शिक्षा पूरी की लेकिन उस बालक ने इलाहाबाद में जाकर जो क्रांति की उसकी कल्पना न तो उसके परिजनों को थी और न ही रिश्तेदारों को। वह बालक शहीद भगत सिंह के दल में शामिल हो गया और उसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह में भाग लिया। हम बात किसी और की नहीं बल्कि महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भारत सरकार में मंत्री एवं पड़रौना,सलेमपुर, देवरिया लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार 25 वर्ष 1952 से 1977 तक सांसद रहने वाले स्व० विश्वनाथ राय जी की कर रहे हैं।

विश्वनाथ राय जी का जन्म 10 दिसम्बर 1906 को देवरिया जनपद के खुखन्दू गॉव के एक जमींदार भूमिहार (ब्राह्मण) परिवार में हुआ था। इनकी मृत्यु 27 अगस्त 1984 को वाराणसी में हुई। इनका विवाह उत्तर प्रदेश और बिहार के बॉर्डर पर स्थित एक गॉव उजियार घाट में हुआ था।

विश्वनाथ राय

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लॉ के छात्र विश्वनाथ राय नेशनल यूथ लीग की कार्यसमिति के सदस्य के रूप में 1930 में महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़े। पढ़ाई के दौरान उन्होंने वहां के घंटाघर चौक पर तिरंगा फहराकर अंग्रेजों को चुनौती दे डाली। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई और अखबारों ने तिरंगा फहराने पर जमींदार का बेटा, वकालत का छात्र गिरफ्तार शीर्षक से खबर छापी। इस दौरान दो साथियों की शहादत ने उन्हें इस तरह झकझोरा कि अब तक बापू के अहिंसक आंदोलन को ही आजादी का सही रास्ता मानने वाले विश्वनाथ राय ने हथियार उठाने का निर्णय लिया।

उनके हौसले को न तो राह की मुश्किलें डिगा सकीं और न ही अंग्रेजों की बर्बरता असर दिखा पाई। आजादी लाना उनका जुनून था और आजाद भारत सपना। घर परिवार की चिंता किए बगैर वह अपने मिशन में लगे रहे। वह देखते ही देखते गोरखपुर क्षेत्र में क्रांतिकारियों की जमात के आदर्श बन गये।

चंद्रशेखर आजाद के सानिध्य में पुलिस से बचते हुए वह दिन-प्रतिदिन अंग्रेजी हुकूमत के लिए सिर दर्द बनते जा रहे थे। अंग्रेजी हुकूमत के लिए यह चुनौती बनते जा रहे थे, उनकी गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने के क्रम में परिवार और रिश्तेदारों तक को तमात तरह की यातनाएं सहनी पड़ी थीं। 1931 में जेल जाने के बाद वह जब बाहर आये तो उन्होंने भूमिगत होकर कई आन्दोलन अंग्रेजों के विरुद्ध चलाये।

अंग्रेजों के तमात कोशिशों के चलते आखिरकार विश्वनाथ राय 1931 में एक दिन उनके चंगुल में जा फंसे। मुकदमे के ट्रायल के दौरान ब्रिटिश जिलाधिकारी ने विश्वनाथ राय से माफी मांगने पर पीसीएस रैंक की नौकरी देने की पेशकश की। लेकिन उन्होंने अधिकारी की नौकरी को ठुकरा कर जेल जाना मंजूर किया। उनके ससुर जज थे और उन्होंने भी माफीनामे के लिए समझाया पर वह नहीं माने। तिरंगा फहराने के जुर्म में उन्हे 15 बेंत और 6 माह की सजा हुई।

क्रांतिकारी विश्वनाथ राय की पत्नी शीला राय इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकीं और अल्पायु में ही चल बसीं। बेटे के जेल जाने व बहू की मौत के सदमे को उनके पिता भी नहीं बर्दाश्त कर सके और वह भी चल बसे। इस दुखद मौके पर भी जेल में बन्द क्रांतिकारी विश्वनाथ राय को अपने पत्नी तथा पिता के अंतिम क्रिया में शामिल होने का अवसर नहीं मिला।

महात्मा गांधी के सिद्धांतों को अपनाते हुए उन्होंने आंदोलनों में लाठी खाई तो बहरी सरकार की तंद्रा भंग करने के लिए चंद्रशेखर आजाद के रास्ते को भी अपनाने से भी वह पीछे नहीं हटे। काल कोठरी में रहकर भी उन्होंने सिर्फ आजाद भारत का ही सपना देखा।

चंद्रशेखर आजाद की शहादत के बाद जेल से छूटने पर वह पुन: चंद्रशेखर आजाद की सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने लगे। अंग्रेजी हुकूमत ने इस चुनौती से निपटने के लिए इनके खुखुन्दू घर पर ताण्डव मचाया, इनके परिजन गॉव में अन्य लोगों के घरों में छुपकर रहने के लिए मजबूर थे। उनके घर को जला दिया गया, इनके ससुर जो उस समय जज थे उनपर दबाव बनाया गया, अंग्रेजों की यह युक्ति भी काम नहीं आई।

लेकिन 1939 में विश्वनाथ राय एक बार फिर पकड़ लिए गए। इस बार उनके कारावास की अवधि आठ वर्ष थी। आजादी के इस दीवाने को देवली (राजस्थान) के रेगिस्तानी इलाके की जेल में कठोर कारावास हेतु डाल दिया गया। इन लेकिन आजादी के 6 माह पहले ही रिहा कर दिया गया। इन 7 वर्षों में उन्होंने पत्राचार के माध्यम से देश प्रेम की भावना का संचार करते थे। 1939-46 के कारावास के दौरान ही विश्वनाथ राय का संपर्क उसी जेल में बंद जवाहर लाल नेहरू से हुआ। वह कूल मिलाकर लगभग 8 वर्ष जेल में रहे। उनके विचारों से प्रभावित होकर विश्वनाथ राय ने पुन: गांधीवादी रास्ते पर चलने का निर्णय लिया। 1944 में ही उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।

आजादी के बाद के पहले चुनाव से ही विश्वनाथ राय समाजवादियों के गढ़ में कांग्रेस का झंडा बुलंद किये रहे। पहले चुनाव में वह पडरौना से सांसद चुने गये। दूसरे चुनाव में उनका क्षेत्र बदल कर सलेमपुर कर दिया गया। इसके बाद भी वह अपनी बेहतर छवि के बल पर चुनाव जीतने में सफल रहे। तीसरे चुनाव 1962 में उन्हे प्रख्यात समाजवादी अशोक मेहता के खिलाफ देवरिया लोकसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया। इस चुनाव में उन्होंने अशोक मेहता को शिकस्त दे दिया। वर्ष 1967 के चुनाव में वह लगातार चौथी बार सांसद चुने गये। वह देवरिया लोकसभा से दूसरी बार सांसद बने। वर्ष 1962 के चुनाव में उन्हे 40.14 फीसद वोट मिला था। इस चुनाव में उस समय के दिग्गज सोशलिस्ट नेता व प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक मेहता की हार के बाद जिले के गेंदा बाबू, रामायण राय समेत अधिकांश समाजवादी नेता कांग्रेस में चले गये। जिसके चलते वर्ष 1967 का चुनाव विश्वनाथ राय के लिए आसान हो गया। इस चुनाव में वह अन्य प्रत्याशियों की अपेक्षा काफी कम पैसा पार्टी से लिया और उसी से चुनाव जीत गये। इस बार के चुनाव में उनका वोट बढ़कर 40.92 फीसद हो गया। उन्हें कुल 106557 वोट मिले। केन्द्र में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी।

सविनय अवज्ञा आंदोलन के सेनानी विश्वनाथ राय 1952 से 1977 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे। संसद में उन्होंने खेती किसानी के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। शुरू में उन्होंने ने सदन में कृषि, गन्ना, गेहूं, बागवानी आदि मुद्दे उठाये क्योंकि देश में खाद्यान्न संकट था। गन्ने के शीरे से जैव ईंधन बनाने, कृषि उत्पाद बढ़ाने के साथ ही किसानों के लिए पारिश्रमिक मूल्य पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के लोग सस्ते भोजन के पात्र हैं किन्तु किसानों के श्रम के लागत पर नहीं, चूंकि उन्हें उनके उत्पाद का पर्याप्त मूल्य नहीं मिलता। इसके साथ ही उन्होंने पहले व दूसरे पंचवर्षीय योजनाओं में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़ी निधि प्राप्त करने में सफलता पाई। इसके अलावा भी उन्होंने कई मुद्दे उठाए।

पचास व साठ के दशक सांसद रहते हुए उन्होंने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के सानिध्य में बाजपुर और किच्छा चीनी मिल के विकास के लिए प्रयास किया। वही पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के लिए विशेष पैकेज के लिए निरंतर प्रगतिशील रहे। 1958 में पंतनगर हवाई अड्डे के लिए उन्होंने संसद में प्रश्न किए। 70 के दशक में वह श्रम व पुनर्वास मंत्री के रूप में बुक्सा जनजाति, बांग्लादेश के विस्थापितों और श्रमिकों आदि की दशा सुधारने के अथक प्रयास करते रहे।

काठगोदाम बरेली बड़ी रेलवे लाइन के लिए लगातार रेल मंत्रालय के संपर्क में रहे। गन्ने के शीरे से जैविक ईंधन इथेनॉल बनाने का पुरजोर समर्थन किया, जो वर्तमान में कानून बन चुका है। किसानों व श्रमिकों की उपज के दामों के लिए संसद के अंदर व संसद के बाहर लगातार संघर्ष करते रहे। 42वां संविधान संशोधन पर विश्वनाथ राय ने सदन में भगत सिंह के सपनों से उसे जोड़ा था। 71% लोग खेती पर आश्रित हैं उनकी चिंता उनके सदन में की गई बहसों में सर्वाधिक दिखाई देती है।

सबसे पहले सदन में उन्होंने यह सवाल उठाया था कि गन्ना की तरह ही शेष फसलों का भी रेट निर्धारित किया जाना चाहिए। विश्वनाथ राय ने सभी कारखानों के राष्ट्रीयकरण की बात की थी। चीनी मिलों के प्रबंधन में किसानों की हिस्सेदारी की बात की थी। उन्होंने खांडसारी उद्योग पर टैक्स लगाने का विरोध किया था और कहा कि किसानों को चीनी मिलों से आने वाले टैक्स का सिर्फ 27 फीसद मिलता है। उसको बढ़ाने की बात की थी।

उन्होंने बांग्लादेश और पश्चिमी पाकिस्तान की सीमाओं पर सामाजिक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की बात की जिससे कि आपसी सौहार्द स्थापित होगा। उन्होंने इन देशों में आवागमन की छूट देने की मांग भी की थी।

उन्होंने महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण स्थल, गन्ना मिल किसानों एवं पानी की समस्या को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने भटनी चीनी मिल चालू कराने का दूसरा प्रस्ताव भी रखा क्योंकि चीनी मिल चलने से यहां के किसानों को ठोस आमदनी होती थी। जिससे वह बेटी की शादी करने से लेकर बच्चे को पढ़ाने तक की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर पाते थे।

भगत सिंह और स्वर्गीय विश्वनाथ राय के सपनों का समाज मजदूरों और किसानों के राज के रूप में ही स्थापित हो सकता है। विश्वनाथ राय की पूरी जिंदगी समाज के लिए थी। उनका मानना था कि पूंजीवाद से दुनिया खुशहाल नहीं हो सकती। सन् 1962 में देवरिया में विश्वनाथ राय जी ने जवाहरलाल नेहरू के साथ जनसभा को संबोधित करते हुए बढ़ती असमानता के खिलाफ बोलते हुए कहा था कि विश्व में मानव द्वारा मानव का शोषण तभी रुक पायेगा जब यह बढ़ती हुई असमानता रुकेगी।

लगातार चौथी बार सांसद बनने पर दो साल बाद 1969 में इंदिरा गांधी ने विश्वनाथ राय को अपने मंत्रीमंडल में जगह दी। उन्हें उस समय अहम माने जाने वाले श्रम, रोजगार एवं पुर्नवास मंत्री बनाया गया। कहा जाता है उस समय देश में लाखो की संख्या में शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान से आ रहे थे। उन्हे रोकने और पुर्नवास करने की जिम्मेदारी विश्वनाथ राय के मंत्रालय को दी गयी थी। उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

शिक्षा क्षेत्र के विस्तार में उन्होंने पैतृक गांव खुखुंदू में शिवाजी बाल विद्यालय, शिवाजी इंटर कॉलेज की स्थापना की। इसके अलावा भटनी, गौरी बाजार के देवगांव, सिसवा में इण्टर कालेज खोलवाने में अहम भूमिका अदा की।

2017 में पूर्व राष्ट्रपति स्व० प्रणब मुखर्जी ने अगस्त क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में महान स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद (1952-1977) विश्वनाथ राय पर केंद्रित पुस्तक ‘राष्ट्र निर्माण में विश्वनाथ राय का योगदान’ पुस्तक का दिल्ली के में कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विमोचन के दरम्यान कहा था कि, “विश्वनाथ राय ने सिर्फ स्वंतत्रा संग्राम में ही हिस्सा नहीं लिया, बल्कि स्वतंत्रता के बाद देश के निर्माण में भी अभूतपूर्व योगदान दिया। मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनके साथ काम करने का अवसर मिला।”

उन्होंने आगे कहा था कि भारत में एक ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल आया था। उस दौरान विश्वनाथ राय से रणबीर सिंह ने खेती के बारे में उनकी राय मांगी, जिसके जवाब में राय ने खेत की एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर फसल की पैदावार की जानकारी दी, जिसे देखकर ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के सदस्य चकित हो गए थे।

आजादी की लड़ाई में अहम योगदान, कई बार सांसद रहने और गन्ना किसानों, गरीबों की आवाज बार-बार संसद में उठाने वाले विश्वनाथ राय पर वर्ष 2006 में भारत सरकार ने 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया। यह टिकट तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा जारी किया गया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने डाक टिकट जारी करने के दरम्यान कहा कि,”मैं स्वर्गीय विश्वनाथ राय की स्मृति में एक डाक टिकट जारी करने के साथ खुद को जोड़ने के लिए एक बड़ा सम्मान समझता हूं। वह एक अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी, एक सक्षम प्रशासक, एक कुशल सांसद और सबसे बढ़कर एक अच्छे इंसान थे।

वह उस वर्ष में जन्मे जब महात्मा गांधी द्वारा पहला सत्याग्रह आयोजित किया गया था, विश्वनाथ जी स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से प्रभावित थे और अपने छात्र जीवन से ही एक सैनिक के रूप में इसमें शामिल हो गए थे। उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में समय के साथ विकसित हुए विचारों और आदर्शों का आकर्षक मिश्रण है। उनका राजनीतिक जीवन विदेशी शासन के खिलाफ उग्रवादी राष्ट्रीय कार्रवाई में एक भागीदार के रूप में शुरू हुआ। हालाँकि, उन्होंने संघर्ष के गांधीवादी रूपों को अपनाने के लिए स्नातक की उपाधि प्राप्त की और अहिंसा के अभ्यास के लिए गहराई से प्रतिबद्ध हो गए। वह महात्मा गांधी और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों के शिष्य थे। हमारे स्वतंत्रता संग्राम की विविध धाराओं ने उनके दिमाग पर प्रभाव डाला और उन्हें भारत की स्वतंत्रता के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया।

छात्र रहते हुए उन्होंने स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया, जो गहरे राष्ट्रवाद से प्रेरित था। जब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इंडियन यूथ लीग की स्थापना की, तो उन्होंने स्व० विश्वनाथ राय जी को उनकी सेवा और बलिदान की भावना से प्रभावित होकर कार्यकारी परिषद का सदस्य बनाया। उस क्षमता में श्री राय ने समाज के दलित वर्गों के उत्थान के लिए काम किया।

1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में उनकी भागीदारी, और जिस तरह से उन्होंने अपने कॉलेज में हड़ताल का आयोजन किया, उसने उनके महान संगठनात्मक क्षमताओं को दिखाया। उन्होंने इलाहाबाद में तिरंगा फहराया और गोलियों का सामना किया जिससे उनके दो दोस्तों की मौत हो गई। इसके बाद, उन्हें उस कार्य के लिए जेल में डाल दिया गया था। इसके बाद वे चंद्रशेखर आजाद द्वारा स्थापित हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गए। उनकी क्रांतिकारी कार्रवाई ने उन्हें एक खतरनाक दुश्मन बना दिया, जिसे तब गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया। उनके उत्साही राष्ट्रवाद और सेवा की क्षमता को स्वीकार करते हुए, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें इस तरह की उग्रवाद और हिंसक कार्रवाई को छोड़ने और अहिंसा के गांधीवादी मार्ग के करीब जाने के लिए प्रोत्साहित किया।

1952 से 1977 तक पच्चीस वर्षों तक लोकसभा के सदस्य के रूप में, वे एक सक्रिय सांसद रहे और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी देश की सेवा की। उन्हें लंबे समय तक संसद सदस्य के रूप में उनके प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा, विशेष रूप से कृषि और हमारे किसानों के लिए उनकी गहरी प्रतिबद्धता के लिए। मेरा मानना ​​​​है कि उन्होंने बागवानी में गहरी दिलचस्पी ली और 1960 के दशक में भी उनका विचार था कि अगर भारत में फलों की बेहतर पैदावार हो सकती है तो वह आसानी से खाद्यान्न की कमी से लड़ सकती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की शुरुआत करते हुए हमारी सरकार श्री विश्वनाथ राय के दूरदर्शी दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि दे रही है।

हमारा देश वास्तव में भाग्यशाली है कि हमारे पास स्व० विश्वनाथ राय जैसे नेता हैं जिनके पास न केवल कद था, बल्कि एक दूरदृष्टि और मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता थी जिसने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया। आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए इनकी आज और भी अधिक आवश्यकता है। ऐसे उत्कृष्ट व्यक्तित्व की स्मृति में डाक टिकट निकालने के लिए मैं डाक विभाग को धन्यवाद देता हूं। मुझे उम्मीद है कि यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के लोकाचार को फिर से खोजने और इसे एक नए परिप्रेक्ष्य में समझने के हमारे प्रयासों में योगदान देगा।”

1952 से 1977 तक लगातार तीन लोक सभा क्षेत्रों देवरिया, पडरौना व सलेमपुर से निर्वाचित संसद सदस्य रहने के बाद समाज सेवा को उन्होंने अपनी प्राथमिकता में रखा। स्व० विश्वनाथ राय जी की प्रतिमाएं उत्तराखण्ड समेत कई स्थानों पर लगी हैं। स्व० राय ने एक अलग पहचान बनाई थी। उनके निधन के समय उनके बैंक खाते में 35 हजार रुपये थे। इसके अलावा उनके पास पिता द्वारा छोड़ी गई अचल संपत्ति के अलावा क्रय और अर्जित की गई कोई संपत्ति नहीं थी। कुशीनगर एयरपोर्ट को उनके नाम पर करने की मांग स्थानीय लोगों द्वारा काफी अरसे से हो रही है। लेकिन ग्लैमर के इस दौर में हम त्याग करना, अपने त्यागों एवं बलिदानों के बदौलत हमें आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों को भूलते जा रहे हैं जो कि उचित नहीं है।

Comment:

betpark güncel giriş
betgaranti güncel giriş
kolaybet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
meritking giriş
virüsbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
meritking giriş
marsbahis giriş
meritking giriş
realbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark 2026
bets10 giriş
casinoroyal
casinoroyal
hititbet giriş
bettilt giriş
supertotobet giriş
supertotobet giriş
supertotobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
supertotobet giriş
supertotobet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
Betpark Giriş
Betpark Giriş
vaycasino giriş
trendbet
trendbet
betnano giriş
betnano giriş
betorder giriş
trendbet
trendbet
trendbet
trendbet
hitbet
betnano giriş
restbet giriş
restbet giriş
casinoroyal giriş
casinoroyal giriş
padişahbet giriş
padişahbet giriş
betlike giriş
betlike giriş
casinoroyal
casinoroyal
trendbet
trendbet
betnano giriş
setrabet
setrabet
timebet
timebet
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
ultrabet giriş
yakabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
roketbet
roketbet
timebet
timebet