*अधिवक्ता व शिक्षक वर्ग आर्य समाज से जुड़कर प्रचारित प्रसारित करे आर्य समाज की विचारधारा को*

लेखक, चिंतक और विधिवेत्ता देवेंद्र सिंह आर्य जी एडवोकेट के विधि व्यवसाय के सफल 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आर्य बंधु परिवार में आयोजित चार दिवसीय यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के अंतिम सत्र दिनांक 18 अप्रैल 2022 को समापनीय सभा की अध्यक्षता करते हुए मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हुई।
आर्य बंधु परिवार ने बहुत सुंदर सार्थक अनुष्ठान अपने आवास अंसल गोल्फ लिंक सोसायटी तिलपता चौक ग्रेटर नोएडा में स्थित महर्षि दयानंद वाटिका में आयोजित किया । जहां वेद व्याकरण दर्शनों के विद्वानों का समागम हुआ। समाज को सार्थक संदेश दिया। इसके लिए आर्य बंधु परिवार के चारों भाई प्रोफेसर विजेन्द्र सिंह आर्य , मेजर वीर सिंह आर्य, देवेंद्र सिंह आर्य व डॉ राकेश कुमार आर्य व समस्त संबंधी मित्रगण धन्यवाद अभिनंदन के पात्र हैं।
। अनुष्ठान की स्मृति स्वरूप आर्य बंधु परिवार ने उगता भारत यजुर्वेद पारायण यज्ञ विशेषांक के नाम से पत्रिका प्रकाशित करने का निश्चय किया है। वैदिक विचारधारा के प्रचार प्रसार की दृष्टि से यह अनोखी और सराहनीय पहल है ।
पत्रिका के अग्रिम सफल प्रकाशन के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरे पुत्र समान प्रिय डॉ राकेश कुमार आर्य व आर्य बंधु परिवार की इस प्रकार की पहल आर्य जगत के लिए निश्चय ही लाभकारी होगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
।। जनपद गौतम बुध नगर के आर्यजन मुझे प्रेम से दादा भीष्म के नाम से संबोधित करते हैं । मेरी वय 86 वर्ष की है। मैं आज भी पूरी सक्रियता से आर्य समाज की विचारधारा व ऋषि देव दयानंद के सिद्धांतों को प्रत्येक घर परिवार में स्थापित प्रचारित करने के लिए पूरी सक्रियता व उर्जा से प्रयासरत हूं। यह ईश्वर का ही आशीर्वाद है कि मेरे प्रेरणा स्रोत देव दयानंद ही हैं। उगता भारत की ठोस और सकारात्मक पहल के चलते प्रकाशित होने वाली पत्रिका में मेरा संदेश आप सभी आर्यजनों के लिए यही रहेगा कि हमें आर्य समाज की विचारधारा को अधिवक्ता व शिक्षक वर्ग के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाना चाहिए। अधिवक्ता व शिक्षक वर्ग विशेष तार्किक बुद्धि से युक्त होता है। प्रथम वर्ग न्याय से तो दूसरा वर्ग शिक्षा से जुड़ा हुआ है। आर्य समाज की वैज्ञानिक सार्वभौमिक, सार्वकालिक , तार्किक विचारधारा कैसे घर घर समाज में स्थापित हो, व्यापकता से इसके लिए ही हमारा आग्रह सदैव रहना चाहिए।
वेद सर्वोच्च धर्म ग्रंथ है। ईश्वर का उपदेश है । प्रत्येक मनुष्य मात्र के लिए ईश्वर का संदेश है। संसार एक दिन वेदों की ओर लौटेगा। महामारी, युद्ध ,वैश्विक आतंकवाद के दानव से केवल वेद की विचारधारा ही बचा सकती। मेरा यही शुभकामना संदेश है कि हमें देव दयानंद के पुरुषार्थ से समाज को परिचित लाभान्वित करना चाहिए और महर्षि दयानंद द्वारा लिखित साहित्य घर घर में होना चाहिए। सफल अनुष्ठान व पत्रिका प्रकाशन के लिए आर्य बंधु परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

*ऋषि अनुचर*
रामेश्वर सरपंच ग्राम जुनपत
तहसील दादरी जिला गौतम बुध नगर।

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