देश की दशा – दिशा और भाजपा की राजनीति की यात्रा

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 डॉ. राकेश मिश्र

1996 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिला, और इस चुनाव में भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी और देश भर में पार्टी का वोट शेयर 20.29 प्रतिशत हो गया था।

विचार और विचारधारा, संगठन और संघर्ष की सीढियों से चढ़ते हुए संसार का सबसे बड़ा राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी का आज 42 वां स्थापना दिवस है। 42 साल पहले आज ही के दिन यानि 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी तथा लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की थी। मूल रूप से वैचारिक दृष्टि से स्वतंत्र भारत को नई राजनीतिक दिशा देने के उद्देश्य से स्थापित भारतीय जनसंघ के सदस्यों ने मिलकर भाजपा का गठन किया और 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में भारतीय जनता पार्टी का विधिवत गठन हुआ। स्थापना के बाद पार्टी ने 1984 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था और तब से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी ने जो सफर तय किया है, वह संसार के लिए राजनीतिक पटल पर एक संघर्षपूर्ण, लेकिन सुखद सफर है। स्थापना से लेकर अब तक शुचिता और संघर्ष, इसका सोपान रहा है, त्याग और बलिदान इसकी नींव रही है, राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना संपत्ति रही है। चार दशक के सफर में 11 लोगों ने पार्टी का नेतृत्व प्रदान किया और हर किसी ने अपनी क्षमता से संगठन को गति दी। 

1984 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मात्र दो सांसद ही लोकसभा पहुंचे थे। आंध्र प्रदेश की हनमकोंडा लोकसभा सीट से चंदूपतला जंगा रेड्डी और गुजरात की मेहसाणा लोकसभा सीट से ए.के. पटेल पार्टी के लोकसभा में पहले सांसद थे। हालांकि इस चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के कारण उपजी सहानुभूति लहर के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई थी। 1984 में लोकसभा चुनाव में दो सीटों पर ही जीत के बावजूद पार्टी अपनी विचारधारा के साथ निरंतर बढती गई। कुछ ही समय में भारतीय राजनीति में अपना प्रमुख स्थान बना लिया। पार्टी ने तेजी से संगठन को मजबूत करने का काम किया और 1989 में भारतीय जनता पार्टी के 85 सांसद जीतकर आए और पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़कर 11.36 प्रतिशत तक पहुंच गया था। 1989 में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मध्यप्रदेश (उस समय छत्तीसगढ़ अलग नहीं था) से मिलीं। मध्य प्रदेश में पार्टी 27 सीटों पर जीत प्राप्त करने में कामयाब हुई। 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी बनी। 1991 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और मजबूती के साथ उभरी, 120 सीटों पर सफलता मिली। 1991 में भाजपा का मत प्रतिशत भी बढ़कर 20.11 प्रतिशत हो गया था। 1991 में अकेले उत्तर प्रदेश से भाजपा को 51 सीटें मिली थीं, इसके अलावा गुजरात में भी सीटें बढ़ीं थी और कर्नाटक, असम जैसे राज्यों में पार्टी के सांसद चुने गए थे।
1992 में अयोध्या आंदोलन हुआ था। देशभर में भारतीय जनता पार्टी का जनाधार बढ़ने लगा था और कई राज्यों में पार्टी की सरकारें बनना शुरू हुई थीं। 1996 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिला, और इस चुनाव में भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी और देश भर में पार्टी का वोट शेयर 20.29 प्रतिशत हो गया था, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा को सरकार बनाने का न्यौतादिया। 1998 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने समान विचारधारा वाले कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया। 1998 में भाजपा 182 सीटों पर जीत प्राप्त करने में कामयाब हुई और पार्टी का वोट शेयर भी 25.59 प्रतिशत तक पहुंचा। उस समय उत्तर प्रदेश से 57, मध्य प्रदेश से 30,बिहार से 20, गुजरात से 19, कर्नाटक से 13 और ओडिशा से 7 सीटें भाजपा को मिली थीं। केंद्र में फिर से अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग की सरकार बनी, हालांकि वह सरकार भी एक साल में विश्वास मत हार गई और देश को फिर चुनाव का सामना करना पड़ा। 1999 एक बार फिर से 13वीं लोकसभा के लिए चुनाव हुए और उस समय भी भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्रीय दलों कोज्यादा सीटें दी और खुद 339 सीटोंपर चुनाव लड़ा, 1999 के लोकसभा चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को 182 सीटेंमिलीं और पार्टी का वोट शेयर 23.75 प्रतिशत रहा। 1999 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली मजबूत सरकार बनी जो 2004 तक चली। सफलता के क्रम में भारतीय जनता पार्टी राज्य सभा में भी 101 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। वर्ष 2022 के चुनाव के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी राज्य सभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं 30 वर्ष बाद कोई पार्टी राज्य सभा में 100 से अधिक सीटें हासिल की।

“भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्षों की समयानुकूल संगठन शक्ति में भूमिका”
1. अटल बिहारी वाजपेयी (1980-1986): भारतीय राजनीति के युगपुरुष के रूप में स्थापित अटलजी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में जो लकीर खींची, उसने पार्टी को अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नई दिशा दिखाई।  उनके व्यक्तित्व का लाभ पार्टी को निरंतर मिलतारहा। उनकी लोकप्रियता शिखर पर थी, उनकी छवि अजातशत्रु की थी। 
2. लालकृष्ण आडवाणी (1986-1991): इस कालखंड में पार्टी ने चुनावी राजनीति में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। 1989 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा में 85 सदस्यों के साथ तीसरी बड़ी पार्टी बनकर भारतीय जनता पार्टी आई। साथ ही श्री राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन में भाजपा ने अपनी हिस्सेदारी निभाई, तो आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्‍या तक रथ यात्रा निकालकर देश में एक चेतना जगाई। 
3. डॉ. मुरली मनोहर जोशी (1991-1993): राम जन्मभूमि आंदोलन में पार्टी की सहभागिता बढती गई। जोशीजी के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा कन्‍याकुमारी से श्रीनगर तक निकालकर राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए पार्टी ने बहुत बड़ा आंदोलन का बिगुल फूंका। इसी कार्यकाल के दौरान अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ।  
4. लालकृष्ण आडवाणी (1993-1998): दूसरी बार अध्यक्ष बने तो देश की राजनीति में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय जी का त्याग फलीभूत होने लगा और लोकसभा चुनाव में पार्टी पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई। 
5. कुशाभाऊ ठाकरे (1998-2000): संगठन के महान शिल्पी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 1999 के लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल की और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पूर्णकालिक चलने वाली सरकार बनी। भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का विस्तार हुआ।
6. बंगारू लक्ष्मण (2000-2001): भाजपा की दक्षिण भारतीय राज्‍यों में विस्तार यात्रा जारी रही और संगठन मजबूत हुआ। 
7. के. जना कृष्णमूर्ति (2001–2002): दक्षिण भारत में भाजपा संगठन का प्रसार हुआ।
8. वेंकैया नायडू (2002- 2004): भाजपा का विस्तार जारी रहा। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपार सफलता मिली।   
9. लालकृष्ण आडवाणी (2004-2006): तीसरी बार भाजपा के अध्यक्ष बनने वाले पहले व्यक्ति हुए। पार्टी रजत जयंती समारोह देश भर में धूमधाम से मनाया गया व संगठन को अनेक मोर्चा गठन करविस्‍तार दिया। 
10. राजनाथ सिंह (2006–2009): पार्टी देश की राजनीति में निरंतर मजबूती हासिल करते हुए बढती रही। मोर्चा एवं प्रकोष्‍ठों के माध्‍यम से हर वर्ग को संगठन से जोड़ा गया। 
  
11. नितिन गडकरी (2009–2013): पार्टी प्रगति पथ पर अग्रसर रही। सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाती रही। देश में भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ती रही। लोकसभा में एक मजबूत विपक्ष की भूमिका का निर्वहन किया। 
12. राजनाथ सिंह (2013–2014): इसी कार्यकाल में पार्टी ने नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 282 सीटों पर जीत मिली, जो 1984 के बाद देश में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी एक दल को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला। 2014 में भाजपा को वोट शेयर बढ़कर 31.34 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
13. अमित शाह (2014–2020): यह कार्यकाल भाजपा की सफलता का शिखर काल रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटों पर जीत हासिल कीं और वोट प्रतिशत भी रिकॉर्ड 37.76 तक पहुंचा। इस दौरान पूर्वोत्तर भारत के छह राज्यों में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। भाजपा का प्रसार पूरे देश में हुआ और संगठन को ऐसी ताकत मिली कि वैचारिक आधार पर विरोधी दलों की लोकप्रियता बहुत नीचे पहुँच गई। सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल हुआ। पार्टी का संचालन दीनदयाल उपाध्याय मार्ग में नए केन्द्रीय कार्यालय में आरंभ हुआ। इनके कार्यकाल में पार्टी के संगठन को बूथ स्‍तर तक पहुंचाया गया। 
14. जगत प्रकाश नड्डा (2020 से अभी तक): इस कार्यकाल में कोरोना जैसी महामारी के दौरान पार्टी ने सेवा ही संगठन के मंत्र के साथ देश के लोगों के दिल में जगह बनाई। हाल के चार विधान सभा चुनाव में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत की। सरकार और संगठन में बेहतर समन्वय रहा। इस कार्यकाल में बिहार, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, गोवा, दिल्ली समेत कई राज्यों में विधायकों की संख्या में वृद्धि हुई। इस समय पूरे देश में सर्वाधिक विधायकों की संख्या भाजपा की है। वर्तमान में 1389 विधायक भाजपा के हैं।

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