अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2014

इको-फ्रेडली एवं जुट उत्पादों की खास मांग है राजस्थान पवेलियन में

                नई दिल्ली, 19 नवम्बर, 2014। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 34 वें भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में राजस्थान मंडप में इको-फ्रेडली उत्पादों को प्रशंसकों एवं ग्राहकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है और उनकी अपनी खासियत एवं विश्वनीयता के लिए भरपूर सराहना की जा रही है। मंडप में इस बार मेले की थीम ‘महिला उद्यमिता’ को ध्यान में रखकर स्टॉल्स पर उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया गया हैं

                पवेलियन में उदयपुर से आए महिला स्वंय सहायता समुह की संचालिका डॉ. शोभा ने बताया है कि हमारे सारे उत्पाद पर्यावरण की सुरक्षा के अनुरूप तैयार किए जाते है। इनमें मुख्य रूप से जुट के उत्पाद शामिल है। जुट से तैयार उत्पादों में कान्फ्रेस बैग, बोटल बैग, खरीददारी करने के लिए बैग एवं टिफिन बैग की खास रेंज उपलब्ध है। इन जुट के बैगों की कीमत 150 से 400 रूपये तक के बीच रखी गई है।

                डॉ. शोभा ने बताया कि उनकी महिला स्वयं सहायता समुह के लिए अनुसंधान का काम सेंटर फॉर रिसर्च एंड डवलमेंट युनिट द्वारा किया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य ‘स्वंय की पहल पर नवाचार एवं महिलाओं को सशक्त करना है। यह युनिट समुदाय आधारित एन.जी.ओ. एवं अन्य महिला स्वयं सहायता समुहों को मार्गदर्शन का काम करती है। डॉ. शोभा ने बताया कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त होने वाले धन का उपयोग हमारी संस्था मुख्य रूप से समुह की महिलाओं के उत्थान एवं विकास से जुड़ी गतिविधियों पर किया जाता है।

राजस्थान मंडप में हल्के वजन एवं गर्माहट के लिये पसंद की जा रही हैं जयपुरी रजाईयॉं

                नई दिल्ली, 18 नवम्बर, 2014। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाईयों कोे प्रशंसकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है और उनके हल्के वजन कोमलता एवं गर्माहट की खासियत के लिये भरपूर सराहना की जा रही है। मंडप में राजस्थानी रजाईयों की व्यापाक एवं भरपूर रेंज उपलब्ध हैं।

                राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाईयों के स्टॉल्स के के सम्बंध में मंडप के निदेशक श्री रवि अग्रवाल ने बताया कि जयपुरी रजाईयों का बुनकरों वंशानुगत व्यवसाय है और इसे वे पिछली कई पीढ़ीयों से करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर के जुलाहा सर्दी के मौसम में घरेलू उपयोग में आने वाले सभी प्रकार के उत्पादों को बनाते हैं, लेकिन रजाई बनाने में उन्हें विशेष योग्यता प्राप्त है। सर्दियों में दैनिक उपयोग के लिये रजाई की उच्च गुणवत्ता का उत्पादन उनकी विशेष पहचान है।

                श्री अग्रवाल ने बताया कि रजाईयों को बनाने के बेहतरीन सामग्री का उपयोग किया जाता है वजन में हल्की होने के बावजूद ये बहुत ही गर्म और आरामदायक होती है। इनको बनाने में उच्च श्रेणी की शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कपास का प्रयोग किया जाता है। साथ ही आधुनिक फैशनेबल एवं राजस्थानी डिजाइनों में इन्हें बनाया जा रहा है जिसे ग्राहकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों के लिये अलग-अलग आकृति और आकार में रजाईयां उपलब्घ हैं।

                उन्होंने बताया कि बनाई जा रही रजाईयॉं सादी, सारंग, फेंसी कपास, कढ़ाई, पिपली काम आदि रू.1000 से 18000 रू. तक की रेंज में उपलब्ध हैं। विशेष आदेश पर उच्चकोटी की विशेष कपास से बनाई गई रजाई को अंगूठी के अन्दर से निकाला जा सकता है। इसी प्रकार राजस्थान की शुद्ध कपास में पारंपरिक सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंट में विश्व प्रसिद्ध जयपुरी डबल बेड की रजाईयां भी बनाई जा रही हैं जो कि दर्शकों द्वारा काफी पसंद की जाती हैं। जयपुरी रजाई अपने कम वनज, कोमलता और गर्मी के लिये विशेषरूप से जानी जाती हैं।

                उन्होंने बताया कि इसके अलावा फाईवर और बनारसी जरी बॉर्डर पर सुंदर पुष्प डिजाईन और गहरे रंगों की रजाईयां भी बनाई जाती हैं। मंडप में जयपुरी सिल्क के बहुत ही गुणवत्ता के कॅवर भी उपलब्ध है जो कि दर्शकों को काफी पसंद आ रहे हैं।

                श्री अग्रवाल ने बताया कि जयपुरी रजाई बनाने की इस विशेष कला के लिये जयपुर के कई बुनकरों को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि राजस्थली का हमेशा प्रयास रहा है कि ग्राहकों को उत्पादनों से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त हो। हमें अपने ग्राहकों को अधिकतमक संतुष्टि े और उनकी सभी जरूरतों को पूरा करने में बहुत ही खुशी मिलती है।

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