“पंच कोष पंच प्राण” पर गोष्ठी सम्पन्न* *आनंदमय कोष आनंद से परिपूर्ण परमात्मा स्वरुप है-डॉ. सुषमा आर्या आयुर्वेदाचार्या*

गाजियाबाद,रविवार 12 सितम्बर 2021,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “पंच कोष पंच प्राण” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल में 279 वां वेबिनार था ।

मुख्य वक्ता डॉ. सुषमा आर्या आयुर्वेदाचार्य ने पंचकोष पंच प्राण विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारे शरीर के अंदर 7 अव्यव हैं स्थूल शरीर तो दिखाई देता है सूक्ष्म शरीर दिखाई नहीं देता। उन्होंने बताया कि अन्नमय कोष – अन्न तथा भोजन से निर्मित शरीर और मस्तिष्क है।
प्राणमय कोष – प्राणों से बना है।
मनोमय कोष – मन से बना है। …
विज्ञानमय कोष – अन्तर्ज्ञान या सहज ज्ञान से बना है।आनंदमय कोष – आनन्दानुभूति से बना है।
आत्मा की सर्वाधिक निकटता के कारण आनंद में कोष आनंद से परिपूर्ण परमात्मा स्वरुप है।
मानव शरीर में प्राण को 10 भाग में विभक्त माना गया है इनमें पांच प्राण और पांच उप प्राण है प्राणमय कोष इन्हीं 10 के सम्मिश्रण से बनता है।
पांच मुख्य प्राण 1,अपान 2,समान 3, प्राण 4,उदान और 5, व्यान। उपप्राणों को 1,देवदत्त 2,वृकल,3, कूर्म,4 नाग,5,धनंजय नाम दिया गया है। शरीर क्षेत्र में इन प्राणों के क्या क्या कार्य हैं ?इसका वर्णन आयुर्वेद शास्त्र में इस प्रकार किया गया है। अपान मलों को बाहर फेंकने की शक्ति में संपन्न है,वह अपान है। समान जो रसों को ठीक तरह यथा स्थान ले जाता और वितरित करता है, वह समान है। प्राण जो श्वास आहार आदि को खींचता है और शरीर में बल संचार करता है, वह प्राण है। उदान अर्थात जो शरीर को उठाए रहे कड़क रखें गिरने ना दे वह उदान है।व्यान जो संपूर्ण शरीर में सम्व्याप्त है वह व्यान है। रक्त संचार, श्वास प्रश्वास ज्ञान-तंतु आदि माध्यमों से यह सारे शरीर पर नियंत्रण रखता है। पांच उपप्राण इन्हीं पांच प्रमुखों के साथ उसी तरह जुड़े हुए हैं जैसे मिनिस्टरों के साथ सेक्रेटरी रहते हैं प्राण के साथ नाग, अपान के साथ कूर्म, सामान के साथ कृकल, उदान के साथ देवदत्त और व्यान के साथ धनंजय का संबंध है नाग का कार्य वायु संचार, डकार, हिचकी,गुदा वायु कूर्म का नेत्रों के क्रियाकलाप, कृकल का भूख प्यास, देवदत्त का जम्भाई अंगड़ाई, धनंजय को हर अव्यव की सफाई जैसे कार्यों का उत्तरदाई बताया गया है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि गम्भीर विषय को सरल ढंग से समझाया है ।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि अष्टांग योग द्वारा ही अंतर्मन में प्रभु साक्षात्कार सम्भव है।

मुख्य अतिथि प्रेम हंस (ऑस्ट्रेलिया) व अध्यक्ष सोनल सहगल ने भी कहा कि यम,नियम आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार, धारणा,ध्यान और समाधि को जीवन में उतारने पर बल दिया।

गायिका प्रवीण आर्या,रजनी गर्ग, रजनी चुघ,दीप्ति सपरा,संतोष चावला, रविन्द्र गुप्ता,ईश्वर देवी, प्रतिभा खुराना, नरेश खन्ना, कुसुम भंडारी, वीरेन्द्र आहूजा,मधु खेड़ा आदि ने मधुर भजन सुनाये।

इस अवसर पर मुख्य रूप से श्री देवेन्द्र हितकारी सांसद प्रतिनिधि डा अनिल अग्रवाल ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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