मोदी और पाकिस्तान की स्थिति

हर देश की शासकीय नीतियां कुछ इस प्रकार बनायी जाती हैं कि उनसे उसका पड़ोसी देश उस पर हावी न होने पाए और वह अपने देश की सीमाओं के भीतर पूरी तरह शांति-व्यवस्था बनाये रखकर विकास की राह पर चलता रहे। पर पाकिस्तान की नीतियां इनसे इतर रही हैं। उसे अपने देश की नीतियों का निर्धारण करते समय अन्य देशों की भांति नीति निर्धारण का यह अनुशासित और सधा-सधाया अंदाज कभी रास नही आया। उसने कभी नही सोचा कि वह भारत के प्रति ऐसी नीति अपनाये कि भारत उस पर हावी न होने पाए, अपितु उसने वैश्विक राजनीति में प्रत्येक देश की विदेश नीति के इस सिद्घांत का अतिक्रमण करते हुए भारत के प्रति ऐसी नीति अपनायी कि भारत कभी भी विकास ना कर पाए, एक समर्थ देश के रूप में विश्व मानचित्र पर अपना स्थान ना बना पाए और जैसे भी हो उसका विनाश कर दिया जाए। ”हंसके लिया पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिंदुस्तान” भारत के प्रति उसकी विदेश नीति का यही आधारभूत तत्व रहा है। जहां तक उसकी अपनी भीतरी, नीतियों का प्रश्न है तो वहां भुखमरी और लोगों की आर्थिक तंगी इस सीमा तक है कि बहुत ही विस्फोटक स्थिति इस देश की है। अपने देश की भीतरी व्यवस्था से देश की जनता का ध्यान हटाये रखने के लिए भी पाकिस्तान भारत के प्रति आक्रामक  रहा है, और यह दिखाता रहा है कि भारत से उसकी एकता और अखण्डता को गंभीर खतरा है। भारत के साथ समस्या ये रही है कि यहां के नेतृत्व ने और विशेषत: कांग्रेस ने पहले दिन से ही यह संदेश और संकेत देने का प्रयास किया है कि पाकिस्तान चाहे हमसे भले ही शत्रुता मानता हो, पर हम उसे अपना मित्र ही मानते हैं। गांधी जी के शब्दों में तो उसे ‘छोटा भाई’ माना गया। इस ‘छोटे भाई’ के अक्षम्य अपराध से बड़े भाई ने अपनी बाजू कटवा ली अर्थात देश का बहुत बड़ा भाग मजहब के नाम पर अलग देश के रूप में इसे दे दिया। फिर भी यह नही माना तो फिर सिर कटवाने तक का सौदा कर लिया और भारत में कश्मीर के पूर्ण विलय के उपरांत भी नेहरूजी ने कश्मीर का बहुत बड़ा भाग पाकिस्तान को हड़प लेने दिया। बाद में छोटे भाई की जिद का ‘मान रखते हुए’ कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय समस्या मान लिया।वक्त वह भी आया जब छोटे भाई ने बड़े भाई के दिल पर आघात किया और इस पर आक्रमण बोल दिया। आक्रमण भी एक बार नही तीन बार बोला-1947, 1965 और 1971 में। 1971 में छोटे भाई की सेना को बड़े भाई ने गिरफ्तार करके भी फिर छोड़ दिया कि कोई बात नही आखिर ‘छोटा भाई’ है। छोटे भाई ने बड़े भाई की उदारता का फिर लाभ उठाया और जो लोग इस भारत देश में विपक्ष में रहकर कांग्रेस की उदारता को कोसते रहे, और ये कहते रहे कि पाकिस्तान के प्रति उदारता का नही, अपितु कठोरता का प्रदर्शन करो जब वही लोग अटल सरकार के रूप में सत्ता में आये तो उन्हें भी इस देश ने इतना जलील किया कि उनको कुछ आतंकवादी ‘सरकारी दामाद’ बनकर हवाई जहाज से अफगानिस्तान जाकर छोड़कर आने पड़े। सारा देश अपना मन मसोसकर रह गया। ‘हार नही मानूंगा, रार नही ठानूंगा’-कहने वाले अटलजी ने रार तो नही ठानी पर हार अवश्य मान ली।उससे भी दुखदायक स्थिति तब आयी जब देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे सरदार पटेल के अवतार के रूप में स्वयं को स्थापित करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना की मजार पर जाकर सिर टेक दिया और उन्हें गांधी का ‘छोटा भाई’ बनाकर रख दिया।

अब देश में राष्ट्रवाद की बयार बह रही है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में राष्ट्र, राष्ट्रीय मुद्दे और राष्ट्रीय अस्मिता को पहली बार चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा स्वीकार किया जा रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रवादी बयार में देश में भाषा, जाति, संप्रदाय, और क्षेत्रवाद की बहुत ऊंची-ऊंची खड़ी दीवारें यदि मिटी नही हैं तो उनका कद बहुत सीमा तक छोटा अवश्य हुआ है। तब पाकिस्तान का भारत के प्रति सावधान होना आवश्यक है। छोटे भाई के लिए यह कड़वा अनुभव है कि बड़ा भाई अब जाग रहा है। इसलिए मोदी को सत्ता शीर्ष की ओर बढ़ते देखकर पाकिस्तान को पसीने आ रहे हैं। कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के विषय में मोदी ने जो स्पष्ट और कड़ा रूख लिया है उससे उनके ‘मजबूत व्यक्तित्व’ का साफ पता चलता है। जिसका स्वागत देश की राष्ट्रवादी जनता ने किया है और उनके विरोधियों को स्पष्ट संदेश चला गया है कि पटेल की मूर्ति बनाया जाना केवल एक ‘राजनीतिक स्टंट’ नही है बल्कि उसके पीछे कुछ कारण हैं और वो यही कि पटेल आज हमारी राष्ट्रीय राजनीति और विदेशनीति का आदर्श बन रहे हैं, और छोटे भाई को हर हाल में माफ करने वाले लोग अब कब्र में जा रहे हैं। पटेल की विचारधारा का उत्थान और देश को कमजोर करने वाली किसी भी विचारधारा का अवसान होने का यह अदभुत संगम है। जिससे पाकिस्तान का विचलित होना स्वाभाविक है। उसे एक मजबूत और स्वाभिमानी भारत का बनता स्वरूप विचलित कर रहा है। इसलिए मोदी को सत्ता की ओर बढ़ता देखकर पाकिस्तान में राजनीतिज्ञों की वही हालत हो रही है जो एक बिल्ली को आती देखकर चूहों की होती है।वास्तव में देश के लिए यह सुखद अनुभूति के क्षण हैं। सत्ता पर वही व्यक्ति बैठने का अधिकारी होता है जिसके बैठने से शत्रु विचलित हो उठे और अपनी चालों को चलना भूल जाएगा। आगाज अच्छा है तो परिणाम भी अच्छा ही होगा।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş