किसानों के आत्‍महत्‍या का समाधान क्‍या है

बाबा रामदेव

kisan bhukha

मित्रो इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी की पूरे देश का पेट भरने वाला किसान खुद भूख से मरता है आत्मह्त्या करता है ! उसके घर की छत टपकती है फिर भी वो बारिश का इंतजार करता है ! हर वर्ष हमारे देश मे 70 हजार किसान आत्महत्या कर रहे है लेकिन हमारे कृषि प्रधान देश मे ऐसा क्यों हो रहा है ?? और इसका समाधान क्या है ?? इस पोस्ट के माध्यम से हम इस समस्या का मूल कारण और समाधान की बात करेंगे !
देश मे किसानो की आत्महत्या के पीछे का सबसे कारण ये है की प्रतिदिन उनकी खेती का खर्चा बढ़ता जा रहा है और आमदनी कम होती जा रही है जिससे किसान कर्जे मे डूब रहा है और आत्महत्या कर रहा है ! खेती करने के लिए किसान अपने खेत रसायानिक खाद और कीटनाशक डाल रहा है !!
जिसको यूरिया,DAP,superphosphate,कहते है और कीटनाशको को एंडोसल्फान ,मेलाथ्यान आदि कहते है ! तो ये विदेशी कंपनियो के कीटनाशक और रासायनिक खाद किसानो के बीच मे सबसे ज्यादा खरीदे जाते है और हर साल 4 लाख 80 हजार करोड़ रूपये ये कंपनियाँ हमारे देश के किसानो से लूटती है ! 4 लाख 80 हजार करोड़ को 100 करोड़ की जनता मे कैश बांटे तो प्रति व्यकित 4800 रूपये आएंगे सोचो कितनी बड़ी लूट होती है रासायनिक खाद और कीटनाशक से !
राजीव भाई ने 12 साल कर्नाटक ,महाराष्ट्र मे हजारो किसानो के साथ काम किया और उन किसानो ने राजीव भाई के कहने पर यूरिया DAP छोड़ कर गोबर का खाद डालना शुरू किया ! और जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 20 से 25 मीट्रिक टन गन्ना होता था आज उस किसान के खेत मे एक एकड़ मे 90 से 100 टन गन्ना होता है !
जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 12 क्विंटल गेहूं होता था आज उस किसान के खेत मे गोबर की खाद डालने से एक एकड़ मे 20 से 22 क्विंटल तक गेहूं होता है !
जिस किसान के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 3 कवींटल कपास होती है आज उस किसान के खेत मे गोबर की खाद डालने से एक एकड़ मे 7 क्विंटल कपास होती है !
ऐसे एक नहीं हजारो किसान है महाराष्ट्र मे ,कर्नाटक मे और थोड़ा आगे जाओ छतीसगढ़ मे जिनहोने अपने खेतो मे यूरिया DAP छोड़कर गोबर की खाद डालना शुरू किया ! गोबर का खाद डालने से उत्पादन ज्यादा होता यूरिया DAP की तुलना मे !
गोबर की खाद से क्यों उत्पादन ज्यादा होता है ?? उसे जानना बहुत जरूरी है ये बात आप समझ जाए भारत का हर किसान समझ जाए पूरा भारत दुबारा खुशहाल हो जाएगा !
गोबर की खाद जब हम खेत मे डालते है तो होता क्या है ?? दरअसल गोबर जो है वो बहुत तरह के जीव जन्तुओ का भोजन है और यूरिया भोजन नहीं जहर है आपके खेत मे एक जीव होता है जिसे केंचुआ कहते हैं केंचुआ को कभी पकड़ना और उसके ऊपर थोड़ा यूरिया डाल देना आप देखोगे केंचुआ तरफना शुरू हो जाएगा और तुरंत मर जाएगा ! जब हम टनों टन यूरिया खेत मे डालते है करोड़ो केंचुए मार डाले हमने यूरिया डाल डाल के !!
केंचुआ करता क्या है ?? केंचुए मिट्टी को नरम बनाते है पोला बनाते है उपजाऊ बनाते हैं केंचुए का कम क्या है ?? ऊपर से नीचे जाना ,नीचे से ऊपर आना पूरे दिन मे तीन चार चक्कर वो ऊपर से नीचे ,नीचे से ऊपर लगा देता है ! अब जब केंचुआ नीचे जाता तो एक रास्ता बनाते हुए जाता है और जब फिर ऊपर आता है तो फिर एक रास्ता बनाते हुए ऊपर आता है ! तो इसका परिणाम ये होता है की ये छोटे छोटे छिद्र जब केंचुआ तैयार कर देता है तो बारिश का पानी एक एक बूंद इन छिद्रो से होते हुए तल मे जमा हो जाता है !
मतलब water recharging का काम पूरी दुनिया मे कोई करता है तो वो केंचुआ है जो यूरिया के कारण मर जाता है इसलिए यूरिया डालना मतलब किसान के लिए आत्मह्त्या करने के बराबर है ! जिस किसान के खेत मे यूरिया डालेगा तो केंचुआ मर जाएगा केंचुआ मर गया तो मिट्टी मे ऊपर नीचे कोई जाएगा नहीं तो मिट्टी कठोर होती जाएगी कड़क होती जाएगी मिट्टी और रोटी के बारे एक बात कही जाती है की इन्हे फेरते रहो नहीं तो खत्म हो जाती है रोटी को फेरना बंद किया तो जल जाती है मिट्टी को फेरना बंद करो पत्थर जैसी हो जाती है !
मिट्टी को फेरने का मतलब समझते है ?? ऊपर की मिट्टी नीचे ! नीचे की ऊपर !ऊपर की नीचे ,नीचे की ऊपर ये केंचुआ ही करता है ! केंचुआ किसान का सबसे बड़ा दोस्त है ! एक केंचुआ साल भर जिंदा रहे तो एक वर्ष मे 36 मीट्रिक टन मिट्टी को उल्ट पलट कर देता है और उतनी ही मिट्टी को ट्रैक्टर से उल्ट पलट करना पड़े तो सौ लीटर डीजल लग जाता है 100 लीटर डीजल 4800 का है ! मतलब एक केंचुआ एक किसान का 4800 रूपये बचा रहा है ऐसे करोड़ो केंचुए है सोचो कितना लाभ हो रहा है इस देश को !
इसलिए गोबर खाद डालने से फाइदा क्या होता है ? रसायनिक खाद डालो केंचुआ मर जाता है गोबर का खाद डालो केंचुआ ज़िंदा हो जाता है क्योंकि गोबर केंचुए का भोजन है केंचुए को भोजन मिले वह अपनी जन संख्या बढ़ाता है और इतनी तेज बढ़ाता है की कोई नहीं बढ़ा सकता भारत सरकार कहती है हम दो हमारे दो ! केंचुआ नहीं मानता इसको !एक एक केंचुआ 50 50 हजार बच्चे पैदा करके मरता है एक प्रजाति का केंचुआ तो 1 लाख बच्चे पैदा करता है ! तो वो एक ज़िंदा है तो उसने एक लाख पैदा कर दिये अब वो एक एक लाख आगे एक एक लाख पैदा करेंगे करोड़ो केंचुए हो जाएंगे अगर गोबर डालना शुरू किया !!
ज्यादा केंचुआ होंगे तो ज्यादा मिट्टी उलट पलट होगी तो फिर छिद्र भी ज्यादा होंगे तो बारिश का सारा पानी मिट्टी मे धरती मे चला जाएगा ! पानी मिट्टी मे चला गया तो फालतू पानी नदियो मे नहीं जाएगा ,नदियो मे फालतू पानी नहीं गया तो बाढ़ नहीं आएगी तो समुद्र मे फालतू पानी नहीं जाएगा इस देश का करोड़ो करोड़ो रूपये का फाइदा हो जाएगा !! इसलिए आप किसानो को समझाओ की भाई गोबर की खाद डालो एक ग्राम भी उत्पादन कम नहीं होगा !!
लेकिन गोबर की खाद डालने का तरीका क्या है वो आप जान लो !!
अभी किसान क्या करता है कचड़ा डालने वाले घूरे मे गोबर जमा कर देता है वो साल भर सूखता रहता है उसकी पूरी ताकत निकल जाती वो कोई लाभ नहीं देता ! तो गोबर को हमेशा गीला डालना चाहिए ताजा डालना चाहिए !! आप ये फार्मूला लिख लो एक एकड़ खेत के हिसाब से !!
जैविक खेती का एक आसान तरीका.
जैविक खाद ( एक एकड़ खेत के लिए ) कैसे बनाये !
एक पलास्टिक के ड्रम में नीचे लिखी पाँच चीजों को आपस में मिला लें.
10 किलो गोबर ( देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
10 लीटर मूत्र (देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
1 किलो गुड़ ( कैसा भी चलेगा, जो सड़ गया हो आपके उपयोग का ना हो तो वो ज्यादा अच्छा है )
अब इसमे 1 किलो पिसी हुई दाल या चोकर (कैसा भी चलेगा, आपके उपयोग का ना हो तो ज्यादा अच्छा )
और अंत मे डालनी है 1 किलो मिट्टी किसी भी पुराने पेड़ के नीचे की पीपल, बरगद …. (पीपल ,बरगद के पेड़ 24 घंटे आक्सीजन छोड़ते है ! जिससे जीवाणुओ की संख्या ज्यादा होगी यही जीवाणु खेत को चाहिए !!
तो कुल 5 चीजे हो गई !
1 ) 10 किलो गोबर
2) 10 लीटर मूत्र
3) 1 किलो गुड
4) 1 किलो दाल
5) 1 किलो मिट्टी
इन पांचों को आपस मे मिला दो हाथ से या किसी डंडे से ! मिलाने मे तकलीफ आए तो थोड़ा पानी डाल दो पानी थोड़ा सा ही डालना है !! अब इसे 15 दिन तक छाँव में रखो,पेड़ की छाँव के नीचे ज्यादा बढ़िया ! धूप मे बिलकुल मत रखना !और रोज सुबह शाम एक बार इसे मिला दो. 15 दिन बाद ये खाद बन कर तैयार हो जाएगी इस खाद करोड़ो करोड़ो सूक्ष्म जीवाणु होगी वो हमने जो मिट्टी डाली ना उसी के जीवाणु अपनी संख्या बढ़ाएँगे ! जिस दिन मिट्टी डाल कर रखा था अगर उस दिन 1 लाख जीवाणु है तो 15 दिन बाद इनकी संख्या 100 करोड़ को पार कर जाएगी !!
अब इस खाद (जीवाणु घोल ) को खेत मे डालना है और डालने से पहले इसमे पानी मिलना है पानी कितना मिलना है जितना गोबर था उसका 10 गुना पानी ! 10 किलो गोबर था तो 100 लीटर पानी !! तो पानी मिलाने के बाद ये पूरा घोल तैयार हो जाता है और इसे बस अब एक एकड़ के खेत मे छिड़कना है ! जैसे मिट्टी दबाने के लिए हम पानी छिड़कते है वैसे छिड़कना है !
आप इसे छिड़क देंगे तो ये जीवाणु मिट्टी मे मिल जाएंगे और मिट्टी मे सारा खेल खेलने का काम ये जीवाणु ही करते हैं ! आपको पता है ये जीवाणु क्या कम करते है ?
पोधे की जड़ को नाइट्रोजन चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
पोधे की जड़ को कैल्शियम चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
पोधे की जड़ को आइरन चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
अर्थात पोधे को जितने सूक्ष्म तत्व चाहिए और पोधे के फल से होते हुए हमारे शरीर को भी चाहिए तो ये जीवाणु ही उपलब्ध करवाते हैं ! तो जिस पोधे को जीवाणु ज्यादा मिलेंगे तो उसकी बढ़त ज्यादा होगी बढ़त ज्यादा होगी तो फल ज्यादा होगा फल ज्यादा होगा तो उत्पादन ज्यादा होगा !
अब समय लिख लो इसको कितनी बार कैसे कैसे डालना है ! सब्से अच्छा तरीका है की बीज डालने से पहले जब आप खेत की जुताई करे ठीक उसके अगले दिन डाल दीजिये !! फिर बीज बो दिये जिये और बीज बोने के 21 दिन बाद फिर डाल दो ! आप मोटी सी बात याद रखो हर 21 दिन बाद डाल दो !! मान लो एक फसल 4 महीने की है तो 5 बार डालना पड़ेगा !!
इसको छिड़कने की कुल 4 विधि है !!
1) पहली ये की सीधे डब्बा लो भरो और छिड़क दो !! भरो और छिड़क दो !!
अब आप कहोगे खेत बड़ा है तो क्या करे !
तो दूसरा तारीक है खेत मे पानी लागाते है तो पानी मे डाल दो नाली मे से पानी जा रहा है एक टंकी मे इसको भरकर टूटी खोल दो टपक टपक पानी के साथ चला जाएगा
तीसरा तरीका ये है अगर आपके पास जानवरो की संख्या ज्यादा है तो गोबर ज्यादा होगा थोड़ा गोबर तो खाद बनाने मे काम आ गया बाकी गोबर का क्या करोगे तो बाकी गोबर अगर सूखा हुआ है तो उसे भी 15 दिन बाद 200 लीटर पानी के साथ इसी ड्रम मे डाल दो फिर उस गोबर के लड्डू बना लो खेत मे छिड़क दो !
एक और तरीका है खेत की मिट्टी खोद लो मिट्टी मे ये पूरा घोल मिला दो मिट्टी गीली हो गई इसके लड्डू बना खेत मे छिड़क दो !!
अब अगर जानवर घर के है तो गोबर ,गौ मूत्र फोकट का ! गुड़ वो लेना है जो
बिलकुल सड़ा हुआ हो जिसे जानवर भी ना खाये पानी तो पहले से फोकट का है कुछ दाल आदि लेने का खर्चा करना पड़ेगा वो भी अगर किसान दाल की खेती करता है तो वो भी मिल जाएगी तो कुल मिलाकर खाद बनाने का खर्चा शून्य हो जाएगा !! मेहनत लगेगी लेकिन पूंजी मे पैसा कम से कम खर्च होगा !!
और ये खाद जो तैयार होगी उसमे जबर्दस्त कवालेटी quality है क्यों इसमे कैल्शियम भरपूर ,आइरन भरपूर ,माइग्निशियम भरपूर , और ऐसे 18 पोषक तत्व है जो मिट्टी को चाहिए वही लेकिन यूरिया मे नहीं है DAP मे ये नहीं है यूरिया मे कैल्शियम नहीं है DAP मे कैल्शियम नहीं है
कैल्शियम सबसे मुख्य आधार है मिट्टी के लिए क्योंकि खेत मे कैल्शियम होगा तो पोधें मे होगा ,पोधे मे होगा तो फल मे होगा ,फल मे होगा तो हमारे भोजन मे होगा
हमारे भोजन मे होगा तो शरीर मे होगा शरीर मे होगा तो हड्डियाँ मजबूत हड्डियाँ मजबूत तो शरीर मजबूत तो ये सारा साइकिल गोबर की खाद से ही मिलेगा यूरिया DAP से तो मिलने वाला ही नहीं है ! तो आप किसानो को ये समझाएँ की गोबर का खाद डालें भरपूर उत्पादन होगा खर्चा शून्य आएगा !! अगर पहले वर्ष थोड़ा उत्पादन कम भी हुआ तो तो खाद जो मे खर्चा शून्य हुआ तो वो बराबर हिसाब बैठेगा क्यों यूरिया की खाद के लिए हजारो हजारो रुपए खर्च करने पड़ते है !! और हर साल उत्पादन बढ़ता जाएगा ! 10 -12 साल बाद तो 100 % की बढ़ोतरी हो जाती है !! दोगुना लाभ ! बस हमेशा एक बात याद रखे जो गोबर लेना है वो देशी गाय का ही होना चाहिए ! विदेशी जर्सी गाय वाले से लाभ नहीं मिलेगा
अब फसल को कभी कीड़ा लग जाए तो उसका फार्मूला भी लिख लीजिये वैसे फसल को कीड़ा यूरिया DAP से आदि डालने से ही ज्यादा लगता है !!
जैविक जंतु नाशक ( एक एकड़ खेत के लिए )
एक ड्रम में नीचे लिखी चीजों को मिला कर उबालें !
20 लीटर मूत्र ( गाय का, बैल का, या भैंस का )
2 से 3 किलो नीम के पत्ते या निम्बोली पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो सीताफल के पत्ते पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो आकड़ा ( आक, अकौवा, अर्क मदार ) के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो धतुरे के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो बेल पत्र के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
और इसमे खूब लाल तीखी मिर्च डाल दो 300 -400 ग्राम ! आधा किलो लहसुन डाल दो ! और एक मोटी सी बात याद रखे जिन जिन पत्तों को गाय नहीं खाते और आपके गाँव मे उपलब्ध है वो सब इसमे डाल दो !!
अब इस घोल को 20 लीटर देशी गाय के मूत्र मे डाल कर उबाले ! खूब उबल जाये तो इसे ठंढा करके छान लें ! अब इसे बोतल में या किसी और बर्तन में रख लें !
# अब जब भी इसका इस्तेमाल करना हो तो इसमें 200 लीटर पानी मिला कर किसी भी फसल पर छिड़के !
छिड़कने के दिन के अंदर सभी कीट मर जायेंगे ! एक भी पैसे का खर्चा नहीं होगा बाजार से कुछ नहीं लाना पड़ता !!
तो मित्रो ये फार्मूला अगर आप भारत के एक एक किसान तक पहुंचा दें तो इस देश का 4 लाख 80 हजार करोड़ विदेश जाने से बच जाएगा !! लाखो किसानो का उत्पादन खर्च कम हो जाएगा ! उनकी आय बड़ जाएगी उनको कर्ज नहीं लेना पड़ेगा ! लाखो किसान आत्मह्त्या करने से बच जाएंगे ! और जहीरले चावल ,गेहूं ,चना फल हम नहीं खाएँगे तो हम ग्ंभ्रीर बीमारियो से बचेंगे ! लाखो करोड़ हर वर्ष जो दवा कंपनियाँ लूट रही वो बच जाएगा !!
इस फार्मूले से खेती करने मे कोई समस्या आए तो इस नंबर पर संपर्क करें !
,08090012349,09866548278, 09922419334

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