वैदिक साहित्य में जल-संरक्षण एवं प्रबंधन के कुछ उपाय

डा. शिवानी
पंचमहाभूतों में से जल चतुर्थ महाभूत माना जाता है। जहां जल जीवन के लिए उपयोगी और अनिवार्य है, वही समस्त प्रगति का संवाहक भी है। वैदिक साहित्य का न्यूनतम 50 प्रतिशत भाग जलतत्व का किसी न किसी रूप में उल्लेख करता है। वेद में जितना वर्णन इन्द्र या जल के अधिष्ठाता देवताओं का हुआ है, उतना शेष देवताओं का नही हुआ है। मत्स्य के समान जल प्रत्येक प्राणी के जीवन के लिए अनिवार्य तत्व है। व्यवहार और विज्ञान की दृष्टि से जलतत्व का अनेक रूपों में उपयोग होता था। जलतत्व का अनेक रूपों में उपयोग होता था। जलत्व का अनेक रूपों में उपयोग होता था तलतत्व के सम्यक ज्ञान से अंतरिक्षलोक और द्युलोक के बहुत से जटिल और अनसुलझे रहस्य भी उद्घाटित हो सकते हैं। वैदिक साहित्य में जल संरक्षण एवं उसका प्रबंधन ही इस शोध पत्र का उद्देश्य है।
जल की उत्पत्ति
अथर्ववेद के अनुसार जल में अग्नि (ऑक्सीजन) और सोम (हाइड्रोजन) दोनों हैं। वेदों में ऑक्सीजन के लिए, अग्नि, मित्र, वैश्वानर अग्नि और मातरिश्वा आदि शब्दों का प्रयोग हुआ है। (हाइड्रोजन) के लिए सोम, जल आप, सलिल वरूण आदि शब्दों का प्रयोग हुआ है। अथर्ववेद में कहा गया है कि जल में मातरिश्वा वायु (ऑक्सीजन) प्रविष्ठ है। ऋग्वेद के अनुसार जल में वैश्वनार अग्नि विद्यमान है।
ऋग्वेद के मंत्र के अर्थ अनुसार-जल की प्राप्ति के लिए मैं पवित्र ऊर्जा वाले मित्र (ऑक्सीजन) और दोषों को नष्ट करने वाले वरूण (हाइड्रोजन) को ग्रहण करता हूं। यहां मित्र और वरूण शब्दों के द्वारा (ऑक्सीजन) और हाइड्रोजन) का निर्देश है, परंतु इसकी मात्रा का स्पष्ट संकेत नही है। जन का सूत्र है (॥२ह्र) विज्ञान के अनुसार हाइड्रोजन गैस के दो अणु (मोलिक्यूल) और ऑक्सीजन का एक अणु एक पात्र में रखकर उसमें विद्युत तरंग प्रवाहित करने पर जल प्राप्त होता है। ऋग्वेद के चार मंत्रों में कहा गया है कि एक कुंभ में मित्र और वरूण का रेत वीर्य (कण) उचित मात्रा में एक ही समय में डाला गया और उससे अगस्त्य और वसिष्ठ ऋषि का जन्म हुआ। इस कार्य के लिए विद्युत का प्रवाह छोड़ा गया। अगस्त्य और वसिष्ठ उर्वशी के विद्युत मन से उत्पन्न हुए हैं। अर्थात ये दोनों उर्वशी के मानस पुत्र हैं। अत: स्पष्ट होता है कि मित्र और वरूण से जल वसिष्ठ की उत्पत्ति हुई। अगस्त्य को कुंभज और वसिष्ठ को मैत्रावरूण कहा गया है। यजुर्वेद और शतपथ ब्राह्मण में बादलों को जलन का सूक्ष्म रूप कहा गया है।
जल का महत्व एवं उसके गुण :
मानव जीवन में जल का विशिष्ट महत्व है। जल सभी रोगों का इलाज है। यहां तक कि यह आनुवंशिक रोगों को भी नष्टï करता है। जल में सोमादि रसों को मिलाकर सेवन करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। चिकित्सा के लिए जल सर्वोत्तम होता है। गहराई से निकाला हुआ जल अत्युत्तम होता है। हिमालय से निकलने वाली नदियों का जल विशेष लाभकारी है। हृदय के रोगों में भी इसका प्रयोग करना चाहिए। बहता हुआ जल शुद्घ और गुणकारी होता है। यह मनुष्य को शक्ति और गति देता है। पौष्टिकता और कर्मठता के लिए शुद्घ जल का सेवन लाभकारी होता है। जल बलवर्धक है और शरीर को सुंदरता प्रदान करता है। जल ही सभी प्राणियों के जीवन का आधार है। जल का मुख्य गुण है पदार्थों को गीला करना और उसके दोषों को निकालना। विद्युत जल का प्रकाश है। पृथ्वी जल का आश्रय स्थान है। प्राण जल का सूक्ष्म रूप है।
मन जलीय तत्वों का समुद्र है। वाणी में सरसता और जीभ में आर्द्रता जल के कारण है। जल के कारण ही आंखों में तेज और दर्शन शक्ति है। मछली की तरह आंखें भी जल की प्रेमी हैं। अत: आंखों को जल का निवास स्थान कहा गया है। कानों को भी जल का सहवासी बताया गया है। कान में जल की सूक्ष्म मात्रा न होने पर बहरापन होता है। द्युलोक जल का निवास स्थान है, अंतरिक्ष में जल व्याप्त है। समुद्र जल का आधार है। समुद्र से ही जल भाप बनकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आता है जो कृषि के लिए अत्युत्तम माना गया है। सिकता रेत जल का ही उच्छिष्ट भाग है इसलिए जल को अन्न का कारण कहा गया है। तीनों लोकों की स्थिति का आधार जल ही है अर्थात जल, पृथ्वी, अंतरिक्ष और द्युलोक तीनों स्थानों पर व्याप्त है। अथर्ववेद में जल के पांचों गुणों का वर्णन है। 1. तपस-गर्म होना, गर्मी देना, ताप और संताप 2. हरस दोष या मल को दूर करना, स्वच्छता प्रदान करना 3. अर्चिस-तपाना, रगड़ से विद्युत उत्पादन,उत्तेजना देना। 4. शोचिस-प्रकाश देना, दाहकत्व और शोधकत्व। 5. तेजस-तेज, कांति, सौंदर्य, लावण्य और प्रसन्नता देना। ऋग्वेद में जल के तीन गुणों का विशिष्ट उल्लेख है। 1. मधुश्चुत:-मधु या मधुरता देने वाले। 2. शुचय: दोषों या मलों को निकालकर स्वच्छता प्रदान करने वाले।
3. पावकाङ दोषों को जलाने, शुद्घ करने और पवित्रता प्रदान करने वाले। अत: जल देवालय है।
जल संरक्षण के उपाय:
प्राकृतिक या अन्य स्रोतों से उत्पन्न अवांछित बाहरी पदार्थों के कारण जल दूषित हो जाता है वह विषाक्तता एवं सामान्य स्तर से कम ऑक्सीजन के कारण जीवों के लिए हानिकारक हो जाता है। तथा संक्रामक रोगों को फेेलाने में सहायक होता है। जल जीवन का प्रमुख साधन है। यह पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग घेरे हुए है। पृथ्वी का अधिकतर जल समुद्री है, जो खारा होने के कारण पीने लायक नही है। पृथ्वी पर जितना पानी है, उसका केवल तीन प्रतिशत ही शुद्घ है। जिस पर सारा संसार निर्भर है। अत: जल प्रदूषण नियंत्रण उपायों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक है।
1. मल के निष्कासन हेतु सीव्रेज की ठीक व्यवस्था।
2. कीटनाशक रसायनों का कम प्रयोग।
3. परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाना।
4. मृत जंतुओं को जल में न फेंकना।
ऋग्वेद में मानव के रक्षक पदार्थों में जल, औषधी, वन वृक्ष पर्वत और द्युलोक का उल्लेख है। इन पदार्थों केा हानि पहुंचाना, अपनी रक्षा को संकट में डालना है।
यजुर्वेद के अनुसार जल को दूषित न करो और वृक्ष वनस्पतियों को हानि न पहुंचाओ। अन्य मंत्र के अनुसार जल को शुद्घ रखो, पौष्टिक गुणों से युक्त करो तथा औषधियों को जल से सींचकर सुरक्षित रखो।
ऋग्वेद में कहा गया है कि हे परमात्मन हमें प्रदूषण रहित जल, औषधियां और वन दो। प्रदूषण रहित जल ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। नदियों आदि के जल को प्रदूषण मुक्त रखने का उपाय है-यज्ञ। यज्ञ की सुगंधित वायु जल के प्रदूषण को नष्ट करती है।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
betnano giriş
betnano giriş
betlike giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
betparibu
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş