शस्त्र से ही राष्टर की रक्षा होती है। यदि राष्टर शस्त्र विहीन है तो उसकी दुर्बलता जग हंसाई का कारण बन जाती है। हमने अपनी स्वतंत्रता को दूसरों की चेरी बनते देखा है। अपनी संस्कृति को दूसरों की आरती उतारते देखा है और अपने धर्म को दूसरों के जूते साफ करते देखा है सिर्फ अपनी सैनिक दुर्बलता के कारण। हमने शांति के लिए क्रांति से मुंह फेरने की गलती की तो भ्रांति के भ्रमजाल में फंसते ही चले गये और बहुत देर तक गुलामी के अपमानों को झेलकर हमने आजादी हासिल की। आजादी के बाद भी 1962 में हमने चीन से करारी हार देखी। तब हमारी आंखें खुलीं तो हमने जल (शांति) के साथ अग्नि (क्रांति) की अनिवार्यता को स्वीकार किया। आज भारत अपनी सैनिक क्षमताओं को निरंतर बढाता जा रहा है। उसकी इस दिशा में प्रगति प्रशंसनीय और उत्साहजनक है। राष्टर का मनोबल ऊंचा उठ रहा है और विश्व स्तर पर हमारी बात को विश्व बिरादरी बढे गौर से सुनने के लिए मजबूर होती जा रही है। सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए बनता जा रहा माहोल विश्व जनमत की उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें भारत की उपस्थिति की महत्ता के दर्शन होते हैं। भारत ने अब नया इतिहास रचा है। आधी दुनिया को अपनी जद में लेने वाली अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण पूर्णत: स्वदेशी तकनीक से भारत ने किया है और दुश्मन को दांतों तले उंगली दबाने के लिए मजबूर कर दिया है। 5000 किलोमीटर (चीन के मुताबिक 8000 किलोमीटर) यानि 3100 मील तक की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल को विकसित करने में चाल साल लगे हैं।  इस प्रक्षेपण के पश्चात भारत ने ग्लोबल इंटर मॉन्टिनेण्टल मिसाईल क्लब में अपने लिए स्थान आरक्षित कराने की ओर कदम बढा दिया है। इस क्लब में अभी तक अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस ही सम्मिलित थे, इस क्लब में आने के लिए मिसाईल की मास्क क्षमता 8000 हजार किलोमीटर होनी चाहिए। इसकी विशेषताओं में 1000 किलोमीटर तक युद्घक सामग्री ले जाना, लंबाई 17 मीटर और भार 50 टन एवं 800 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाना सम्मिलित है।

इस  पर रक्षामंत्री एके एंटनी ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि आज देश का कद बढ गया है। हम विशिष्टï देशों के क्लब में सम्मिलित हो गये हैं। सचमुच इस सफल परीक्षण के लिए तथा गौरव प्रदायिनी उपलब्धि के लिए हमारे तमाम रक्षा वैज्ञानिक तथा रक्षामंत्री एके एंटनी का सक्षम मार्गदर्शन प्रशंसा का पात्र है। इस परीक्षण से टाट्रा ट्रक विवाद जैसे मसलों से भारतीय सेना के मनोबल पर जो विपरीत प्रभाव पडा था, उसकी काली छाया छटेगी तथा पाकिस्तानी प्रेस जिसने कि भारत के भीतर की खबरों को इस प्रसार में बढ़ा चढ़ाकर पेश किया था, को भी सही संदेश मिल जाएगा कि भारत की जीवनता अपनी पूरी शिद्दत के साथ कायम है और वह अब 1962 का भारत नहीं है, बल्कि पूरी तरह जागा हुआ भारत है। जिसका यकीन अब इस बात में पूरी तरह बन गया है कि —

शस्त्रेण रक्षिते राष्टर तब शास्त्र चर्चा प्रवत्र्तते अर्थात शस्त्र से ही राष्टर रक्षा होती है तभी शास्त्र चर्चा संभव है। शस्त्र से ही शास्त्रों की रक्षा होती है। कहने का अभिप्राय है कि भारत यदि वसुधैव कुटुम्बकम और कृण्वंतो विश्व माय्र्यम को भी लेकर चल रहा है और अपनी नीतियों से विश्व शांति को सम्मान कराना चाहता है तो भी उनके पास  अग्नि तो होनी ही चाहिए हमारी अग्नि का सीधा सा अर्थ यही है इसका उद्देश्य किसी को डराना, धमकाना नहीं है।

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