वैदिक साधन आश्रम तपोवन के शरदुत्सव का दूसरा दिन- “सभी जड़ देवताओं का मुख अग्नि हैः आचार्य उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ

Screenshot_20221014-101221_WhatsApp

ओ३म्

===========
वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में आज शरदुत्सव के दूसरे दिन दिनांक 13-10-2022 को प्रातः 6.30 बजे से सन्ध्या एवं अथर्ववेद यज्ञ आरम्भ किया गया। यह सन्ध्या एवं यज्ञ का कार्य चार यज्ञ-वेदियों में सम्पन्न किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी ने सामूहिक प्रार्थना की। सामूहिक प्रार्थना के अन्त में हम आश्रम में पहुंचे। उस समय स्वामीजी देश में प्रचलित भ्रष्टाचार की चर्चा कर उसके दूर होने की प्रार्थना परमात्मा से कर रहे थे। स्वामी जी ने सबके भले के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इसके बाद स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी ने गुरुकुल पौंधा के दो ब्रह्मचारियों देवव्रत एवं देव आर्य द्वारा उच्चारित आशीर्वचनों से सभी यजमानों एवं श्रोताओं को जल छिड़क कर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। इसी के साथ ही यज्ञ की क्रिया पूरी हुई। इसके बाद आश्रम में अमृतसर से पधारे प्रसिद्ध भजनोपदेशक ऋषिभक्त पं. दिनेश पथिक जी ने एक भजन गाया जिसके बोल थे ‘काहे को तूने प्रभु नाम न गाया, सुन मन मेरे शाम सवेरे, वक्त बड़ा अनमोल गवाया। नर तन जीवन कंचन काया, परम पिता ने तेरा घर बनाया, पर तूने न कर्तव्य निभाया। काहे को तूने प्रभु नाम न गाया।।’ पथिक जी ने बहुत ही मधुर एवं प्रभावशाली स्वरों में इस भजन को गाया जिससे सभी श्रोता भावविभोर हो गये।

पथिक जी के भजन के बाद आश्रम में आगरा से पधारे वैदिक विद्वान पं. उमेश चन्द्र कुलश्रेष्ठ जी का सम्बोधन हुआ। विद्वान वक्ता ने कहा कि यज्ञ देवताओं के पूजन के लिए किया जाता है। उन्होंने पूछा देवता कौन है? आचार्य जी ने यजुर्वेद का एक मन्त्र बोला और कहा कि अग्नि, सूर्य, वायु, पृथिवी आदि देवता हैं। इनका पूजन कैसे करें? उन्होंने कहा कि सूर्य, अग्नि, वायु आदि देवता जड़ हैं। हमारे प्राणों की रक्षा करने वाले पदार्थ देवता कहलाते हैं। सूर्य यदि प्रकाश व ताप न दे तो हमारी रक्षा नहीं हो सकती। आचार्य जी ने जल तथा वायु का महत्व श्रोताओं को बताया। उन्होंने कहा कि इन सब देवताओं का पूजन आवश्यक है। अन्न ही प्राणियों का प्राण होता है इस बात को शास्त्रीय को बोलकर समझाया। आचार्य जी ने आगे कहा कि सभी देवताओं का मुख अग्नि है। यज्ञ की अग्नि को भेंट किया गया पदार्थ सभी देवताओं को प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसी मत-मतान्तर के पास यज्ञ जैसी श्रेष्ठ पूजा पद्धति नहीं है।

आचार्य जी ने जड़ देवताओं के बाद चेतन देवताओं की चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि प्रथम चेतन देवता माता है। आचार्य जी ने माता के कार्य बतायें जिसके कारण माता को देवता कहा जाता है। उन्होंने कहा माता बच्चों को दूध पिलाती है तथा अपने बच्चों का मल व मूत्र साफ करती है। ऐसे अनेक कार्य सभी मातायें करती हैं। आचार्य जी ने बताया कि दूसरा चेतन देवता पिता होता है। आचार्य जी ने पिता के उपकारों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिता अपने बच्चों का निर्माण करता है। आचार्य जी ने कहा कि तीसरा देवता आचार्य होता है। आचार्य अपने शिष्यों का चरित्र उज्जवल करते हैं। आचार्य जी ने अतिथि देवता की चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि जो सत्य धर्म वा कर्तव्यों का प्रचार करते हैं, समाज से अविद्या को दूर करते हैं, अज्ञान व अन्धविश्वासों का निवारण करते हैं वह आचार्य कहलाते हैं। आचार्य जी ने कहा कि हमें आचार्यों का भी धन्यवाद करने के साथ उनका आदर सत्कार वा उनकी सेवा करनी चाहिये। आचार्य जी ने कहा कि जड़ पदार्थों की पूजा यज्ञ के माध्यम से करनी चाहिये। देवताओं की रचना ईश्वर करता है। सूर्य, अग्नि, पृथिवी तथा वायु आदि पदार्थ ईश्वर ने बनाये हैं। माता-पिता तथा आचार्यों के शरीर भी परमात्मा ने ही रचे हैं।

आर्यसमाज के विद्वान पं. उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ जी ने कहा कि आर्यसमाज का अनुयायी ईश्वर के बनाये हुए देवताओं की पूजा करता है। उन्होंने कहा कि बाजार में बिकनेवाली वस्तुये तथा पदार्थ देवता नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि देवताओं की रचना ईश्वर करता है। आचार्य जी ने कहा कि आर्यसमाज की पूजा पद्धति संसार में श्रेष्ठतम् पूजा पद्धति है। हम यज्ञ में जो आहुतियां देते हैं उसका अत्यन्त सूक्ष्म भाग सूर्य की रश्मियों के साथ सूर्य को प्राप्त होता है। आचार्य जी ने देवताओं तथा ईश्वर में अन्तर को भी बताया। उन्होंने कहा कि देवता मरणधर्मा हैं। ईश्वर नित्य तथा अजन्मा है। ईश्वर का उपादान कारण कोई नहीं है। ईश्वर काया से रहित तथा जन्म न लेने वाली सत्ता है। उन्होंने बताया कि ईश्वर की उपासना की जाती है, पूजा नहीं की जाती। आचार्य कुलश्रेष्ठ जी के सम्बोधन के बाद ओम् मुनि जी ने शान्ति प्रार्थना ‘शान्ति कीजिए प्रभु त्रिभुवन में’ गाकर प्रस्तुत की। उनके साथ श्रोताओं ने भी शान्ति प्रार्थना गाई। ओम् मुनि जी ने शान्ति प्रार्थना आत्मविभोर होकर प्रस्तुत जो सभी श्रोताओं को अच्छी लगी। कार्यक्रम का संचालन आर्य वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम, ज्वालपुर से पधारे वैदिक विद्वान श्री शैलेशमुनि सत्यार्थी जी ने बहुत ही उत्तमता से किया। गुरुकुल पौंधा-देहरादून के दो ब्रह्मचारी देवव्रत तथा देव आर्य ने शान्ति पाठ कराने के साथ जयघोष भी लागाये। अन्त में उच्च स्वर से वैदिक ध्वनि ओ३म् का मिलकर कर उच्चारण किया गया। सबको परस्पर नमस्ते के साथ प्रातःकालीन यज्ञ सत्र का समापन हुआ। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
parmabet giriş
piabellacasino giriş
betovis giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
milanobet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betgaranti mobil giriş
parmabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
savoybetting giriş
parmabet giriş
jojobet giriş
betlike giriş
betcup giriş
hitbet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betcup giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş