उगता भारत राष्ट्र मंदिर : भारत के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल, भाग 5

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महाप्रयाण घाट – डॉ राजेंद्र प्रसाद

महाप्रयाण घाट भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल है। डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जो निरंतर दो बार राष्ट्रपति चुने गए। उनके त्याग, तपस्या, सादगी और साधना के फलस्वरूप उन्हें देश के लोगों का असीम प्यार और सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी यह समाधि बिहार की राजधानी पटना में स्थित है। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का निधन 28 फरवरी 1963 को हुआ था। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने देश के सम्मान को बढ़ाने में अपना प्रतिनिधि योगदान दिया था।

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शांतिवन – जवाहरलाल नेहरू

शांतिवन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का समाधि स्थल है। पंडित जवाहरलाल नेहरू लगभग 18 वर्ष तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने देश का नेतृत्व करते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य किए । पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश के लोकतांत्रिक राजपथ को नई गति प्रदान की। 27 में 1964 को उनका निधन हुआ। उनका अंतिम संस्कार राजघाट के निकट जहां किया गया था वहीं पर आज कल शांतिवन नामक स्थान पर उनकी समाधि है।

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विजय घाट – लाल बहादुर शास्त्री

विजय घाट भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की समाधि स्थल है। 9 जून 1964 को वह भारत के प्रधानमंत्री बने थे पूर्ण ग्राम उनके शासनकाल में पाकिस्तान से भारत का युद्ध हुआ जिसमें भारत की विजय हुई। भारत को उस युद्ध में विजय दिलाने के कारण ही उनकी समाधि को विजय घाट के नाम से जाना जाता है । 11 जनवरी 1966 को रूस के ताशकंद (वर्तमान में उज्बेकिस्तान की राजधानी ) नामक स्थान पर उनका देहांत हो गया था।विजय घाट नई दिल्ली में स्थित है।
1965 में पाकिस्तान को पर आने के बाद समझौता करने के लिए शास्त्रीजी ताशकंद गए थे। वह भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका देहांत देश से बाहर हुआ।

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शक्ति स्थल – इंदिरा गांधी

शक्ति स्थल इंदिरा गांधी की समाधि स्थल है, जो कि भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। लाल बहादुर शास्त्री जी के देहांत के पश्चात 24 जनवरी 1966 को श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश के तीसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उनके शासनकाल में 1971 में पाकिस्तान में भारत पर फिर आक्रमण किया तो उन्होंने पाकिस्तान को तोड़ते हुए एक अलग नया देश बांग्लादेश के नाम से स्थापित करते हुए अपने परंपरागत शत्रु की शक्ति को क्षीण कर दिया। इसके पश्चात उन्होंने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा की। पंजाब में बढ़ते आतंकवाद के चलते उन्हें 1984 में ब्लू स्टार ऑपरेशन करना पड़ा इसी के परिणाम स्वरूप उन्हें अपना भी बलिदान देना पड़ा। शक्ति स्थल भी नई दिल्ली में स्थित है। इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर 1984 को की गई थी।

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अभय घाट – मोरारजी देसाई

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई अपनी सिद्धांतप्रियता के लिए जाने जाते हैं । वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद से ही अपने आपको प्रधानमंत्री बनाने का प्रयास करते रहे थे। उनका यह प्रयास 1977 में तब जाकर सफल हुआ जब इंदिरा गांधी को लोगों ने सत्ता से बाहर कर पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का जनादेश विपक्ष को दिया। मोरारजी देसाई पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। यद्यपि उनकी स्वयं की पृष्ठभूमि कांग्रेस की ही थी। अभय घाट मोरारजी देसाई की समाधि स्थल है । अभय घाट अहमदाबाद में स्थित है। मोरारजी देसाई को भारत रत्न तथा पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान भी मिल चुका है। क्रमशः

डॉ राकेश कुमार आर्य

(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

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