किस व्यक्ति को परमात्मा की निकट मित्रता प्राप्त होती है और कैसे?

Screenshot_20240318_071904_WhatsApp

किस व्यक्ति को परमात्मा की निकट मित्रता प्राप्त होती है और कैसे?
कौन व्यक्ति अपने नाम, रूप और विचारों के अहंकार का नाश कर सकता है?
नाम, रूप और विचारों के मूल अहंकार का नाश करने के लिए कौन सा पथ है?

युधा युधमुप घेदेषि धृष्णुयापुरापुरंसमिदंहंस्योजसा।
नम्या यदिन्द्र सख्या परावतिनिबर्हयोनमुचिं नाम मायिनम्।।
ऋग्वेदमन्त्र 1.53.7

(युधा युधम्) एक के बाद दूसरा युद्ध (उप – एषि से पूर्व लगाकर) (घ इत्) निश्चय से (एषि – उप एषि) अत्यन्त निकट प्राप्त करते हैं (धृष्णुया) दृढ़, शत्रुओं को मिट्टी में मिलाने में सक्षम (पुरा पुरम्) एक के बाद दूसरा शहर, किला (सम् – हंसि से पूर्व लगाकर) (इदम्) ये (हंसि – सम् हंसि) पूरी तरह नष्ट करते हैं (ओजसा) महिमावान बल के साथ (नम्या) विनम्रता के साथ (यत्) जब (इन्द्र) इन्द्रियों के नियंत्रक (सख्या) मित्र की सहायता से (परावति) अत्यन्त दूर (निबर्हयः) निश्चित रूप से नाश करता है (नमुचिम्) अन्त तक पीछा करने वाला (नाम) नाम का अहंकार (मायिनम्) मायावी, कपटी।

व्याख्या:-
किस व्यक्ति को परमात्मा की निकट मित्रता प्राप्त होती है और कैसे?
कौन व्यक्ति अपने नाम, रूप और विचारों के अहंकार का नाश कर सकता है?

एक इन्द्र पुरुष अर्थात् इन्द्रियों का नियंत्रक एक के बाद एक संघर्ष को पार करता हुआ परमात्मा की मित्रता को प्राप्त करता है और उसके बहुत निकट हो जाता है। वह शत्रुओं को नाश करने के अपने संकल्प और शक्ति के साथ एक के बाद एक समस्याओं के किलों को तोड़ता जाता है। वह अपनी गौरवशाली सम्पदा के सहारे भी समस्याओं का पूर्ण नाश कर देता है। पूरी विनम्रता के साथ वह परमात्मा की मित्रता का आनन्द लेता है और निश्चित रूप से अपने नाम, रूप और विचारों का नाश करके उन्हें दूर फेंक देता है, जो अन्यथा इतनी रहस्यमयी, मायावी और दिखावा करने वाली होती हैं कि ये अन्त तक पीछा नहीं छोड़ती।

जीवन में सार्थकता: –
नाम, रूप और विचारों के मूल अहंकार का नाश करने के लिए कौन सा पथ है?

एक इन्द्र अर्थात् इन्द्रियों का नियंत्रक बनने के लिए आध्यात्मिक पथ पर चलना प्राथमिक योग्यता है। केवल एक इन्द्र ही परमात्मा की मित्रता का आनन्द ले सकता है। इन्द्र का अर्थ है वह व्यक्ति जिसने सफलता पूर्वक मन सहित अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया हो जिससे उसका बाहरी अहंकार और इच्छाएं समाप्त हो जायें। उसके बाद नाम, रूप और विचारों के मूल अहंकार को वह परमात्मा की दिव्य मित्रता से दूर फेंक पाता है। दिव्य सहायता के बिना यह मूल अहंकार प्रत्येक व्यक्ति को अन्तिम समय तक पकड़े रखता है।


अपने आध्यात्मिक दायित्व को समझें

आप वैदिक ज्ञान का नियमित स्वाध्याय कर रहे हैं, आपका यह आध्यात्मिक दायित्व बनता है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें जिससे उन्हें भी नियमित रूप से वेद स्वाध्याय की प्रेरणा प्राप्त हो। वैदिक विवेक किसी एक विशेष मत, पंथ या समुदाय के लिए सीमित नहीं है। वेद में मानवता के उत्थान के लिए समस्त सत्य विज्ञान समाहित है।

यदि कोई महानुभाव पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं तो वे अपना नाम, स्थान, वाट्सएप नम्बर तथा ईमेल 0091 9968357171 पर वाट्सएप या टेलीग्राम के माध्यम से लिखें।

अपने फोन मैं प्लेस्टोर से टेलीग्राम डाउनलोड करें जिससे आप पूर्व मंत्रो को भी प्राप्त कर सके।
https://t.me/vedas4

आईये! ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति परमात्मा के साथ दिव्य एकता की यात्रा पर आगे बढ़ें। हम समस्त पवित्र आत्माओं के लिए परमात्मा के इस सर्वोच्च ज्ञान की महान यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।

टीम
पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम
वाट्सएप नम्बर-0091 9968357171

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vdcasino
betgaranti
betpark giriş
betpark güncel giriş
vdcasino
vdcasino
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş