महर्षि दयानन्द की २००वीं जयन्ती पर महर्षि दयानन्द के दो सौ उपकार

61YNwvkddDL._AC_UF1000,1000_QL80_

१) वेद को सत्य विद्याओं का ग्रन्थ सिद्ध किया।
२) वेदों की ओर लौटों का नारा दिया।
३) वेद को ईश्वरोक्त संविधान बताया।
४) वेद को मानव जाति का धर्म ग्रंथ बताया।
५) वेदों की पुनः स्थापना की।
६) अशुद्ध वेद भाष्य को शुद्ध किया।
७) वेदों में इतिहास नहीं है यह बताया।
८) वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है यह सिद्ध किया।
९) वेद मनुष्य मात्र के लिए है यह बताया।
१०) स्त्रियों को वेद पढने अधिकार दिलाया।
११) शुद्र को वेद पढ़ने का अधिकार दिलाया।
१२) त्रैतवाद को पुनः स्थापित किया।
१३) ईश्वर जीव प्रकृति तीन अनादि तत्व बताया।
१४) वेद सिर्फ कर्मकांड के लिए नहीं है यह बताया।
१५) वेद ईश्वर प्रदत्त है मनुष्य कृत नहीं है यह सिद्ध किया।
१६) स्मृति का मतलब वेद नहीं है यह बताया।
१७) वेद में और सृष्टि में एकरूपता है यह बताया।
१८) ईश्वर और जीव एक नहीं है यह सिद्ध किया।
१९) जीव कभी ईश्वर नहीं बन सकता यह बताया।
२०) जीव ईश्वर का अंश नहीं है इस सिद्धान्त को सुलझाया।
२१) प्रकृति मिथ्या नहीं है यह बताया।
२२) छः दर्शनों में एक रुकता है यह बताया।
२३) उपनिषद ब्राह्मण आदि ग्रंथ वेद अनुकूल हो तो सत्य है यह सिद्ध किया।
२४) ईश्वर कर्मफल प्रदाता है यह बताया।
२५) ईश्वर सब सत्य विद्या और पदार्थों का मूल है यह समझाया।
२६) ईश्वर एक है ईश्वर अवतार नहीं लेता यह सिद्ध किया।
२७) ईश्वर कभी दूत पैगंबर नहीं भेजता यह समझाया।
२८) ईश्वर सर्वत्र व्यापक है
२९) वेद को आलस्य रुपी शंखासुर ले गया था यह सिद्ध किया।
३०) वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में ही प्राप्त होता है यह बताया।
३१) तीर्थ स्थानों पर जाने से पाप नहीं कटते यह बताया।
३२) गंगा में डुबकी लगाने से पाप क्षमा नहीं होते यह बताया।
३३) माता पिता ईश्वर आचार्य विद्वान ही सच्चे तीर्थ हैं।
३४) मूर्ति पूजा सीढी नहीं अपितु खाई है यह चेताया।
३५) जातिवाद को मिथ्या बताया।
३६) कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था को सही बताया।
३७) शूद्र भी ब्राह्मण बन सकता है यह उद्घोष किया।
३८) छुआछूत को मिटाया अस्पृश्यता को दूर भगाया।
३९) जन्म से नहीं कर्म से मनुष्य महान बताया।
४०) विधवाओं का विवाह उचित बताया।
४१) विधवाओं को नारकीय जीवन से निकलवाया।
४२) सती प्रथा को मानव जाति पर सबसे बडा धब्बा बताया।
४३) बहु विवाह को घातक बताया।
४४) स्त्रियों को पढ़ने का अधिकार दिलाया।
४५) पर्दा प्रथा को रोक लगाया।
४६) बाल विवाह को बंद कराया।
४७) अनमेल विवाह को बंद करवाया।
४८) नारी का सम्मान बढ़ाया।
४९) गृहस्थ आश्रम को श्रेष्ठ बताया।
५०) ब्रह्मचर्य की महिमा बताई।
५१) विवाह में गुण कर्म स्वभाव को आवश्यक बताया।
५२) वानप्रस्थ की उपयोगिता बताई।
५३) सन्यासियों का महत्व और कार्य बताया।
५४) सोलह संस्कार सिखालाया, संस्कार विधि जैसा मानव निर्माण के लिये ग्रन्थ लिखा।
५५) बाल शिक्षा सिखाई।
५६) जन्म पत्र को शोक पत्र बताया।
५७) माता निर्माता भवति बताया।
५८) बालक के लिए माता की शिक्षा सर्वोच्च बताई।
५९) बालक बालिका के लिए अलग-अलग शिक्षा बताई।
६०) अनिवार्य शिक्षा के महत्व को बताया।
६१) पाठशाला ना भेजने पर माता-पिता को दोषी बताया।
६२) विद्या काल में समान भोजन वस्त्र व्यवहार सिखाया।
६३) आर्ष शिक्षा का महत्व बताया।
६४) अनार्ष शास्त्रों की पहचान बताई।
६५) ऋषि कृत ग्रंथों का महत्व बताया।
६६) ऋषियों के ग्रंथों में मिलावट को हटाया।
६७) पठन-पाठन व्यवस्था सिखाई।
६८) ब्रह्मा से लेकर जैमिनी के तथ्यों को अपना मंतव्य बताया।
६९) महापुरुषों पर लगे दोषों को हटाया।
७०) योग विद्या सिखाई
७१) अष्टांग योग सिखाया
७२) प्राणायाम का महत्व बताया।
७३) किसी व्यक्ति विशेष की पूजा का निषेध किया।
७४) गुरुडम का खण्डन किया।
७५) पाखंड का गढ़ ढा़या।
७६) अंधविश्वास को दूर भगाया।
७७) यज्ञों में हिंसा पुरजोर खण्डन किया।
७८) नरबलि को कलंक बताया।
७९) कर्मकांड की शुद्धि करवाई।
८०) पंच महायज्ञ को प्रचलन करवाया।
८१) जादू टोना टोटका को दूर भगाया।
८२) भूत प्रेत का डर दूर भगाया।
८३) पूर्वजन्म पुनर्जन्म के महत्व को बताया।
८४) कर्मफल व्यवस्था का महत्व बताया।
८५) यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ पूजा बताया।
८६) यज्ञ को पर्यावरण के लिए अत्यावश्यक बताया।
८७) गृहस्थाश्रम के पंच महायज्ञ अनिवार्य बताया।
८८) सन्ध्या की विशेषता बताई।
८९) सन्ध्या की विधि सिखलाई।
९०) परमेश्वर को ही उपासनीय बताया।
९१) सभी प्राणियों में ईश्वर को व्याप्त बताया।
९२) अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
९३) शाकाहार का महत्व बताया।
९४) मंदिरों पर चढे रहे बलि को निषेध किया।
९५) आहार-विहार के पचड़े को मिटाया।
९६) शुद्र से भोजन व्यवस्था को सही बताया।
९७) व्रत के महत्व को बताया।
९८) फलित ज्योतिष की सच्चाई बताई।
९९) ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव को अंधविश्वास बताया।
१००) कर्मानुसार सुख-दुख बताया।
१०१) सब जीवो को जीने का अधिकार बताया।
१०२) गौ रक्षा का महत्व बताया।
१०३) गौ करुणानिधि बनाई।
१०४) सर्वप्रथम रेवाड़ी में गौशाला स्थापित कराई।
१०५) गौ रक्षा के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।
१०६) गौ रक्षा के लिए महारानी विक्टोरिया को पत्र लिखा।
१०७) गौ से कृषि और कृषि से भारत का उत्थान बताया।
१०८) पराधीन भारत में कल कारखाने खोलने की बात कही।
१०९) उद्योग लगाने के लिए सर्वप्रथम प्रयास किया।
११०) स्वदेशी को सर्वोपरि बताया।
१११) स्वदेशी वस्तुओं का महत्व बताया।
११२) भारतीय सभ्यता के स्वाभिमान को जगाया।
११३) उंगलियों की बत्ती बनाकर जालाने पर भी सत्य कहने की बात कही।
११४) बालकों की शिक्षा मौलवी पादरियों से कराने का निषेध किया।
११५) सर्वमत की एकता के लिए प्रयास किया।
११६) सबको दुराग्रह छोड़कर एक साथ लाने के लिए बल दिया।
११७) सर्वधर्म सम्मेलन बुलवाया।
११८) श्राद्ध तर्पण कर्म जीवित अवस्था में करना चाहिए यह बताया।
११९) मरने के बाद मातापिता को कुछ नहीं दिया जा सकता यह बताया
१२०) यज्ञोपवीत संस्कार पुनः प्रचलन किया।
१२१) शुद्रों और स्त्रियों को यज्ञोपवीत धारण का अधिकारी बताया।
१२२) भागवत का खंडन किया।
१२३) अठारह पुराणों को वेद विरुद्ध बताया।
१२४) अवतारवाद पूजा को हानिकारक बताया।
१२५) सत्य के प्रचार के लिए पादरियों मौलवियों से सैकड़ों बार शास्त्रार्थ किया।
१२६) काशी में सबसे बड़ा शास्त्रार्थ करके मूर्ति पूजा को वेद विरुद्ध बताया।
१२७) वेद पाठशाला की स्थापना की।
१२८) गुरुकुल प्रणाली का मार्ग प्रशस्त किया।
१२९) मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया।
१३०)मोक्ष की अवधि बताई।
१३१) ईश्वर के प्रमुख १०० नाम बताये।
१३२) ईश्वर और जीव का भेद बताया।
१३३) नमस्ते को आर्यों का अभिवादन बताया।
१३४) स्वर्ग और नरक की वास्तविक परिभाषा बताई।
१३५) स्वराज्य का सबसे पहले उद्घोष किया।
१३६) १८५७ की क्रांति में भूमिका निभाई।
१३७) स्वराज को ही सुराज बताया।
१३८) पराधीन देश में लोकतंत्र की बात कही।
१३९) नमक कर का सर्वप्रथम विरोध किया।
१४०) विदेशी राजा हमारे देश में कभी ना हो यह स्वाभिमान के साथ कहा
१४१) जंगली वस्तुओं पर चुंगी कर का विरोध किया।
१४२) स्टाम्प पेपर का विरोध किया।
१४३) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए वकालत की।
१४४) राजनीति पर गहन प्रकाश डाला।
१४५) राजाओं के लिए भी लोकतंत्र की बात कही।
१४६) धर्म और राजनीति का सुंदर समन्वय बताया।
१४७) सत्यार्थ प्रकाश जैसे अद्भुत ग्रंथ की रचना की।
१४८) प्रथम क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा को इंग्लैंड भेजा।
१४९) जीवन में १७ बार घोर विष का पान किया।
१५०) प्रचार करते हुये पत्थर खाये सांप तक फेका गया।
१५१) क्रांतिकारियों के प्रेरणा स्रोत रहे।
१५२) महादेव गोविंद रानाडे आपकी शिष्य रहे।
१५३) सत्यार्थ प्रकाश को पढकर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी बने।
१५४) १८७५ ई. में आर्यसमाज की स्थापना की।
१५५) किसी व्यक्ति विशेष को अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाया।
१५६) आर्यसमाज को जनतांत्रिक संगठन बनाया।
१५७) पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी, पंडित लेखराम, स्वामी श्रद्धानंद, लाला लाछपत राय जैसे अनेकों सेनानी प्रदान किए।
१५८) आर्य बाहर से नहीं आए यह घोषणा की।
१५९) आर्य का अर्थ श्रेष्ठ बताया।
१६०) भारत में आर्यों को मूल निवासी बताया।
१६१) आर्य और द्रविड़ के भेद को मिटाया।
१६२) आर्य द्वारा बसाया होने से प्राचीन नाम आर्यावर्त बताया।
१६३) आर्यसमाज को अपना उत्तराधिकारी बनाया।
१६४) आर्यसमाज जैसा संगठन बनाकर देश को सशक्त सेना प्रदान किया।
१६५) आर्य को जाति वाचक नहीं गुण वाचक शब्द बताया।
१६६) आर्य कोई जाति नहीं अपितु श्रेष्ठ व्यक्तियों का संगठन बताया।
१६७) आर्यसमाज में स्वयं कोई पद नहीं लिया।
१६८) राष्ट्रीय स्वाभिमान को जगाया।
१६९) अपने वेशभूषा पर गर्व करना सिखाया।
१७०) एक देश एक संस्कृति बताया।
१७१) एक देश एक भाषा के महत्व को समझाया।
१७२) हिंदी को आर्य भाषा बताया।
१७३) हिंदी को माथे की बिंदी बताया
१७४) हिंदी साहित्य के द्वारा क्रांति का सूत्रपात कराया।
१७५) अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया
१७६) हिंदी भाषा को सर्वप्रथम आर्य भाषा संबोधित किया।
१७७) हिंदी भाषा को भारत में सर्वसामान्य की भाषा बताया।
१७८) हिंदी भाषा में साहित्य लिखकर हिंदी का मान बढाया।
१७९) हिंदी भाषा को राष्ट्र एकीकरण की भाषा कहा।
१८०) बिना उर्दू शब्दों के हिंदी भाषा में ही अपने सारे ग्रंथों का लेखन कार्य किया।
१८१) जन सामान्य को समझ में आए इसलिए संस्कृत के स्थान पर हिंदी भाषा में व्याख्यान करना निश्चित किया।
१८२) विदेश में जाने का मार्ग प्रशस्त किया।
१८३) विदेश जाने से कोई पाप नहीं लगता ऐसा सिद्ध किया।
१८४) पानी जहाज की यात्रा को आवश्यक बताया।
१८५) विदेशी व्यापार करने की बात बताई
१८६) विदेश संयंत्र मंगवाने की बात कही।
१८७) कभी कोई संपत्ति नहीं बनाई।
१८८) अपना स्वयं को का कोई घर नहीं बनाया।
१८९) किसी प्रलोभन से विचलित नहीं हुए।
१९०) करोड़ों की संपत्ति ठुकराई।
१९१) गुरु के एक बार कहने पर पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
१९२) अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन किया।
१९३) कभी चरित्र को दाग लगने नहीं दिया।
१९४) समाधि को छोड़कर लोगों के दुख दूर करने का बीड़ा उठाया।
१९५) मरणोपरान्त मेरी समाधि नहीं बनवाना यह बताकर गये।
१९६) मेरी अस्थियां और राख खेत में डालने को कहा।
१९७) यह भी कहा कि मुझे कभी मत पूजना
१९८) ऐसा कहने वाला मेरे गुरु जैसा और कोई नहीं था।
१९९) बनारस में मूर्ति पूजा का खण्डन न करने पर आपको अवतार घोषित कर देंगे। ऐसे सबसे बडे प्रलोभन को ठुकराया।
२००) मानव जाति के लिये अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।

वैसे तो मेरे प्यारे ऋषि के उपकारों को मैं गिना सकूँ यह मेरी कोई औकात नहीं। फिर भी मुझे कुछ नया करने की आदत है। आप सभी महर्षि दयानन्द के अनुयायियों को मेरी तरफ से उनके २०० वें जन्मदिवस पर २०० पुष्पों की माला भेंट है। स्वीकार कीजिए!

कवि ने मेरे जैसे पागल ऋषिभक्त के लिये बरसों पहले ही कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं –

गिने जाये मुमकिन है सेहरा के जर्रे।
समुन्दर के कतरे फलक के सितारे।।
दयानन्द स्वामी मगर तेरे एहसान।
न गिनती में आये कभी हमसे सारे।।

आप सभी महानुभावों को महर्षि दयानन्द जयन्ती की बहुत-बहुत शुभकामनायें।

महर्षि दयानंद का सच्चा सिपाही

प्रचारक/ प्रसारक:
आचार्य जीवन प्रकाश
संचालक: आर्ष गुरुकुल बैरागढ़ भोपाल, म. प्र

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
meritking giriş
matbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
kralbet
kralbet
imajbet giriş
xslot giriş
betvole giriş
betvole giriş
betvole giriş
betvole giriş
gobahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
sahabet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
grandpashabet
grandpashabet
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
xslot giriş
sahabet
sahabet
xslot giriş
xslot giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş