समान नागरिक संहिता और आर्य समाज, भाग 1

IMG-20231227-WA0031

भारत में प्रत्येक राष्ट्रवासी को ( नागरिक नहीं) समान अधिकार प्राप्त हों और प्रत्येक व्यक्ति अपनी मानसिक, शारीरिक और आत्मिक उन्नति कर सके , इसके लिए ऋषियों ने तप किया। स्वामी दयानंद जी महाराज भारत के आधुनिक इतिहास के ऐसे पहले महानायक हैं जिन्होंने तप को राष्ट्र का आधार बनाया। उन्होंने इस बात को गंभीरता से अनुभव किया कि बिना तप के राष्ट्र निर्माण संभव नहीं है । यही कारण था कि उन्होंने सारे देश को तपस्वियों का देश बनाने के लिए कार्य करना आरंभ किया। अपनी इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए उन्होंने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को लागू करने के साथ-साथ वेदों की ओर लौटने का आवाहन देशवासियों से किया । वह जानते थे कि वेदों का स्वराज्य चिंतन जब तक लोगों की दृष्टि में नहीं आएगा तब तक देश तप के लिए तैयार नहीं होगा। एक प्रकार से स्वामी दयानंद जी महाराज ने भारत की आत्मिक चेतना को उस परमचेतना के साथ जोड़ दिया जिसे आप ऊर्जा का अजस्र स्रोत कह सकते हैं।
ऋषि का यह बहुत बड़ा उपकार था। उनके इतना करने मात्र से भारत अपने मूल्य को अपने आप समझ गया। जैसे ही वह परम चेतना से जुड़ा और जुड़ने के पश्चात ऊर्जा से भरा तो वह बब्बर शेर की भांति अपने शत्रु पर टूट पड़ा। उसका यह शत्रु कई क्षेत्रों में कई रूपों में खड़ा हुआ था । यदि राजनीतिक क्षेत्र में देखें तो वह विदेशी शासको के रूप में खड़ा था । सामाजिक क्षेत्र में देखें तो वह अज्ञानता और पाखंड के रूप में खड़ा था। यदि धार्मिक क्षेत्र में देखें तो वहां पर भी अज्ञानता का साम्राज्य था। इसी प्रकार आर्थिक क्षेत्र में जबरदस्त शोषण के रूप में यह शत्रु दिखाई दे रहा था।
महर्षि दयानंद जी के प्रयास से जगे हुए भारत ने अपने सामने खड़े शत्रुओं को पहचाना और उनके विनाश पर काम करने लगा।
स्वामी दयानंद जी महाराज ने जब भारत के लोगों को वेदों की ओर लौटने का आवाहन किया तो वेदों के समान दृष्टिकोण से लोगों का अपने आप परिचय हो गया। आर्य समाज एक ऐसा क्रांतिकारी संगठन है जो पहले दिन से समान नागरिक संहिता का समर्थक रहा है। इसने अपने चिंतन से, अपने लेखन से , अपने व्याख्यानों से और उपदेशों से हर स्थान पर मनुष्य मनुष्य के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने का संकल्प बार-बार दोहराया है। यदि यह कहा जाए कि आर्य समाज ही वह पवित्र संस्था है जो भारत ही नहीं संपूर्ण संसार में समान नागरिक संहिता की पैरोकार है तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। हम सभी जानते हैं कि ऊंच, अस्पृश्यता की खाई को पाटने और समाज से जातिवाद को मिटाने की पहल करने वाली संस्था आर्य समाज ही रही है। स्वामी दयानंद जी महाराज ने सभी देशवासियों को आर्य शब्द दिया। इस प्रकार उन्होंने सभी देशवासियों को एक नाम ‘आर्य’ देकर इस पवित्र शब्द को हमारी राष्ट्रीयता के साथ संलग्न किया। इससे पता चलता है कि स्वामी दयानंद जी महाराज हम देशवासियों के भीतर तो श्रेष्ठता का भाव पैदा करना चाहते ही थे, वह हमारी राष्ट्रीयता को भी सर्वोच्च श्रेष्ठता में परिवर्तित कर देना चाहते थे। यह एक ऐसा शब्द है जो मनुष्य मनुष्य के बीच में किसी भी प्रकार की दूरी नहीं रहने देता। सबको एक मुख्यधारा में समान स्तर पर और समान सम्मान के भाव से स्थापित कर देना चाहता है अर्थात आर्य शब्द हमारे लिए समान नागरिक संहिता की सबसे बड़ी गारंटी है।

ऋषियों का तप और भारतीय राष्ट्र

भारतीय राष्ट्र की मानवतावादी चिंतनधारा के पीछे ऋषियों का तप काम करता रहा है। बड़े परिश्रम और पुरुषार्थ के बाद हमारे ऋषियों ने राष्ट्र की सुव्यवस्थित योजना और स्वरूप को तैयार किया। भारत के ऋषियों के द्वारा बनाई गई यह राष्ट्र की व्यवस्था करोड़ों वर्ष तक निर्विघ्न काम करती रही। इस संबंध में अथर्ववेद ( 19: 41: 1) का यह मंत्र बड़ा प्रसिद्ध है कि :-

भद्रमिच्छन्त : ऋषय: स्वविर्द : तपोदीक्षामुपसेदुरग्रे।
ततो राष्ट्रं बलमोजस्वजातं तस्मै देवा: उपसन्नु मन्तु।

“भद्रमिच्छन्त : ऋषय” विश्व के कल्याण की कामना रखने वाले और भद्र की उपासना करने वाले ऋषियों ने तप किया। हमारे ऋषियों ने भद्र के माध्यम से राष्ट्र की पवित्रता को बनाए रखने का प्रशंसनीय प्रयास किया। उनके तप से राष्ट्र को बल मिला, तेज मिला। बल और तेज के सम्मिश्रण से जो अग्नि पैदा होती है वह राष्ट्र को तेजस्विता से ओतप्रोत करती है। उपरोक्त मंत्र का भावार्थ है कि उनके परिश्रम पूर्ण त्याग, तपस्या और राष्ट्र की ऊंची साधना के फलस्वरूप जिस प्रकार के राष्ट्र ने आकार लिया उसे देखकर देवता भी आकर इस राष्ट्र को नमस्कार करते हैं। लोक कल्याण की उच्चतम साधना में रत रहे भारत के ऋषियों के इस प्रकार के परिश्रम के पश्चात जो राष्ट्र बना उसे लोगों ने देव निर्मित देश अर्थात ऋषियों के द्वारा निर्मित किया गया देश कहा। देव निर्मित देश कहने से एक और भी बड़ी शंका का या कहिए कि इतिहास के एक महाझूठ का निराकरण अपने आप हो जाता है कि हम सब ऋषियों के त्याग तपस्या के फलों को भोगने वाले सौभाग्यशाली जन हैं । हमने कभी लोगों को ना तो उत्पीड़ित किया और ना किसी ऐसे कबीलाई संघर्ष में अपने देश को कभी फंसाया, जिसमें लोगों को अपने अधीन कर अर्थात अपना गुलाम बनाकर उन पर अपना अमानवीय शासन थोपने की प्रवृत्ति संसार के अन्य देशों में देखी जाती है। हमने पूर्ण व्यवस्थित योजना के साथ आगे बढ़ना आरंभ किया और सबको सबके अधिकारों का उपयोग करने का सुंदर परिवेश उपलब्ध कराया। हमने किसी के अधिकारों का शोषण नहीं किया बल्कि अपनी ओर से अधिकार देने की या दूसरों के अधिकारों का संरक्षण करने की मानवोचित प्रवृत्ति को अपना कर मानवता का हित संरक्षण किया। अपनी इसी सोच और पवित्र भावना के कारण भारत प्राचीन काल से ही समान नागरिक संहिता का समर्थक ही नहीं बल्कि संस्थापक देश रहा है। जो लोग दूसरों के अधिकारों का संरक्षण करने की प्रवृत्ति वाले होते हैं वही देव होते हैं । भारत देव निर्मित देश इसीलिए है कि यहां के ऐसे ही देव भावना वाले लोगों ने या ऋषि पूर्वजों ने इस राष्ट्र का निर्माण किया है।

भारतीय राष्ट्र का निर्माण और हमारे ऋषि पूर्वज

इस देव निर्मित देश में हम करोड़ों वर्ष से निवास करते चले आए हैं। भारत राष्ट्र का निर्माण ऋषियों के द्वारा हुआ है। उनके तप से दीक्षित राष्ट्र प्राचीन काल से ही शांति और व्यवस्था का समर्थक रहा है । इस राष्ट्र ने धर्म के साये में आंखें खोली हैं। धर्म से ऊर्जा प्राप्त कर भारतीय राष्ट्र ने ऐसे धर्म-राज्य की स्थापना की जो नीति अर्थात निश्चित व्यवस्था पर आधारित था। इसी निश्चित व्यवस्था को दूसरे संदर्भ में आप धर्म का सकते हैं तो निश्चित व्यवस्था का समर्थक होने के कारण राष्ट्र के रूप में भी इसका उपयोग हो सकता है। हमारी दृष्टि में राष्ट्र ऐसे लोगों से बनता है जिनका चिंतन धर्म की भट्टी में तपा हो और जो स्वाभाविक रूप से एक दूसरे के हाथ में हाथ डालकर आगे बढ़ने वाले हों। जो शोषण, उत्पीड़न, छोटे-बड़े , ऊंचनीच के भाव से मुक्त हों और जो सबको एक साथ, एक दिशा में लेकर चलने की पवित्र भावना से भरे हों।
हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि वही व्यक्ति राष्ट्र निर्माता की श्रेणी में आता है जो अपने देशवासियों के प्रति सहानुभूति का भाव रखता हो, जो अपने इतिहास नायकों से प्रेम करता हो, अपने देश की संस्कृति और धर्म के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखता हो और देश पर मर मिटने की भावना से ओतप्रोत हो। मानवता के हत्यारे लोग जिन्होंने तुर्क, मुगल या अंग्रेजों के रूप में हमारे देश पर जबरन शासन किया, कभी भी राष्ट्र निर्माता नहीं हो सकते थे। उनके आचरण ,कार्य शैली और व्यवहार को देखकर इतना अवश्य कहा जा सकता है कि ऐसे लोग तो राष्ट्र के हत्यारे होते हैं। ऐसे हत्यारे लोगों का अनुकरण करने वाले लोग भी राष्ट्र निर्माता नहीं हो सकते। यह आर्य समाज ही था जिसने सबसे पहले इस बात को लोगों को समझाया कि राष्ट्र के हत्यारों को हत्यारा कहो और राष्ट्र निर्माताओं को राष्ट्र निर्माता कहो। आज भी आर्यसमाज इसी विचारधारा में विश्वास रखता है। यही कारण है कि वह किसी भी प्रकार के तुष्टिकरण या छद्मवाद का समर्थक नहीं है।
जिन लोगों की मानसिकता में दोष था या दोष है वह कभी भी ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया…. ‘ की पवित्र भावना के उपासक नहीं हो सकते। राष्ट्र की अवधारणा उनके मानस में खंडित रूप में प्रवाहित होती है और राष्ट्र कभी भी खंडित रूप में साकार रूप नहीं ले सकता।
हमने अपनी ऋषि परंपरा को सम्मान देने और उसे जीवित रखने की भावना से प्रेरित होकर देश में गोत्र परंपरा को अपने अपने महान ऋषियों के नाम से प्रचलित किया। भारतवर्ष की सभी कुल, वंश ,परंपराएं ऋषि गोत्रों के आधार पर चल रही हैं। गोत्र परंपराओं को जीवित रखकर हम अपने महान पूर्वजों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह अलग बात है कि हम अपनी वंश, गोत्र परंपरा के पीछे खड़े ऋषियों के चिंतन को भूल गए हैं।

डॉ राकेश कुमार आर्य

Comment:

Latest Posts

bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Runtobet Giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti
betgaranti
Runtobet Giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet
betgaranti
bettilt
bettilt
betnano
betnano
artemisbet
betnano
artemisbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
runtobet 2026