नवरात्रि पर्व का वैज्ञानिक आधार*

images (5)

*
डॉ डी के गर्ग
भाग -2

ये लेख सीरीज 3 भाग में है। कृपया अपने विचार बताये

नवरात्रि पर्व पर नौ दिन के व्रत के पीछे का वैज्ञानिक कारण: हमारे शरीर में स्थित नौ द्वार है- आँख, नाक, कान, द्वार, मुँह, गुदा एवं मूत्राशय ये नौ द्वार हमको स्वास्थ्य रखने में मदद करते है बहार से रोग के जीवाणु को शरीर में प्रवेश करने से रोकते है अच्छी वायु का सेवन करते है और शरीर से गंन्दी वायु और मलमूत्र को बाहर निकलते है सभी नौ द्वारों को शुद्ध रखना जरुरी है दूसरे एक ऋतु से शरीर दूसरी ऋतु में प्रवेश करता है जिसके लिए शरीर के नौ द्वारों की मशीन को कुछ विश्राम देना जरुरी है नहीं तो मौसम बदलने के साथ नौ बीमारियों की सम्भावना हो जाती है।
इसलिए हमारे मनीषियों ने धार्मिक अनुष्ठान के साथ नौ दिन उपवास रखने का भी प्रावधान किया। इन नौ दिनों में यदि तरीके से केवल फलाहार करके उपवास कर लिया जाये तो शरीर से पिछले 6 महीने में एकत्रित विकार निकल जाते हैं और शरीर अगले 6 महीने के लिये स्वस्थ्य रहने के लिए तैयार हो जाता है।साथ में हम जो धार्मिक अनुष्ठान करते हैं उससे हमारी आत्मिक शुद्धि हो जाती है। यहाँ यह ध्यान रहे कि फलाहार यानि केवल (फल ़ आहार), ज्यादा से ज्यादा दूध बस। यदि आप फलाहार के नाम पे साबूदाने की खिचड़ी, कुट्टू के आटे की पूड़ियां, आलू और शकरकन्द का हलवा और खोवे की मिठाईयां खायेंगे तो उल्टा नुकसान होगा। उससे तो अच्छा है कि कोई व्रत न करके शुद्ध सात्विक हल्का भोजन कर लिया जाये।
इसलिए नौ दिन सात्विक भोजन करें जिसमें प्याज लहसुन मांस अंडा आदि भी ना हो कम भोजन करें मन को शांत और ईश्वर की प्रार्थना करें की हमारे शरीर की रक्षा करे यह नवरात्र व्रत व्यवस्था आयुर्वेद के प्रथम सिद्धांत पर कार्य करता है जिसमें उचित मात्रा में स्वच्छ व ताजा आहार करने को बताया है। जिससे हमारी पाचक अग्नि नष्ट न हो और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। नौ दिन की इस तपस्या के बाद १०वाँ दिन आता है जिसको दशहरा बोलते हैं दसवीं इन्द्री यानि दसवाँ है मन जिसने नौ इंद्रियों को हरा दिया इसलिए इस पर्व को दशहरा नवरात्र का व्रत कहते हैं।

नवदुर्गा के अमूर्त रूप क्या है ?
नवरात्रि कोई नव दुर्गा की नौ शक्तियों का कोई रूप नहीं हैं। शरद ऋतु की हल्की दस्तक के कारण हमारे आयुर्वेद के ज्ञाता ऋषि मुनियों ने कुछ औषधियों को इस ऋतु में विशेष सेवन हेतु बताया था। जिससे प्रत्येक दिन हम सभी उसका सेवन कर शक्ति के रूप में शारीरिक व मानसिक क्षमता को बढ़ाकर हम शक्तिवान ऊर्जावान बलवान व विद्वान बन सकें।
लेकिन इसका वास्तविक रूप विकृत कर अर्थ का अनर्थ ही कर दिया। हर दिव्यौषधि को एक शक्तिस्वरूपा कल्पित स्त्री का रूप दे दिया कल्पना में ही नौ शक्तिवर्धक औषधियों को स्त्री नाम देकर उनका वीभत्स आकार गढ़कर उन्हें मूर्त रूप में पूजना शुरू कर दिया।
नवदुर्गा के अमूर्त रूप के रूपक औषधि जिनका हमें सेवन करना चाहिए
1 हरड़ 2 ब्राह्मी 3 चन्दसूर 4 कूष्मांडा 5 अलसी 6 मोईपा या माचिका 7 नागदान 8 तुलसी 9 शतावरी
प्रथम:- शैलपुत्री यानि हरड़ – कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।
द्वितीय:- ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन व मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है।
तृतीय:- चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर – चंद्रघंटा इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है जो लाभदायक होती है। यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है।
चतुर्थ:कुष्माण्डा यानि पेठा – इस औषधि से पेठा मिठाई बनती हैं। इसलिए इसको पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदयरोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है।
पंचम:- स्कंदमाता यानि अलसी यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ रोगों की नाशक औषधि है। अलसी, नीलपुष्पी, पावर्तती, स्यादुमा एवं क्षुमा। अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरुः।। उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी है।
पष्ठम:- कात्यायनी यानि मोइया – इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त अधिक विकार व कंठ के रोग का नाश करती है।
सप्तम:- कालरात्रि यानि नागदौन – यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली और सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है।
अष्टम:-तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी काली तुलसी मरुता दवना कुढेरक अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है व हृदय रोग का नाश करती है।
नवम:-शतावरी -जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल व वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार औरं वात, पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं।
नौ तरह की वह दिव्यगुणयुक्त महा औषधियाँ निस्संदेह बहुत ही प्रभावशाली व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली जिससे हम ताउम्र हर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वयं को ढालने में सक्षम हुआ करते थे और निरोगी बन दीर्घायु प्राप्त करते थे। इस आयुर्वेद की भाषा में नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित व साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करतीं है। अतः मनुष्य को इन औषधियों का प्रयोग करना चाहिये ।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin
grandpashabet giriş
sahabet giriş
casibom giriş
onwin giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
tipobet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
Kolaybet Giriş
sahabet giriş
grandpashabet giriş