भारत के 50 ऋषि वैज्ञानिक अध्याय – 45 वैदिक हिंदू धर्म के रक्षक ऋषि देवल

Screenshot_20230606_080705_Google

वैदिक हिंदू धर्म के रक्षक ऋषि देवल

सामान्यतया एक ऐसी धारणा हमारे देश में बनाई गई है कि ऋषि मनीषियों का धर्म और राजनीति से किसी प्रकार का मेल नहीं होता। जबकि सच यह है कि शस्त्र की धार जब कभी काल विशेष में हल्की पड़ी है तो शास्त्ररक्षकों ने उसे तेज करने में अपने दायित्व का निर्वाह किया है। समाज की राजनीतिक व्यवस्था को निश्चित रूप से क्षत्रिय वर्ग संभालता है, परंतु राजनीति को भी दिशा देने का कार्य हमारे यहां ऋषि महर्षि करते आए हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब धर्म की स्थिति को सुव्यवस्थित करने का कार्य हमारे आचार्यों ने समय-समय पर किया है ।

भारत की भव्यता को ऋषियों ने दी ऊंचाई,
वेदों के गीत गाकर , जग की करी भलाई।
दुनिया ने सिर झुकाकर ऋषियों का कहना माना,
हर क्षेत्र में जगत को, राह हमने थी दिखाई।।

ऐसे ही एक महान आचार्य देवल थे। जिन्होंने सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अपने समय में समाज और धर्म पर विशेष व्यवस्थाएं देकर अपने नाम को अमर किया। यदि उनका इतिहास पढ़ा और समझा जाए तो पता चलेगा कि उनका हम सब पर कितना बड़ा ऋण है ?
बात उस समय की है जब हमारे देश पर इस्लाम के पहले प्रमुख आक्रामक मोहम्मद बिन कासिम ने 712 ईसवी में आक्रमण किया था। इस घटना को इस्लाम के मानने वालों ने चाहे जिस प्रकार महिमामंडित किया हो, पर सच यह है कि इस घटना को भारत के समकालीन विद्वानों ने भी उतना हल्के में नहीं लिया था जितना माना व समझा जाता है। इस्लाम के आक्रमणकारियों की ओर से इससे पूर्व भी कई आक्रमण हो चुके थे । यही कारण था कि सनातन धर्म के रक्षकों ने इस घटना को बहुत गम्भीरता से लिया और उठाया। कई ऐसे विद्वान थे जिन्होंने यह समझ लिया था कि 610 ईसवी में स्थापित हुए इस्लाम के द्वारा अब तक किस प्रकार अनेक देशों की संस्कृतियों को मिटाने का काम किया गया है ? यदि इसे समय रहते रोका नहीं गया तो देर सवेर यह भारत की वैदिक संस्कृति को भी मिटा डालेगा। यही कारण था कि ऋषि देवल उस समय स्वयं की मोक्ष की कामना को छोड़कर सर्व समाज और सनातन के कल्याण के लिए अपने आपको होम करने के लिए तत्पर हुए।

कोई बिरला ही जानता, है कैसा सिरजनहार।
स्वार्थभाव को छोड़कर करे जग का बेड़ा पार।।

ऋषि देवल ने जब देखा कि इस्लाम के आक्रमणकारी अपनी क्रूरता ,निर्दयता और अमानवीयता का प्रदर्शन करते हुए अनेक सनातनधर्मियों की क्रूरता पूर्वक हत्या कर चुके हैं, लाखों बहन बेटियों का शीलभंग कर चुके हैं और दिन प्रतिदिन अपने अत्याचारों में वृद्धि कर नए-नए कीर्तिमान स्थापित करते जा रहे हैं, तब उन्हें सनातन के भविष्य को लेकर चिंता हुई। 712 ई0 में राजा दाहिर सेन और उनकी सेना के सैनिकों ने बड़ी संख्या में अपना बलिदान दिया था। राजा दाहिर सेन की रानी लाडो और उनकी बेटियां, बेटे और अन्य अनेक मित्र संबंधी उस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। उस समय अनेक वैदिक धर्मी लोगों का धर्मांतरण किया गया और उन्हें जबरन वैदिक धर्मी हिंदू से मुसलमान बनाया गया। विदेशियों की मान्यताओं में विश्वास रखने वाले ऋषि देवल के लिए यह सब कुछ असहनीय हो चुका था। आए दिन के अत्याचार, नरसंहार , बहन बेटियों के शीलभंग होने की घटनाएं उनके लिए ही नहीं संपूर्ण देशवासियों के लिए चिंता और चिंतन का विषय बन चुकी थीं। क्योंकि इससे पहले भारत के लोगों ने इस प्रकार के राक्षसी कायों को देखा नहीं था।
जो लोग भारत को अपने बाहुबल से वैदिक धर्मी हिंदू से मुसलमान बनाते जा रहे थे या बनाने का संकल्प ले रहे थे, उन लोगों के विनाश की योजना बनाया जाना उस समय आवश्यक हो गया था। ऋषि देवल के भीतर संस्कृति रक्षा, धर्म रक्षा और राष्ट्र रक्षा की त्रिवेणी बह रही थी। इन तीनों की रक्षा के लिए वह दिन रात परिश्रम कर रहे थे। उनके दिन का चैन और रातों की नींद लुप्त हो चुकी थी। वह क्रांति की आधारशिला रख रहे थे और ऐसे क्रांतिकारियों की खोज में लगे थे जो मां भारती को विदेशी राक्षसों या विदेशी गिद्धों के झुण्डों से मुक्त कर सकें। उस समय जिस प्रकार इस्लाम के गिद्ध मां भारती के आंचल पर आ आकर बैठ रहे थे और चोंचें मार – मारकर उसे लहूलुहान कर रहे थे, वह दृश्य ऋषि देवल के लिए अत्यंत पीड़ादायक था। यही कारण था कि वह उस काल में उन क्षत्रियों को एक मंच पर लाने का महान परिश्रम कर रहे थे जो मां भारती के आंचल पर बैठे गिद्धों का विनाश कर सकें।

भारत मां की पीड़ा समझी, ऋषि देव महामानव ने।
तोड़ दिया था वह शिकंजा कसा हुआ था दानव ने।।

ऋषि देवल द्वारा जिस प्रकार उस समय क्रांति की नई आधारशिला रखी जा रही थी उसी का परिणाम था कि कश्मीर में ललितादित्य मुक्तापीड़ ,राजस्थान में वीर शिरोमणि बप्पा रावल ( कालभोज ) कन्नौज में राजा यशोधर्मा जैसे अनेक वीर वीरांगनाऐं इस्लाम के आक्रमणकारियों को यथोचित उत्तर दे रहे थे और जितना संभव हो रहा था उसमें अपेक्षाओं से भी आगे जाकर उन्हें नष्ट करने का महत्वपूर्ण और देशभक्ति पूर्ण कार्य कर रहे थे। हमारे इन वीर देशभक्त राजाओं ने अनेक मुस्लिम आक्रमणकारियों और दुर्दांत राक्षसों को भारत भूमि से भगाने का वंदनीय कार्य किया था। परिणामस्वरूप उस समय इस्लाम के आक्रमणकारियों को अपने भारत विजय के अभियान पर विराम लगाना पड़ा था।
उस समय बप्पा रावल ने मुसलमानों को सबक सिखाते हुए और भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करने के संकल्प के साथ ईरान और अरब तक मुसलमानों का पीछा किया था और बहुत बड़े भू-भाग से उन्हें खदेड़कर भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा की थी। इस प्रकार के प्रयासों से सिंध पर किए गए मुस्लिमों के अवैध अतिक्रमण से भारत के इस भूभाग को स्वतंत्र कराने में सहायता मिली।
उस समय अनेक ऐसे नवमुस्लिम थे जिनसे वैदिक हिंदू धर्म छुड़वाकर को जबरन मुसलमान बना लिए गए थे। उस समय के कई धर्माचार्य इस बात को लेकर बहुत ही अंतर्द्वंद में फंसे हुए थे कि इन नवमुस्लिमों को पुनः वैदिक धर्मी हिंदू किस प्रकार बनाया जाए ? इस स्थिति को कई लोगों ने ‘शुद्धिबंदी’ के नाम से व्याख्यायित किया है। ‘शुद्धिबंदी’ की स्थिति उन नवमुस्लिमों के लिए बड़ी कष्टकर थी जो मुस्लिम से पुनः हिंदू बनने के लिए आतुर थे। कोई भी आचार्य या धर्माचार्य प्रमुख इन मुस्लिमों को फिर से हिंदू धर्म में लेने के लिए तैयार नहीं था।इन मुस्लिम आक्रमणकारियों की इस प्रकार की हिंदू विनाश की नीति का एक परिणाम यह हो रहा था कि हिंदुओं की जनसंख्या तेजी से घट रही थी और मुसलमान लोग बड़ी संख्या में हिंदू को मुस्लिम बनाते जा रहे थे।

दयनीय दशा थी भारत मां की, होती जाती थी लहूलुहान।
ऋषि देवल ने सही समय पर, भारत मां को लिया संभाल।।

उस समय देवल ऋषि का आश्रम सिंधु नदी के किनारे पर था।
समाज की तात्कालिक परिस्थिति को देखते हुए कई राजाओं ने जाकर वर्तमान में उपस्थित विकट परिस्थिति का निराकरण करने के लिए ऋषि देवल से आग्रह किया। तब देवल ऋषि ने आपद्धर्म की खोज करते हुए ऐसी अनेक व्यवस्थाएं देनी आरंभ की जिनसे नवमुस्लिमों की घर वापसी अथवा शुद्धि संभव हो सकती थी। उन्होंने ‘देवल स्मृति’ नाम का एक ग्रंथ लिखा। उसमें ऐसी अनेक व्यवस्थाएं दीं और लोगों को इस बात का मार्ग बताया कि यदि कोई भाई मुस्लिम से पुनः हिंदू बनना चाहे तो उसके लिए क्या उपाय किया जा सकता है? इस प्रकार ‘देवल स्मृति’ हिंदू से मुसलमान बन गए लोगों को फिर से हिंदू बनाने या उनकी ‘घर वापसी’ सुनिश्चित करने या उनकी शुद्धि करने का विधान है। देवल ऋषि ने इस स्मृति में व्यवस्था दी कि कोई व्यक्ति यदि ‘घर वापसी’ करते हुए फिर से हिंदू बनना चाहता है तो वह एक दिन का उपवास करे और दूसरे दिन दूध से स्नान करे। इसके पश्चात उसे घर वापसी के योग्य समझ लिया जाएगा।
जहां तक किसी महिला के मुसलमान से फिर हिंदू बनने की प्रक्रिया की बात है तो इसके लिए तो उन्होंने और भी सरल प्रक्रिया का विधान किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई ऐसी महिला जो बलात्कार का शिकार हुई है या अपने मूल वैदिक धर्म से किसी भी कारण से इस्लाम में जाने के पश्चात पुनः वैदिक धर्म में आना चाहती है तो उसके लिए इतना ही पर्याप्त है कि वह एक बार के मासिक धर्म के पश्चात ही अपने मूल धर्म में लौट सकती है।
इस प्रकार उन्होंने हिंदू जाति की रक्षा के लिए अपने समय में ऐसा विधान बनाकर महान कार्य किया। इससे समकालीन इतिहास के राजा और शासकों को एक धर्मसंगत, सुसंगत और युग धर्म के अनुरूप समाधान प्राप्त हो गया। इसी को आधार बनाकर अनेक शासकों ने युद्ध के मैदान में अनेक मुस्लिम आक्रांताओं को हराकर नवमुस्लिम बने अपने हिंदू भाइयों की घर वापसी या शुद्धि का कार्य संपन्न किया।
देवल ऋषि के अनुसार शुद्धि का वार्षिक उपाय –
एक वर्ष तक चांद्रायण कर पराक व्रत करने वाला ब्राह्मण पुनःहिन्दू विप्र हो जाएगा। अन्य जाति का व्यक्ति इससे कम प्रायश्चित करेगा। यदि क्षत्रिय है तो वह एक पराक और एक कृच्छ्र व्रत करके ही शुद्ध हो जाएगा। वैश्य व्यक्ति आधा पराक व्रत से पुनः हिन्दू हो जाएगा। शूद्र व्यक्ति पांच दिन के उपवास से शुद्ध हो जाएगा। शुद्धि के अंतिम दिन बाल और नाखून अवश्य कटवाना चाहिए।(देवलस्मृति,7-10)
ब्राह्मण प्रायश्चित्त करके गो दान, स्वर्ण दान भी करे।(श्लोक13) इतना कर लेने के बाद उसे सपरिवार भोजन में पंक्ति देनी चाहिए — पंक्तिम् प्राप्नोति नान्यथा।(श्लोक14)
कोई समूह यदि एक वर्ष या इससे अधिक दिनों तक धर्मान्तरित रह गया हो तो उसे शुद्धि, वपन, दान के अलावा गंगा स्नान भी करना चाहिए-गंगास्नानेन शुध्यति।( 15 )।

विप्रों को सिंधु,सौबीर, बंग, कलिंग, महाराष्ट्र, कोंकण तथा सीमा पर जा कर शुद्धि करनी चाहिए।(श्लोक 16)।

बड़े जतन से देश बचाया, देश लूटने वालों से,
मुक्त किया भारत माता को उन दुष्टों की चालों से।

देवल ऋषि के इस प्रकार के महान कार्य के संपादन से उस समय के मुस्लिम आक्रमणकारियों और धर्माचार्यों को बहुत गहरी ठेस पहुंची थी। मुसलमानों की दुर्दशा का वर्णन करते हुए एक मुस्लिम इतिहासकार लिखता है – ” काफिर सैनिकों के डर से हमारे लोगों का सिंध में जीना हराम हो गया है , हमसे जीता हुआ सारा मुल्क ये काफिर वापस खा गए है । केवल “अल्याह फुजाह” नाम का एकलौता गढ़ हमारे पास है। जिसकी पनाह में हमें अल्लाह ने महफूज रखा है ! जिन काफ़िरों को हमने मुसलमान बनाया था वो वापस अलह को न मानने वाले (हिन्दू) बन गए हैं।”
आज हममें से कई ऐसे लोग हैं जो हमारे ऋषि मनीषियों या धर्माचार्य या महापुरुषों पर यह आरोप लगा देते हैं कि उन्होंने समय रहते मुसलमानों के विरुद्ध ऐसा कोई उपाय नहीं खोजा जिससे धर्मांतरण की प्रक्रिया को रोका जाता या जो हिंदू मुसलमान बन गए थे उन्हें फिर से हिंदू धर्म में वापस लिया जाता ? ऐसे लोगों के लिए ‘देवल स्मृति’ पढ़ना नितांत आवश्यक है। देवल ऋषि के जीवन चरित्र से हमें पता चलता है कि उन्होंने उस समय अपना सारा चिंतन हिंदुत्व की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। ऋषि देवल की आज भी प्रासंगिकता है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
kralbet