दरिद्रता और पाप देता है दुष्टों का सम्पर्क

images (2)
  • डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

जनसंख्या महाविस्फोट के मौजूदा दौर में इंसानों की ढेरों प्रजातियों का अस्तित्व बढ़ता जा रहा है। कुछ नई किस्म के बुद्धिहीन, पशुबुद्धि और आसुरी वृत्ति वाले लोगों की नई प्रजातियां जन्म ले रही हैं और कई सारे ऐसे हैं जिन्हें इंसानों की किसी प्रजाति में नहीं रखा जा सकता है।

इन्हीं में एक किस्म उन लोगों की है जो मन-मस्तिष्क के मैले और तन के गंदे हैं, इनके शरीर, मुखमण्डल तथा व्यवहार से गंदगी साफ-साफ झलकती भी है। इन अजीब किस्म के लोगों में कभी दो-चार तो कभी सारे गन्दे और हिंसक जानवरों का स्वभाव हर समय मुँह बोलता रहता है और तब जाकर कोई भी समझदार इनकी बोलचाल, स्वभाव और व्यवहार से यह अनुमान अच्छी तरह लगा सकता है कि उनमें कौन-कौन से जानवरों के अवगुण समाहित हैं।

कई लोगों के रहने का तरीका ही गंदा है, जमाने भर की गंदगी इन्हें पसंद होती है। दिन भर मुँह में पान-तम्बाखु और गुटखा ऐसे चबाते रहते हैं जैसे कि भैंसें जुगाली कर रही हो। फिर चाहे जहाँ पीक कर देना उन कुत्तों के स्वभाव को इंगित करता है जो कि जहाँ देखो वहाँ गर्व के साथ टांग उठाकर मूत्रोत्सर्ग करने से नहीं शरमाते।

कइयों के बाल बेवजह बढ़े हुए हैं और ज्यादातर बार इनका मुख बालों को इधर-उधर करने में ही लगा रहता है। अनचाहे बालों को हटाने की फुर्सत जिन्दगी भर नहीं मिल पाने से इनका झींतरिया दर्शन भालुओं को भी लजाता है। फिर ऊपर से गोल-मटोल शातिर आँखों को मोटे काँच की फ्रेम वाली खिड़की से जब ये सामने वाले की ओर जिस कुटिल निगाह से झाँकते हैं तब लगता है जैसे गिद्ध की तरह नोंच ही डालने वाले हैं।

कुछ ऐसे हैं जिनके बाल तो ठीक हैं मगर सँवारे हुए कभी नहीं होते। शायद बरसों से बालों को तेल का स्पर्श तक नहीं मिला हुआ दिखता है। कइयों के नाखून बढ़े हुए होते हैं और जाने कितने पखवाड़ों का मैल इनके नाखूनों में जमा रहकर इनका सहचर बना हुआ होता है।

कइयों का व्यवहार पशुओं से भी गया बीता है और जो इनके सामने जाता है ये भौं-भौं करने लगते हैं, बेवजह झल्लाते और चिल्लाते हैं। तब लगता है कि ये यदि श्वान होते तो उम्दा किस्म में शुमार हो ही जाते, और जो इनके सामने जाता उसे जरूर काट लेकर ही चैन लेते।

खूब सारे ऐसे हैं जिनकी हरकतों से लगता है कि ये चालाक लोमड़ियों और चतुर कौओं को भी पीछे छोड़ चुके हैं। इन लोगों को अपने ही स्वार्थ पूरे करना जिन्दगी का चरम लक्ष्य प्रतीत होता है इसलिए किसी भी हद तक जाकर, झूठ-फरेब और मक्कारी का भरपूर इस्तेमाल ताजिन्दगी करते रहते हैं और अपने खोटे सिक्के तथा घिसी-पिटी चवन्नियां चलाते रहते हैं।

ऐसे लोगों का सम्प्रदाय आजकल बहुत अधिक विस्तार पाता जा रहा है। हालात यह हैं कि ये लोग बिना कोई परिश्रम किए बहुत कुछ पाना और जमा करना चाहते हैं। फिर फैशनपरस्ती का तड़का ही ऐसा है कि ये अपनी औकात से ज्यादा दिखने और दिखाने के लिए दूसरों की बराबरी करने के लिए अतिरिक्त और अपवित्र रास्तों से जो कुछ भी प्राप्त हो सकता है, पाने और अपने नाम करने के लिए दिन-रात भिड़े रहते हैं।

इन लोगों को अपने कर्तव्यों का भान भले न हो, अपने अधिकारों को लेकर इनका दिमाग सपने में भी घुड़दौड़ करता रहता है। कई लोग पागलों की तरह व्यवहार करते हैं। इनमें आंशिक और आधे से लेकर पौने, डेढ़ और साढ़े तीन तक से लेकर इससे भी आगे के पूरे पागल शामिल हैं।

यह जरूरी नहीं कि अनपढ़ या सामान्य आदमी ही ऐसी असामान्य हरकतें करते हैं बल्कि आजकल तो खूब पढ़े-लिखे और ऊँचे ओहदों पर बैठे हुए लोगों में ऐसी हरकतें करने वालों की तादाद खूब है। इन असामान्य व्यवहार और कर्कश बोलचाल के आदी लोगों की बनिस्पत अनपढ़ और सामान्य लोग ज्यादा सभ्य लगते हैं जो बोलने और अपने व्यवहार के तरीकों का अर्थ अच्छी तरह समझते हैं और वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा इंसान को करना चाहिए।

हमारे आस-पास से लेकर दूर-दूर तक ऐसे लोगों का बाहुल्य आजकल आम बात है जिनकी बोलचाल और व्यवहार इंसानियत से मेल नहीं खाते। बड़े-बड़े लोग जल्दी पटरी से उतर जाते हैं और ऐसा व्यवहार करने लगते हैं जैसा कि नालायक और जाहिल लोग भी नहीं करते हैं।

कई बड़े-बड़े लोग हमारे संपर्क में अक्सर आते रहते हैं जिन्हें देख कर लगता है कि अपने पद की गरिमा को मटियामेट करने के लिए इससे बुरा कोई और शख़्स कभी नहीं मिल सकता था। ऐसे लोगों का न स्वयं पर विश्वास होता है, न औरों पर विश्वास कर पाने का साहस।

ऐसे लोग ताजिन्दगी अविश्वास और अंधेरों के बीच जैसे-तैसे जीते हुए अपयश प्राप्त करते हुए समय गुजारने को विवश होते हैं। इन्हें कोई भी अच्छा नहीं कहता बल्कि सारे सहकर्मी भी इनसे हैरान-परेशान ही रहते हैं।

इस किस्म में साठ साला गारन्टी वाले बड़े-बड़े साहबों से लेकर पाँच साला लोकप्रियों तक के नाम गिनाए जा सकते हैं जिनका जीवन सब कुछ होते हुए भी अपकीर्ति से साक्षात कराता है और वह भी इस कारण कि इनका व्यवहार घटिया होता है तथा वाणी की कर्कशता के तो कहने ही क्या।

इस किस्म के लोग जहाँ भी रहते हैं वहाँ खुद भी असन्तुष्ट रहते हैं और दूसरों को भी तंग करते रहते हैं। इन लोगों की वजह से कलह और तनावों का माहौल पसरा रहता है। यहाँ तक कि इनके घर वाले भी इनसे दुःखी रहते हुए इनकी गति-मुक्ति शीघ्र कर दिए जाने की करुण भाव से प्रार्थना भगवान के समक्ष करते रहते हैं लेकिन इनके दंभ और पागलपन की वजह से सामने कुछ बोल पाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

इस प्रजाति के लोग खुद भले कितने ही बड़े पद और कद पा जाएं, ऐसे लोगों में बौद्धिक तत्व का अभाव रहता है और इनके कर्कश तथा हिंसक व्यवहार के कारण जो काम इनके जिम्मे होता है वह लम्बा खींचता चला जाता है, कभी समय पर पूरा नहीं होता।

हराम का खान-पान और पाने में अव्वल आदमियों की यह प्रजाति आजकल सामान्य तौर पर दर्शनीय हो गई है। न किसी को ये पसंद आते हैं, न कोई इन्हें पसंद करता है। मजबूरियों को छोड़ दिया जाए तो ऐसे विचित्र और असामान्य लोगों के पास जाने से भी लोग हिचकते हैं।

आजकल ऐसे खूब लोग हमारे आस-पास के गलियारों में भी विद्यमान हैं जिन्हें देखना भी बुरा लगता है। ऐसे लोगों के पास जाने से अच्छे लोग कतराते हैं और इनसे दूरी बनाए रखना ही पसंद करते हैं।

यह प्रकृति का शाश्वत नियम है कि जो घृणित किस्म के मलीन लोग हैं वे अपनी घृणा को छिपाए रखने के लिए आडम्बर कुछ ज्यादा ही करते हैं और बेवजह लोगों को अपने पास जमा कर रखने के आदी होते हैं।

बेचारे उन लोगों की मानसिकता कितनी विचित्र हो जाती है जिन्हें ऐसे गंदे लोगों से काम पड़ता है या उनके पास कुछ क्षण गुजारने को विवश होना पड़ता है। ऐसे गंदे किस्म के लोगों का सान्निध्य अथवा किसी भी प्रकार संपर्क भी सामने वालों के लिए घातक होता है क्योंकि ऐसा व्यवहार करने वाले लोग स्वयं घोर दरिद्री और आलसी किस्म के होते हैं जो चाहते हुए भी अपने में कोई बदलाव नहीं ला सकते।

इन तमाम प्रजातियों के दरिद्रियों का संपर्क भी दरिद्रता और पाप देता है। इनसे सम्पर्क मात्र से हमारे पितरों की गति-मुक्ति बाधित हो जाती है और कुल के देवी-देवता नाराज होकर अनिष्टों की श्रृंखला आरंभ कर देते हैं।

ऐसे गंदे लोगों से दूरी बनाये रखते हुए हर तरह से उपेक्षित कर रखने में ही अपना भला है ताकि हमारा शुचितापूर्ण और कल्याणकारी आभामण्डल दूषित न हो। यों भी डस्टबिन और कूड़ापात्रों को हर कोई दूर ही रखना चाहता है।

—000—

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
onwin giriş
onwin giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkanyon
betkanyon
sahabet giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş