25 मानचित्रों में भारत के इतिहास का सच, भाग …6

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डॉ रविंद्र अग्निहोत्री के एक लेख के अनुसार युद्ध प्रारम्भ होते ही सम्राट पुरु के पुत्र के पहले ही प्रहार से घायल होकर सिकंदर घोड़े से गिर पड़ा, (जस्टिन के अनुसार उसका घोड़ा भी मारा गया), युद्ध तभी समाप्त हो जाता, पर सिकंदर के कुछ वफ़ादार सैनिक किसी प्रकार उसे बचाकर ले गए ।
कई लेखकों ने यह भी लिखा है कि सिकंदर तो अभी और आगे जाना चाहता था, पर उसकी सेना ने साथ देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह युद्ध करते – करते थक गई थी, ऊब गई थी और उसे घर की याद सताने लगी थी । ….थकान और ऊब विजयी व्यक्ति को सताती है या हारे हुए को ? कहीं ये विवरण अपने गर्भ में सिकंदर की पराजय की कहानी तो नहीं छिपाए बैठे हैं ?
फारसी के प्रसिद्ध कवि और इतिहासकार ” फिरदौसी ” (940–1020) ने ईरान के शासकों का क्रमवार इतिहास अपनी प्रसिद्ध कृति “शाहनामा” में लिखा है । इसमें प्रसंगवश भारत पर सिकंदर के आक्रमण की चर्चा करते हुए उसने लिखा :-

सिकंदर बद– ऊ गोफ्त कय नामदार
दो लश्कर शेकस्तः शुद अज कारज़ार
हामी दामो – ददे मगज़े मर्दुम खरद
हमी नअले – अस्प उस्तुखान बेस्परद
दो मर्दीम हर दू देलीरो जवान
सुखनगूयो वा मगज दू पहलवान

(शाहनामा भाग 7, शाहनामा प्रेस, मुंबई ; 1916; पृष्ठ 81)

अर्थात युद्ध में अपनी सेना का विनाश देखकर सिकंदर व्याकुल हो गया। उसने राजा पुरु से विनीत भाव से कहा, हे मान्यवर ! हम दोनों की सेनाओं का नाश हो रहा है। वन के पशु सैनिकों के भेजे नोच रहे हैं और घोड़ों की नालों से उनकी हड्डियाँ घिस गई हैं। हम दोनों वीर योद्धा और बुद्धिमान हैं। इसलिए सेना का विनाश क्यों हो और युद्ध के बाद उनको नीरस जीवन क्यों मिले ?
ज़रा विचार कीजिए, ऐसे शब्द युद्ध जीतने वाला कहेगा या हारने वाला ?

सिकंदर का विलाप और: पश्चात्ताप

प्लूटार्क ने सिकंदर के विलाप का वर्णन करते हुए लिखा है ,” भारत में मुझे हर स्थान पर भारतवासियों के आक्रमणों और विरोध का सामना करना पड़ा । उन्होंने मेरे कंधे घायल कर दिए, गान्धारियों ने मेरे पैर को निशाना बनाया, मल्लियों (मालव जाति के लोगों) से युद्ध करते हुए एक तीर सीने में घुस गया और गर्दन पर गदा का ज़ोरदार हाथ पड़ा …….. भाग्य ने मेरा साथ नहीं दिया और ये सब मुझे विख्यात प्रतिद्वंद्वियों से नहीं, अज्ञात बर्बर लोगों के हाथों सहना पड़ा ” यह भारत को जीतने वाले का अपनी उपलब्धियों पर गर्व से किया गया यशोगान है या हारे हुए का स्यापा ?
साथ में दिए गए मानचित्र से स्पष्ट होता है कि सिकंदर का शासन भारत के भूभाग पर स्थाई रूप से कभी स्थापित नहीं हो पाया था।

मेरी पुस्तक “25 मानचित्र में भारत के इतिहास का सच” से

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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