गांधी परिवार से अलग तबीयत के थे फिरोज

downloadफिरोज गांधी धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और प्रगतिशील होने के साथ ही सुलझे व्यक्तित्व के धनी थे और उन्हें बीमा व्यापार के राष्ट्रीयकरण के पैरोकार के तौर पर हमेशा याद किया जायेगा। फिरोज गांधी: ए पालिटिकल बायोग्राफी के लेखक शशि भूषण ने बताया कि फिरोज गांधी को इंदिरा के पति और नेहरू के दामाद के रूप में जानने वाले लोग उनकी शख्सियत से नावाकिफ हैं। उन्होंने बताया कि 12 अगस्त 1912 में मुंबई में एक पारसी परिवार में जन्मे फिरोज गांधी बतौर राजनीतिज्ञ काफी सशक्त थे और वह धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और प्रगतिशील व्यक्ति थे। भूषण ने बताया कि फिरोज गांधी ने सांसद रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की और 1955 में संसद में निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी का मामला उठाया।

उन्होंने बताया कि इसकी जांच के बाद देश के बड़े उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया को दो साल की सजा हुई। इसके बाद सरकार ने बीमा व्यापार का राष्ट्रीयकरण किया। वह बीमा व्यापार के राष्ट्रीयकरण के पैरोकार थे। भूषण ने बताया कि 1957 में फिरोज गांधी ने सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा में गड़बड़ी के लिए हरिदास मुंद्रा के खिलाफ संसद में आवाज उठाई थी। उन्होंने बताया कि इससे नेहरू सरकार की स्वच्छ छवि को ठेस पहुंची और नेहरू मंत्रिमंडल के वित्त मंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा तथा वित्त सचिव और एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी को आरोपी बनाया गया।

शशि भूषण ने बताया कि पहले इंदिरा और फिरोज के विवाह के लिए पंडित नेहरू तैयार नहीं थे लेकिन बाद में महात्मा गांधी के समझाने पर वह दोनों के विवाह के लिए तैयार हो गये। यह विवाह 26 मार्च 1942 को इलाहाबाद स्थित नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन में हिन्दू रीति रिवाज के अनुरूप हुआ था। उन्होंने बताया कि विवाह के केवल छह महीने बाद यह युगल भारत छोड़ो आंदोलन के लिए एक साल इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद रहा। हालांकि उन्होंने बताया कि नेहरू फिरोज के व्यवहार और कमला नेहरू की जिस प्रकार उन्होंने सेवा की थी, उससे बड़े प्रभावित थे।

गौरतलब है कि फिरोज गांधी लखनऊ में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रबंध निदेशक रहे। स्वतंत्र भारत के 1952 में हुए पहले आम चुनाव में वह उत्तर प्रदेश के रायबरेली से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे थे और 1957 में दोबारा यहां से चुने गये। दोनों ही चुनावों में इंदिरा गांधी ने उनके चुनाव प्रचार का संयोजन किया। शशि भूषण ने बताया कि नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा तीन मूर्ति भवन में रहकर आने वाले आगंतुकों को देखती थीं लेकिन फिरोज गांधी अपने सांसद आवास में ही रहते थे। उन्होंने बताया कि कभी-कभी इंदिरा आती थीं और उनका सामान व्यवस्थित करके चली जाती थीं।

फिरोज गांधी को 1958 में पहली बार दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद वह स्वास्थ्य लाभ के लिए इंदिरा और अपने दोनों बेटों राजीव और संजय के साथ कश्मीर गये। हालांकि आठ सितंबर 1960 को दिल का दूसर दौरा पडऩे पर उनका निधन हो गया।

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