मैं गांधीवादी नहीं हूं : शिव खेड़ा

प्रसिद्ध लेखक शिव खेड़ा से पूछा गया कि क्या आप गाँधीवादी हैं?

उनका जवाब पढ़िए:

दर्शकों में से एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा, क्या आप गाँधीवादी हैं?

मैंने अपने जीवन में एक चीज़ सीखी है, किसी प्रश्न का जवाब देने से पहले, आप सवाल को स्पष्ट करो, और दूसरी बात, कभी-कभी एक सवाल का सबसे बढ़िया जवाब एक सवाल ही होता है। इसलिए, मैंने उससे पूछा, “क्या आप बता सकते हैं, गाँधीवादी होने के मानदंड क्या हैं? आप गाँधीवादी किन लोगों को कहते हैं और गाँधीवादी होने के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?”

उसने कहा: गाँधी 3 सिद्धांतों में विश्वास रखते थे –
१) आप प्रेम से सबको जीत सकते हैं;
२) गाँधी सहनशीलता में विश्वास रखते थे;
३) गाँधी अहिंसा में विश्वास रखते थे।

और उसने मुझे फिर से पूछा, क्या आप गाँधीवादी हैं?

मैं भारत से हूँ और भारत में हमारे पास पवित्र ग्रन्थ हैं जैसे रामायण, महाभारत, भगवदगीता आदि। मुझे पता नहीं क्या मेरे दिमाग में आया, और मैंने उससे पूछा: “भद्रजन, क्या आप मुझे बता सकते हैं, क्या श्री राम गाँधीवादी थे? क्या वे प्रेम के द्वारा सभी को जीत लिए? जवाब है, नहीं!

क्या श्री राम सहनशील थे? तुम मेरी पत्नी का अपहरण कर लो, कोई बात नहीं, मैं दूसरी पत्नी लाऊँगा…? तुम मेरी दूसरी पत्नी का अपहरण कर लो, कोई बात नहीं, मैं तीसरी पत्नी लाऊँगा…? तुम मेरी तीसरी पत्नी का भी अपहरण कर लो, कोई बात नहीं, मैं चौथी पत्नी लाउगा…?
श्री राम ने कहा, मैं अपहरण करने वाले को सहन नहीं करता।

तीसरी बात, गाँधी के अहिंसा की।
मैंने उससे पूछा, राम ने क्या किया?
उनको अपने हथियार निकालने पड़े और दुष्टों का संहार करना पड़ा।
इसलिए, आत्मरक्षा के लिए भी वो हिंसा ही थी। आप उसे अहिंसा नहीं कह सकते, वो हिंसा ही थी। उसका क्या मतलब है? उसका मतलब है, राम गाँधीवादी नहीं थे।

मित्रों, आप दशम सिक्ख गुरुओं का जीवन चरित्र देखिये।

जब मुग़ल, लोगों को बलपूर्वक इस्लाम में कन्वर्ट कर रहे थे, क्या वे लोगों को प्रेम के द्वारा जीत सके? जवाब है, नहीं।

क्या उन्होंने ये कहा कि हम आपके अत्याचार को सहन करेंगे?
जवाब है, नहीं!

क्या उन्हें अपने हथियार निकालने पड़े?
जी, हाँ!

तो मित्रो, वे भी गाँधीवादी नहीं थे।

मैं यही कह सकता हूँ कि जब दुश्मन तुम्हारे बच्चों पर अत्याचार कर रहे हों, तुम्हारी महिलाओं को मंडियों में नीलाम कर रहे हों, युद्ध नहीं करने को कायरता कहते हैं। उसे सहनशीलता नहीं कहते!!!

क्या मुझे आप किसी भी हिन्दू ग्रन्थ में ये लिखा दिखा सकते हैं जहाँ ये कहा हो, जब तुम्हारे बच्चों और महिलाओं को सरे बाज़ार नीलाम किया जा रहा हो, जब तुम्हारे आन-बान-शान का प्रश्न हो, तुम उस समय ध्यान करो, कीर्तन करो, मंदिर में जाकर भजन करो? वह समय युद्ध करने का होता है, अपने गौरव के लिए!!!

मैं यही कह सकता हूँ कि एक अच्छा नेता किसी चीज़ के समर्थन में खड़ा होता है, या फिर वो किसी के खिलाफ खड़ा होता है… वो कभी भी निरपेक्ष नहीं होता। अगर वो निरपेक्ष है, तो उसे राजनेता कहते हैं।

राम ने कभी नहीं कहा, मैं निरपेक्ष इंसान हूँ। उन्होंने अच्छी चीज़ का पक्ष लिया, और बुराई के खिलाफ खड़े हो गए।

इसलिए अगर हम अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो हमें अपने उन ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए जो हम दुनिया को बताते फिरते हैं।

मैंने उस व्यक्ति से कहा, “ध्यान से सुनो, मैं गाँधीवादी नहीं हूँ!!!”

  • शिव खेड़ा (प्रसिद्ध भारतीय लेखक)

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