समझें अपनी सांसों का इशारा

वंदना भारती    

सांसें तेज चलना, गहरी सांस न ले पाना, सांस लेने में परेशानी होना कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका सामना कभी-कभार सबको करना पड़ता है। लेकिन लंबे समय तक इस स्थिति का बने रहना ठीक नहीं। यह जानना जरूरी हो जाता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। ये किन रोगों का हो सकता है संकेत, बता रही हैं वंदना भारती-लगातार अधिक शारीरिक श्रम करने पर सांसें चढऩे लगती हैं। जल्दबाजी व तनाव की स्थिति में भी सांसें उखड़ जाती हैं, पर ऐसी स्थितियों में सांसों की गति जल्द ही सामान्य भी हो जाती है। कई बार  नियमित व्यायाम व जीवनशैली में सुधार करके भी आराम मिल जाता है। पर यदि हर समय सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो ध्यान देना जरूरी है। आइये जानते हैं उन रोगों के बारे में, जिनकी वजह से सांस लेने में परेशानी हो सकती है…

फेफड़ों की समस्याएं: सांस नली के जाम होने पर या फेफड़ों में छोटी-मोटी परेशानी होने पर सांसें छोटी आने लगती हैं। किसी प्रोफेशनल की मदद से इस स्थिति से जल्दी ही राहत पाई जा सकती है। लेकिन यदि  ऐसा लंबे समय  से है तो यह किसी दूसरी बीमारी का लक्षण हो सकता है, जैसे …

अस्थमा: सांस नली में सूजन आने की वजह से वो संकरी हो जाती है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। सांस लेते समय घरघराहट और खांसी रहती है।

पलमोनरी एम्बोलिज्म: इसमें फेफड़ों तक जाने वाली धमनियां वसा कोशिकाओं, खून के थक्कों, ट्यूमर सेल या तापमान में बदलाव के कारण जाम हो जाती हैं। रक्त संचार में आए इस अवरोध के कारण सांस लेने और छोडऩे में परेशानी होती है।  छाती में दर्द भी होता है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी) इस स्थिति में सांस नली बलगम या सूजन की वजह से संकरी हो जाती है। सिगरेट पीने वालों, फैक्टरी में रसायनों के बीच काम करने वालों और प्रदूषण में रहने वाले लोगों को यह खासतौर पर होती है।

निमोनिया: यह बीमारी स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया नाम के एक कीटाणु की वजह से  होती है। दरअसल यह बैक्टीरिया श्वास नली में एक खास तरह का तरल पदार्थ उत्पन्न करता है, जिससे फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और  रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। खून में ऑक्सीजन की कमी के चलते होठ नीले पड़ जाते हैं, पैरों में सूजन आ जाती है और छाती अकड़ी हुई सी लगती है।

हृदय रोगों से जुड़े हो सकते हैं तार : दिल की बीमारियों के चलते भी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। दिल के रोग मसलन, एन्जाइना, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, जन्मजात दिल में परेशानी या एरीथमिया आदि में ब्रेथलेसनेस होती है।

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