महर्षि दयानंद के विषय में विभिन्न विद्वानों के विचार : आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

 

1) _आर्य समाज मेरी धर्म माता है तथा ऋषि दयानन्द मेरे धर्म पिता हैं ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का ज्ञान मेरे जीवन में सूर्य के समान है।_
*―पंजाब केसरी लाला लाजपतराय*

2) _आर्य समाज १०० वर्षों से ऋषि दयानन्द के उपदेशों को आगे बढाने के प्रयत्न में लगा हुआ है….उसे आशा है कि आर्य समाज शिक्षा, समाज और अध्यात्म के क्षेत्रों में अपना कार्यक्रम जारी रखकर हमारे राष्ट्र की नींव मजबूत करेगा।_
*―आर्य समाज के शताब्दी समारोह के वर्ष १९९३ ई. अजमेर में इन्दिरा गाँधी का कथन*

3) _आर्य समाज ने ब्याज सहित मूल भी वसूल किया, हजारों मलकानों व मेवों की शुद्धि, आर्य समाज के शुद्धि कार्य में मुख्य स्थान रखती हैं।_
*―लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल*

4) _Where these is a work to do these one does not miss the arya samaj ._
_अर्थात् जहाँ कहीं भी करने योग्य कार्य हैं वहाँ आर्य समाज को अनुपस्थित न पाइयेगा।_
*―c.v. चिन्ता मणि*

5) _आप धर्म में रुढ़िवादी और राजनीति में पुरोगामी नहीं हो सकते यदि आप मनुष्यों की एकता में विश्वास रखते हैं तो सभी धर्मों का सम्मान करना आवश्यक है, मनुष्य की सेवा स्वयं एक धर्म है, मुझे आशा है कि आर्य समाज इसी भावना से शिक्षा, समाज और अध्यात्म के क्षेत्रों में अपना कार्यक्रम जारी रखकर राष्ट्र की नींव मजबूत करेगा।_
*―महादेव गोविन्द रानाडे*

6) _आर्य समाज एक महाक्रान्ति की ज्वाला है।_
*―डेविस*

7) _आर्य समाज संस्था ने अकेले जितने देशभक्त उत्पन्न किये हैं, उतने और कोई नहीं कर सकता।_
*―आर्य समाज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सन् १९७५ ई. में तत्कालीन मुख्यमंत्री–पंजाब ने अमृतसर में कहा था।*

8) _आर्य समाज वर्तमान हिन्दू विचारधारा का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और मनोरंजक अध्याय है।_
*―सर हेनरी*

9) _आर्य समाज हिन्दू धर्म के अतीत गौरव की पुनः स्थापना के लिए प्रयत्नशील आन्दोलन है और राष्ट्रीय जागरण का कैतालिक है।_
*―श्री के० आर० वम्बास*

10) _आर्य समाज ने लड़कों और लड़कियों की शिक्षा, स्त्रियों की दशा के सुधार और दलित कहे जाने वाले भाइयों का सामाजिक स्तर ऊँचा करने की दिशा में बहुत अच्छा कार्य किया है।_
*―जवाहर लाल नेहरु (डिस्कवरी आफ इन्डिया में)*

11) _पिछले १०० वर्षों में राष्ट्र के पुनरुत्थान के लिए धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में आर्य समाज ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, अस्पृष्यता निवारण, शिक्षा सुधार तथा नारी जागरण की दिशा में जो भी आन्दोलन चलाये गये आर्य समाज उन सबमें अग्रगामी रहा, धार्मिक अंधविश्वासों और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए अभी भी बहुत कार्य करना बाकी है, आर्य समाज जैसी संस्थायें ही ऐसे स्वयं सेवी युवक युवतियाँ तैयार कर सकती हैं जो इस कार्य में पूरे उत्साह और निष्ठा से जुट जायें।_
*―फखरुद्दीन अली अहमद*

12) _आर्य समाज ने हिन्दू समाज में रुढ़िवाद को नष्ट करके उदारता लाने का जो प्रयास किया वह राष्ट्रीय उत्थान में एक बहुमूल्य देन है_
*―डा० रामबली पाण्डेय*

13) _आर्य समाज सामाजिक और शैक्षणिक उन्नति की ऐसी योजना प्रस्तुत करता है जिसके बिना वास्तविक उन्नति सम्भव नहीं_
*―सर हरबर्ड रिसले*

14) _आर्य समाज आन्दोलन का एक ऐसा घोषणा पत्र है जिस पर किसी भी बुद्धिजीवी, न्यायप्रिय, अपक्षपाती व्यक्ति आपत्ति करने का साहस नहीं कर सकता।_
*―एमर्सन*

15) _दम्भी और निहित स्वार्थ वर्ग द्वारा उत्पन्न की हुई शताब्दियों से चली आ रही भेदभाव पूर्ण कुरीतियों, कुप्रथाओं और रुढ़ियों की जड़ें समाज में इतनी गहरी चली गई हैं कि सन्तों–महात्माओं और समाज–सुधारकों के निरन्तर प्रयास भी उनके उन्मूलन में सफल नहीं हो पाये हैं, महर्षि दयानन्द संसार के उन महान व्यक्तियों में से थे जिनके द्वारा दिया गया बोध समाज को हमेशा प्रकाश देता रहेगा और आर्य समाज उनके आदेशों, सिद्धान्तों, और उपदेशों का समाज में निरन्तर प्रचार प्रसार करता चला आ रहा है इससे सारा देश विशेषकर हिन्दू समाज लाभान्वित हो रहा है।_
*―बाबू जगजीवन राम*

16) _मिथ्या ढकोसले को जो हिन्दू कही जाने वाली क़ौम में विद्यमान थी ऋषि दयानन्द के द्वारा स्थापित आर्य समाज ने उसे नितान्त हटा दिया।_
*―मौ० हसरत मुहवनी*

17) _यदि आर्य समाज न होता तो आज देश में ईसाई और मुसलमानों की संख्या ज्यादा होती।_
*―स्वामी विवेकानन्द*

18) _दयानन्द भारत के घर–घर में विद्यमान है, नगर–नगर और ग्राम–ग्राम में खड़े आर्य समाज के सत्संग भवन उनके गीत गा रहे हैं, राष्ट्र भाषा के अक्षर–अक्षर में उनकी तस्वीर विद्यमान है, इन्होंने भारतीयता के माथे पर लगी हुई कालिख को अपनी ज्योति से उज्जवल किया आज सारा देश दयानन्द के प्रकाश से प्रकाशमान है।_
*―रघुवीर शरण मित्र*

19) _मैं आर्य समाज को आदरणीय समझ उसे पूज्य दृष्टि से देखता हूँ।_
*―श्री एन० सी० केलकर*

20) _मुझे एक आग दिखाई पड़ती है जो सर्वत्र फैली हुई है अर्थात् असीम प्रेम की आग जो देश को जलाने वाली है जो प्रत्येक वस्तु को तपाकर शुद्ध कर रही है हिन्दू, मुसलमान इस प्रचण्ड अग्नि को बुझाने के लिए दौड़े परन्तु यह आग इतने वेग से बढ़ी कि सारा संसार ही इसके प्रकाश से प्रकाशित हो गया जिसमें अन्याय, शोषण, सामाजिक कुरीतियाँ आदि सब जलकर राख हो जायेंगी।_
*―एन्ड्रयूज जैक्सन*

21) _आर्य समाज कोरे अध्यात्मवाद और निरे भौतिकवाद दोनों का घोर विरोधी है वह वैदिक धर्म, वर्ण व्यवस्था, वैदिक आश्रम, वैदिक शिक्षा प्रणाली, वैदिक अर्थनीति, वैदिक राजधर्म की छत्रछाया में आर्य चक्रवर्ती साम्राज्य की स्थापना का आन्दोलन है। इसका स्वरुप इतना व्यापक है कि संसार की कोई भी नीति इसके क्षेत्र से बाहर नहीं हो सकती यह आन्दोलन सार्वभौमिक व सार्वदेशिक है।_
*―योगिराज महर्षि अरविन्द घोष*

22) _हमारे क्रान्तिकारी विचारों और मानसिक उन्नति के निर्माण में सबसे बड़ा हाथ आर्य समाज का ही है।_
*―शहीदे आजम–सरदार भगत सिंह*

23) _स्वतन्त्रता संग्राम में आर्य समाजियों का बड़ा हाथ रहा है।_
*―वीर सावरकर*

24) _आर्य समाज देश की एकता के लिए कार्य कर रहा है।_
*―अनन्त शयनम अयंगर (पूर्व लोकसभा अध्यक्ष)*

25) _आर्य समाज के प्रति मेरी शुभ कामनाएं हैं।_
*―(श्रीमती एनी वेसेन्ट*

26) _अखिल भूमि पर अरुणोदय सा उठा ऊष्ण तू सजकर आज। आर्य समाज–आर्य समाज।।_
*―राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त*

27) _हिन्दू जाति का सुधार करने में आर्य समाज का बहुत बड़ा हाथ है।_
*―सुभाष चन्द्र बोस*

28) _आर्य समाज ने हमारी मातृभूमि के उद्धार के लिए बहुत कुछ किया अतएव यह हमारी चिर स्थायी कृतज्ञता का पात्र है।_
*―डा० पी० सी० राय*

29) _आर्य समाज सर्वथा एक धार्मिक संस्था है। आर्य चुनी जाति, भारत चुना देश, वेद चुनी धार्मिक पुस्तक है।_
*―तत्कालीन प्रधानमंत्री (इग्लैण्ड सन् १८७५ ई.)*

30) _गोरे भारत को कदापि नहीं छोड़ते राजी–राजी।_
_अगर न देते असहयोग देश के आर्य समाजी।।_
*―हास्य कविः काका हाथरसी*

31) _जहाँ–जहाँ आर्य समाज है वहाँ–वहाँ जीवन ज्योति है।_
*―पण्डित राजगोपालाचार्य*

32) _आर्य समाज ने सामाजिक छुआछूत को हटाया धार्मिक अंधविश्वासों से समाज को छुटकारा दिलाया।_
*―मोहनदास कर्मचन्द गाँधी*

33) _आर्य समाज वह अस्पताल है जिसमें रोगी व्यक्ति भर्ती होते हैं फिर इसमें से पारस मणि बनकर बिल्कुल स्वस्थ निकलते हैं।_
*―महात्मा अमर स्वामी सरस्वती*

34) _आर्य समाजी यदि खुश हो जाये तो धन्यवाद कर देता है यदि रुष्ट हो जाये तो जीना भी हराम कर देता है।_
*―अमर स्वामी सरस्वती*

35) _आर्य समाजी वही है जो न खुद चैन से बैठे न किसी को बैठने दे।_
*―अमर स्वामी सरस्वती*

36) _दुनिया के बिगड़ों हुओं को आर्य समाज सुधार सकता है परन्तु बिगड़े हुए आर्य समाजी को कोई नहीं सुधार सकता।_
*―महात्मा विक्रम वानप्रस्थ*

37) _ऋषि दयानन्द ने जो आर्य समाज का कल्प वृक्ष लगाया है वह मुरझाने न पाये।_
*―स्वामी श्रद्धानन्द*

38) _आर्य समाज न होता तो आजादी प्राप्त करना मुश्किल था।_
*―अकबर अली (भूतपूर्व राज्यपाल)*

39) _अभ्युदय की प्राप्ति और निष्श्रैयश की सिद्धि अगर प्राप्त करनी है तो महर्षि दयानन्द प्रणीत आर्य समाज की शरण में आना ही पड़ेगा।_
*―रिसर्चस्कॉलर–राकेश कुमार आर्य एडवोकेट ( संपादक उगता भारत )*

40) _संसार के महापुरुषों ने हमें डूबने से बचाया। परन्तु महर्षि दयानन्द ने हमें तैरना सिखाया।।_
*―लाजपत राय अग्रवाल (वैदिक मिशनरी)*

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