सिक्खों के प्रति पाकिस्तानी उदारता का असली कारण क्या है ?

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गुरु नानक देव जी के 550 वें जन्म दिन के मौके पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान ने सिक्का जारी किया है l सिखो के प्रति यही सदभाव 47 मे दिखाया होता तो विभाजन नहीं होता l

District रावलपिंडी मे एक गाव है टोहा खालसा l 6 मार्च 1947 की रात आसपास के मुस्लिम ने इस गाव को घेर लिया और सिखो को इस्लाम मे शामिल होने की चेतावनी ( दावत नहीं ) दी … स्थानीय मुस्लिमो ने कहा डरने की कोई जरूरत नहीं l पर अगले दिन सिखो को समझ आया मामला बहुत गंभीर है जब और भी मुसलमान गाव के बाहर एकत्र हुये l

सिखो ने स्थानीय मुस्लिम के जरिये मुस्लिमो के साथ एक एग्रीमंट किया , हमारे घरो को बेशक लूट लो पर किसी की ह्त्या नहीं की जाएगी , किसी महिला की आबरू नहीं लूटेगी . मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियो ने कुरान पाक की कसमे खाते हुये यह वादा किया l सिखो ने 20,000 हज़ार रुपए उन मुस्लिम प्रति निधियो को दिये l

सिख समुदाय सरदार गुलाब सिंह की हवेली मे एकत्र हुये और कुछ दुख भंजनी गुरुद्वारा मे l मुसलमानो ने पहले सिखो के घरो को लूटा फिर उन्हे आग लगाना शुरू किया l उसके बाद मुसलमानो की भीड़ गुलाब सिंह की हवेली की तरफ रुख किया l अब सिखो को समझ आ गया उनका मकसद कत्ले आम और महिलाओ की आबरू लूटना है l

सिखो ने फैसला किया , हम जंग लड़ते हुये मरेंगे l 200 सिख मुसलमानो के साथ लड़ते हुये मारे गए l हवेली मे बने विशाल कुए मे सिख महिलाओ ने अपने बच्चो को ले कर छ्लांग लगानी और जान देनि शुरू की l 93 महिलाओ ने अपने प्राण दिये l

यह घटना इतनी बड़ी थी की लॉर्ड Mountbatten खुद टोहा खालसा का जायजा लेने खुद गए थे l इस घटना के चश्मदीद गवाह Raja Masood Akhtar Janjua जो उस गाव का राजपूत था , ने लॉर्ड Mountbatten को वह कूआ दिखाया था l

यह तीनों तस्वीर टोहा खालसा की है जिसे पाकिस्तान के अखबार ट्रिब्यून ने प्रकाशित किया था l

पहली तस्वीर Lord Mountbatten के टोहा खालसा के दौरे की है ,

दूसरी तस्वीर muslim mob with loot ( यही heading दिया था पाकिस्तानी अखबार ने )

तीसरी गुलाब सिंह की हवेली के कुये की जिसमे 93 सिख महिलाओ ने कूद कर जान दे दी और अपनी अस्मत बचाई थी l

सोशल मीडिया से साभार

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