क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आध्यात्मिक शक्तियों की कृपा है?

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अंशुमान आनंद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने जब से देश की सत्ता संभाली है. चीन-पाकिस्तान जैसे शत्रु अपने ही जाल में उलझकर मात खा जाते हैं. नोटबंदी और जीएसटी बड़े कदम सहजता से उठा लिए जाते हैं. अमेरिका, यूरोप और रूस जैसी महाशक्तियां सिर झुकाकर मोदी जी को ध्यान से सुनती हैं. जातियों और क्षेत्रीय रुढ़ियों को तोड़कर देश के करोड़ों लोग आंख मूंदकर उनपर भरोसा करते हैं. यह इस बात का संकेत है कि नरेन्द्र मोदी कोई सामान्य व्यक्तित्व नहीं हैं. तो फिर आखिर ऐसा क्या है जो उन्हें असाधारण बनाता है?
खास बातें
आखिर कैसे महामानव बने पीएम मोदी?

क्या इसके पीछे हैं पीएम मोदी की आध्यात्मिक साधना?
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी…यह नाम आपके मनो-मस्तिष्क पर कब्जा जमाए रखता है. आप उनके कट्टर समर्थक हों या प्रबल विरोधी. इतना तो तय है कि उनके बारे में सोचे या चर्चा किए बिना आपका एक दिन भी नहीं गुजर सकता. यह स्थिति वैश्विक महाशक्तियों से लेकर, देश के राजनेताओं या फिर सामान्य जनता, सभी की है. जो कि एक असाधारण बात है.

पीएम मोदी का धरती से आसमान तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन को गौर से देखें तो उनकी उपलब्धियां आपको स्वयं ही चमत्कारिक लगने लगेंगी. एक सामान्य से चाय बेचने वाले से देश की सर्वोच्च सत्ता और फिर वैश्विक लीडर का सम्मानजनक स्थान हासिल करना सचमुच अचरज की बात है.
लेकिन पीएम मोदी को बेहद करीब से जानने वाले लोगों के लिए यह सब अनोखा नहीं. क्योंकि वह जानते हैं कि पीएम मोदी ने आध्यात्मिक शक्तियों की कृपा हासिल की है. उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं.
पीएम मोदी के जीवन के वह रहस्यमय वर्ष
नरेन्द्र मोदी के जीवन की संपूर्ण उपलब्धियों का राज उन तीन वर्षों में छिपा है. जब वह दुनिया को त्याग कर हिमालय की बर्फीली वादियों में आध्यात्मिक साधना के लिए चले गए थे. दो से तीन सालों का यह कालखंड सबकी निगाहों से छिपा हुआ है.

यही वो समय है जिस दौरान की गई साधना ने एक सामान्य सी शख्सियत नरेन्द्र मोदी को विश्वनेता और भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री बना दिया. इन वर्षों में पीएम मोदी ने क्या किया? कहां रहे? किसका सान्निध्य हासिल किया? इन सभी प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता है. क्योंकि एक साधक के लिए आध्यात्मिक साधनाओं को गुप्त रखे जाने का ही विधान सदियों पुराना है. लेकिन इस बारे में कहीं कहीं कुछ संकेत जरुर मिलते हैं.
पीएम मोदी की आध्यात्मिक साधना के संकेत
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में पीएम मोदी के एक पुराने परिचित रामानंद संप्रदाय के संत लालबाबा नागाजी ने एक बार कुछ खास लोगों के सामने बताया था कि पीएम मोदी ने दो वर्षों तक केदारघाटी स्थित गरुड़चट्टी की हनुमान गुफा में रहे. इस दौरान उन्हें कुछ महान संतों का सान्निध्य मिला. जिनके निर्देशन में उन्होंने आध्यात्मिक साधनाएं संपन्न कीं.
नागा बाबा ने स्पष्ट रुप से कहा कि संतों के जरिए प्राप्त ईश्वरीय शक्तियां पीएम मोदी के आस पास सदैव मौजूद होती हैं. क्योंकि पीएम मोदी अपनी साधनाओं को सिर्फ सार्वजनिक हित के लिए इस्तेमाल करते हैं. कोई भी विरोधी या नकारात्मक शक्ति उन्हें अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकती.

संत शिरोमणि नागा बाबा का कहना था कि पीएम मोदी प्रतिदिन सुबह गुरुजनों से प्राप्त आध्यात्मिक विभूतियों का पुनर्जागरण करते हैं.
क्या हैं पीएम मोदी की सबसे बड़ी शक्ति?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे बड़ी शक्ति उनकी वाक् सिद्धि है. वह जो भी बोलते हैं दुनिया उससे सुनने के लिए मजबूर होती है. उनकी वाणी सुनकर जहां समर्थकों का जोश कई गुना बढ़ जाता है. वहीं उनके विरोधी तिलमिला उठते हैं. लेकिन कोई भी उनकी वाणी की उपेक्षा नहीं कर सकता.
उनकी वाक् शक्ति के बारे में एक किताब भी छापी गई है. जिसका नाम है- स्पीकिंग: द नरेन्द्र मोदी वे (Speaking The Narendra Modi Way)

इस किताब के लेखकों का स्पष्ट कहना था. कि ‘पीएम मोदी आज जिस मुकाम पर हैं तो इसमें उनकी संवाद शैली का सबसे अहम रोल है. उनके भाषणों की गूंज सिर्फ देश में ही सुनाई नहीं देती, उन्होंने अपनी अनूठी भाषण कला से दुनिया भर को प्रभावित किया है. वो बोलते हैं तो हर किसी के लिए उनके पास कुछ ना कुछ रहता है, वो अपनी बात जिस तरीके से समझाते हैं और लोगों को प्रभावित करते हैं, उससे लोग प्रेरित होते हैं, लोग उन्हें देखकर सीखना-समझना चाहते है.’
क्या ये है पीएम मोदी की वाक् शक्ति का रहस्य?
भारत की आध्यात्मिक परंपरा में वाक् शक्ति के लिए दस महाविद्याओं में नवम् मातंगी माता(नील सरस्वती) की आराधना करने का विधान है. श्याम वर्ण की यह देवी मस्तक पर चंद्रमा, वीणा, शुक, इक्षुदंड और वेद को धारण करती हैं.

मातंगी को उच्छिष्ठा, सम्मोहिनी, लघु श्यामा, राजमातंगी, वश्च मातंगी, चंतु मातंगी, कर्ण मातंगी, षडाम्नाय संध्या, सुमुखी मातंगी आदि नामों से देश के कई हिस्सों में पूजा जाता है. मातंगी की उपासना से मनुष्य की वाणी में अपूर्व आकर्षण और दिव्यता आ जाती है. उसे दुनिया के संपूर्ण ग्रंथों के सार का स्वमेव ज्ञान हो जाता है. रति, प्रीति, मनोभवा, क्रिया, शुद्धा, अनंग कुसुमा, अनंग मदना और मदनालसा जैसी मां मातंगी की शक्तियां उनकी उपासना करने वाले मनुष्य का हर क्षण मार्गदर्शन करती हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी माता मातंगी की उपासना की है, यह बात ना तो कोई बताएगा ना ही कभी इस बारे में कोई सार्वजनिक चर्चा होगी. लेकिन प्रधानमंत्री की वाक् शक्ति इस बात का प्रबल संकेत देती है कि उन्हें नवम् महाविद्या माता मातंगी का वरद हस्त प्राप्त है.
पीएम मोदी के शत्रु स्वयं ही कैसे नष्ट हो जाते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी के जीवन की दूसरी आश्चर्यजनक बात ये है कि उनके विरोधी खुद ब खुद नष्ट हो जाते हैं. पीएम मोदी का जीवन दुनिया के राजनेताओं में सबसे ज्यादा खतरे में माना जाता है. दुनिया का हर आतंकवादी उन्हें मारने के सपने देखता है. हर समय अंतराल पर नक्सली या आतंकवादी उनके प्राण हरण की कुत्सित साजिश रचते हैं. लेकिन वे कभी सफल नहीं हो पाते. ना ही कभी सफल होंगे.
यही नहीं पीएम मोदी के राजनीतिक विरोधियों का उच्चाटन हो जाता है. वह अपना मानसिक संतुलन खोकर अजीबोगरीब हरकतें करने लगते हैं.

यहां तक कि पार्टी के अंदर भी प्रधानमंत्री के विरोधियों की कमी नहीं है. लेकिन वह सभी चुपचाप समर्पण करने के लिए मजबूर हो जाते हैं. बड़े बड़े वैश्विक नेता पीएम मोदी के आभामंडल के सामने झुकने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

इतने ज्यादा आंतरिक और बाहरी विरोधियों के बीच भी घिरे हुए होकर भी पीएम मोदी लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे हैं. यह भी एक महान आश्चर्य की बात है.
आखिर क्या है पीएम मोदी के शत्रुहंता होने का राज?
भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा में मां बगलामुखी की उपासना शत्रुओं की हानि के लिए की जाती है. उनका स्थान दस महाविद्याओं में आठवां है. वह असुर की जिव्हा खींचकर संहार करते हुए दर्शाई जाती हैं.

खास बात ये है कि माता बगलामुखी का प्राकट्य स्थल पीएम मोदी की जन्मस्थली गुजरात, सौराष्ट्र का इलाका है. हल्दी से उत्पन्न होने के कारण यह पीतवर्ण मानी जाती हैं. मां बगलामुखी स्तंभन की देवी हैं. यानी उनकी उपासना करने से साधक के शत्रुओं का स्तंभन हो जाता है. वह स्वयं ही अपने कृत्यों से नष्ट हो जाते हैं.
हालांकि इस बात का कोई उल्लेख नहीं मिलता और ना ही कभी मिलेगी कि पीएम मोदी ने कभी माता पीतांबरा(बगलामुखी) की साधना की है. लेकिन उनके शत्रु जिस प्रकार स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं. उसे देखकर आध्यात्मिक विज्ञान का कोई भी जानकार स्पष्ट रुप से बता देगा कि पीएम मोदी के उपर माता बगलामुखी की कृपा है. चाहे उन्होंने उनकी साधना स्वयं की हो या फिर उन्हें अपने गुरुओं के जरिए उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ हो.
जब पीएम मोदी ने स्वयं दिया अपनी आध्यात्मिक साधना का संकेत
वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी अपने आध्यात्मिक जीवन के बारे में कुछ भी नहीं बताते है. भारतीय परंपरा में इस बारे में बोलने की मनाही भी है. क्योंकि इससे अहंकार की पोषण होता है.
लेकिन एक बार पीएम मोदी ने स्वयं ही अपनी आध्यात्मिक साधना के बारे में एक छोटा संकेत दिया था. पीएम मोदी ने एक फेसबुक पेज ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे में एक साक्षात्कार के दौरान यह स्वीकार किया था कि वह दीपावली के मौके पर एकांतवास में 5 दिन घर से दूर जंगल में बिताते थे.
दीपावली की रात्रि को भारतीय परंपरा में महाफलदायी साधना की रात कहा जाता है. इस काल में की गई साधनाएं साधक की शक्तियों का जागृत करती हैं.

पीएम मोदी ने अपने साक्षात्कार के दौरान बताया कि वह दीवाली के दौरान ऐसे घने जंगल में चले जाते थे. जहां स्वच्छ पानी के अतिरिक्त कुछ भी उपलब्ध नहीं रहता था. न अखबार, न रेडियो और न ही टीवी, इंटरनेट. इस दौरान वह 5 दिनों के लिए कामचलाऊ भोजन अपने साथ रखते थे. इस दौरान पीएम मोदी क्या जाप या पाठ करते थे. इस बारे में तो उन्होंने कुछ नहीं बताया. लेकिन इतना जरुर कहा कि वह ये समय आत्मावलोकन में बिताते थे.
इसी इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने यह बताया था कि 17 साल की उम्र में उन्होंने हिमालय की यात्रा की. इस दौरान वह ब्रह्म मुहुर्त में सुबह 3 से 3.45 तक जग जाया करते थे और बर्फीले जल से स्नान करते थे. यह सभी साधक के ही लक्षण हैं.

हम आपको एक बार फिर बता दें कि पीएम मोदी की आध्यात्मिक यात्रा के बारे में ना तो कभी खुलासा होगा और ना ही कोई तथ्य सामने आएंगे. क्योंकि भारतीय परंपरा में इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने की मनाही है. लेकिन पीएम मोदी की उपलब्धियों और उनकी जीवन यात्रा को देखकर यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि वह सामान्य व्यक्ति नहीं हैं. उन्हें आध्यात्मिक विभूतियों का आशीर्वाद हासिल है. जिसके बारे में जानना सभी के लिए कतई जरुरी नहीं.
भारत के नागरिकों के लिए यही आश्वासन पर्याप्त है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी के हाथों में हम सभी का भविष्य सुरक्षित है.

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